क्या आपके खेत की मिट्टी हो रही है कमजोर? अब 50 दिनों में घर पर बनाएं ये खाद और बढ़ाएं पैदावार

वर्मी कंपोस्ट खेती के लिए एक आसान और सस्ता विकल्प बन रहा है. किसान घर पर ही जैविक कचरे और गोबर से पोषक खाद तैयार कर सकते हैं. यह खाद मिट्टी को मजबूत बनाती है, रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करती है और पैदावार बढ़ाने में मदद करती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 14 Feb, 2026 | 05:05 PM

Organic Farming: अगर खेत की मिट्टी कमजोर हो रही हो और खाद पर खर्च बढ़ता जा रहा हो, तो इसका एक आसान और सस्ता समाधान घर पर ही मौजूद है- केंचुआ खाद यानी वर्मी कंपोस्ट. यह न केवल मिट्टी को मजबूत बनाती है, बल्कि खेती को ज्यादा टिकाऊ और किफायती भी बनाती है. अब कई किसान वैज्ञानिक तरीके से जैविक खाद तैयार कर खेती में नए प्रयोग कर रहे हैं. सही प्रक्रिया अपनाकर किसान लगभग 50 दिनों में अच्छी गुणवत्ता की केंचुआ खाद तैयार कर सकते हैं, जिससे फसलों की पैदावार बढ़ाने में मदद मिलती है.

रासायनिक खाद का विकल्प बन रही केंचुआ खाद

आज के समय में लगातार रासायनिक खादों  के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता पर असर पड़ रहा है. ऐसे में वर्मी कंपोस्ट एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रही है. यह मिट्टी में जैविक तत्व बढ़ाती है और फसलों को जरूरी पोषक  तत्व देती है. यही वजह है कि अब किसान धीरे-धीरे जैविक खाद की ओर रुख कर रहे हैं. यह खाद खेती की लागत कम करने के साथ-साथ जमीन की गुणवत्ता सुधारने में भी मदद करती है.

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वर्मी कंपोस्ट से कम लागत में बेहतर पैदावार संभव है.

ताजे गोबर से बचना जरूरी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्मी कंपोस्ट  बनाते समय सबसे जरूरी चरण “प्री-डाइजेशन” माना जाता है. ताजे गोबर का सीधा उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि उसमें बनने वाली गैस और अधिक तापमान केंचुओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं. गोबर, फसल अवशेष और रसोई के जैविक कचरे को पहले कुछ दिनों तक सड़ने के लिए छोड़ना चाहिए. इससे तापमान सामान्य हो जाता है और केंचुओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होता है. बताया जाता है कि करीब 10 क्विंटल जैविक कचरे के लिए लगभग 2 किलो केंचुए पर्याप्त होते हैं. नमी का स्तर लगभग 35 से 40 प्रतिशत बनाए रखना जरूरी होता है, ताकि केंचुए सक्रिय  रह सकें.

सही संरचना से मिलती है अच्छी खाद

वर्मी कंपोस्ट की सफलता सही संरचना और तैयारी पर निर्भर करती है. किसान लगभग 1 मीटर चौड़ा और करीब डेढ़ फीट गहरा गड्ढा या बेड तैयार कर सकते हैं. इसकी लंबाई उपलब्ध जगह के अनुसार रखी जा सकती है. तैयार मिश्रण को 15 से 20 दिनों तक सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है. इसके बाद जब तापमान सामान्य हो जाए, तब केंचुए डाले जाते हैं. केंचुओं को अंधेरा पसंद होता है, इसलिए बेड को पुआल, घास  या जूट की बोरियों से ढककर रखना चाहिए. इससे नमी भी बनी रहती है और केंचुओं का विकास बेहतर होता है.

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केंचुआ खाद यानी वर्मी कंपोस्ट

50 दिनों में तैयार हो जाती है खाद

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सही देखभाल और वातावरण मिलने पर केंचुए लगभग 50 दिनों में कचरे को काली, दानेदार और गंधहीन खाद में बदल देते हैं. तैयार खाद को छलनी से छानकर केंचुओं को अलग किया जा सकता है, ताकि उन्हें अगली बार फिर इस्तेमाल किया जा सके. विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश या तेज धूप से बचाने के लिए बेड पर शेड या प्लास्टिक कवर  लगाना फायदेमंद होता है. इससे खाद के पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं.

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Published: 14 Feb, 2026 | 05:05 PM

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