Gardening tips: अगर आप बागवानी करते हैं, चाहे घर की छत पर कुछ गमले ही क्यों न हों, तो आपने जरूर महसूस किया होगा कि समय के साथ मिट्टी की ताकत कम होने लगती है. पौधे पहले जैसे हरे-भरे नहीं दिखते, फूल कम आने लगते हैं और सब्जियों की पैदावार भी घट जाती है. ऐसे में लोग अक्सर महंगी रासायनिक खाद का सहारा लेते हैं, लेकिन इसका असर मिट्टी पर लंबे समय में अच्छा नहीं होता.
यहीं पर काम आती है एक देसी और भरोसेमंद चीज- सरसों की खली. यह साधारण दिखने वाली खली आपके बगीचे के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
आखिर सरसों की खली होती क्या है?
हम सबके घर में सरसों का तेल इस्तेमाल होता है. जब सरसों के बीजों से तेल निकाला जाता है, तो उसके बाद जो ठोस हिस्सा बचता है, वही सरसों की खली कहलाता है. यही खली सुखाकर या पीसकर खाद के रूप में इस्तेमाल की जाती है.
गांवों में किसान सालों से इसका उपयोग खेतों में करते आए हैं. अब शहरों में भी लोग इसे गमलों, किचन गार्डन और लॉन में इस्तेमाल करने लगे हैं.
सरसों की खली में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. ये तीनों तत्व पौधों की बढ़वार, जड़ों की मजबूती और फूल-फल बनने के लिए बहुत जरूरी हैं.
मिट्टी को देती है नई ऊर्जा
सरसों की खली सिर्फ पौधों को ही नहीं, बल्कि मिट्टी को भी मजबूत बनाती है. इसमें भरपूर जैविक पदार्थ होता है, जो मिट्टी में रहने वाले अच्छे सूक्ष्मजीवों को बढ़ावा देता है. यही सूक्ष्मजीव मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखते हैं. अगर आपकी मिट्टी सख्त हो गई है या पानी जल्दी सूख जाता है, तो सरसों की खली उसे नरम और जीवंत बनाने में मदद करती है. सबसे अच्छी बात यह है कि यह धीरे-धीरे पोषण देती है. रासायनिक खाद की तरह अचानक तेज असर नहीं करती, जिससे पौधों की जड़ें जलने का खतरा रहता है.
फूल और फल बढ़ाने में मददगार
कई माली बताते हैं कि जब उन्होंने नियमित रूप से सरसों की खली का उपयोग शुरू किया, तो गुलाब, गुड़हल और गेंदा जैसे फूलदार पौधों में ज्यादा और लंबे समय तक फूल आने लगे. सब्जियों जैसे टमाटर, मिर्च, बैंगन और लौकी में भी इसका अच्छा असर देखने को मिलता है. फल बड़े और स्वस्थ बनते हैं. यह पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती है, जिससे वे जल्दी बीमार नहीं पड़ते.
कीट और फफूंद से भी बचाव
सरसों की खली में कुछ प्राकृतिक तत्व होते हैं जो मिट्टी में हानिकारक कीटों और फफूंद को कम करने में मदद करते हैं. अगर पौधों की पत्तियां बार-बार पीली पड़ती हैं या जड़ें कमजोर हो रही हैं, तो यह खाद काफी मददगार साबित हो सकती है. इससे पौधे अंदर से मजबूत बनते हैं और मौसम के बदलाव को भी बेहतर तरीके से सह पाते हैं.
कैसे करें सही इस्तेमाल?
सरसों की खली का उपयोग बहुत आसान है. आप इसे पाउडर के रूप में मिट्टी में मिला सकते हैं. गमले में थोड़ा-सा पाउडर डालकर हल्के हाथ से मिट्टी में मिला दें और फिर पानी दे दें.
दूसरा तरीका है इसका घोल बनाना. इसके लिए सरसों की खली को पानी में 3 से 5 दिन तक भिगोकर रखें. रोज इसे एक बार हिलाएं. बाद में इस पानी को छानकर पौधों में डालें. यह तरीका खासकर फूल और फल देने वाले पौधों के लिए बहुत फायदेमंद है. ध्यान रखें कि इसे ज्यादा मात्रा में सीधे जड़ों के पास न डालें. कम मात्रा से शुरुआत करें और पौधों की प्रतिक्रिया देखकर मात्रा बढ़ाएं.
क्यों है हर माली के लिए जरूरी?
सरसों की खली सस्ती है, आसानी से उपलब्ध है और पूरी तरह जैविक है. इससे मिट्टी की सेहत सुधरती है, रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होती है और पौधों की गुणवत्ता बेहतर होती है.
अगर आप चाहते हैं कि आपका बगीचा लंबे समय तक हरा-भरा रहे और आपकी सब्जियां व फूल प्राकृतिक तरीके से बढ़ें, तो सरसों की खली को अपनी बागवानी का हिस्सा जरूर बनाएं. यह एक छोटा-सा बदलाव है, लेकिन मिट्टी, पौधों और पर्यावरण – तीनों के लिए बड़ा फायदा लेकर आता है.