किचन गार्डन के लिए परफेक्ट है हल्दी, जानिए रोपण से कटाई तक का तरीका

बाजार में मिलने वाली हल्दी कई बार पुरानी या रसायनों से उपचारित होती है. ऐसे में घर पर उगाई गई हल्दी पूरी तरह ताजी, खुशबूदार और रसायन मुक्त होती है. इसके इस्तेमाल से न केवल खाने का स्वाद बढ़ता है, बल्कि इम्यूनिटी मजबूत होती है और छोटी-मोटी बीमारियों में भी राहत मिलती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 22 Jan, 2026 | 12:59 PM

Gardening Tips: आजकल लोग फिर से प्राकृतिक और शुद्ध चीजों की ओर लौट रहे हैं. रसोई में इस्तेमाल होने वाली चीजें अगर घर पर ही उगाई जाएं, तो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भरोसा भी बढ़ जाता है. हल्दी ऐसा ही एक मसाला है, जो भारतीय रसोई का अभिन्न हिस्सा है. यह सिर्फ खाने का रंग और स्वाद नहीं बढ़ाती, बल्कि इसमें मौजूद औषधीय गुण इसे रोजमर्रा की जरूरत बना देते हैं. अच्छी बात यह है कि हल्दी उगाने के लिए आपको खेत या बड़ी जगह की जरूरत नहीं है. थोड़ी सी समझदारी और देखभाल से आप इसे अपने घर के गमले में भी आसानी से उगा सकते हैं.

क्यों खास है घर की उगाई हुई हल्दी

बाजार में मिलने वाली हल्दी कई बार पुरानी या रसायनों से उपचारित होती है. ऐसे में घर पर उगाई गई हल्दी पूरी तरह ताजी, खुशबूदार और रसायन मुक्त होती है. इसके इस्तेमाल से न केवल खाने का स्वाद बढ़ता है, बल्कि इम्यूनिटी मजबूत होती है और छोटी-मोटी बीमारियों में भी राहत मिलती है. यही वजह है कि अब लोग किचन गार्डन में हल्दी को खास जगह देने लगे हैं.

हल्दी उगाने के लिए सही मिट्टी क्यों जरूरी है

हल्दी की जड़ें यानी कंद मिट्टी के अंदर फैलती हैं, इसलिए मिट्टी का चुनाव बहुत अहम होता है. हल्की, भुरभुरी और नमी को पकड़कर रखने वाली मिट्टी हल्दी के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है. आप साधारण बगीचे की मिट्टी में थोड़ी रेत और अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद मिला सकते हैं. इससे मिट्टी में जल निकास भी ठीक रहेगा और जड़ों को पोषण भी मिलेगा. ऐसी मिट्टी में उगी हल्दी का रंग गहरा और स्वाद ज्यादा अच्छा होता है.

बीज के रूप में हल्दी के कंद कैसे चुनें

हल्दी उगाने के लिए बीज की जगह कच्ची हल्दी के कंद लगाए जाते हैं. कोशिश करें कि बाजार से ताजी और स्वस्थ हल्दी लें, जिस पर कोई सड़न या फफूंद न हो. अगर हल्दी के टुकड़ों पर छोटी-छोटी आंखें दिख रही हों, तो यह और भी बेहतर है. इन्हें 2–3 इंच के टुकड़ों में काटकर एक-दो दिन छाया में सुखा लें, ताकि कटे हिस्से थोड़े सूख जाएं. इससे कंद सड़ते नहीं हैं और जल्दी अंकुर निकलते हैं.

गमले में हल्दी लगाने का सही तरीका

हल्दी के लिए मध्यम आकार का गमला सबसे अच्छा रहता है, जिसमें नीचे पानी निकलने का छेद हो. गमले में तैयार मिट्टी भरकर हल्दी के टुकड़ों को ऊपर की ओर आंख रखते हुए मिट्टी में हल्का दबा दें. इन्हें बहुत गहराई में न दबाएं, बस ऊपर से हल्की मिट्टी डालना काफी है. रोपण के बाद हल्का पानी दें ताकि मिट्टी अच्छे से बैठ जाए.

पानी और धूप का संतुलन कैसे रखें

हल्दी को नमी पसंद है, लेकिन ज्यादा पानी नुकसान भी पहुंचा सकता है. मिट्टी हमेशा हल्की गीली रहे, इसका ध्यान रखें. रोज थोड़ा पानी देना काफी होता है, खासकर गर्मियों में. धूप की बात करें तो हल्दी को सीधी तेज धूप से ज्यादा, हल्की और सुबह की धूप पसंद होती है. ऐसी जगह रखें जहां दिन में कुछ घंटे धूप और बाकी समय छांव मिले.

कितने समय में मिलेगी घर की हल्दी

हल्दी एक धैर्य मांगने वाला पौधा है. आमतौर पर 8 से 10 महीने में इसकी पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, जो इस बात का संकेत है कि कंद तैयार हो चुके हैं. तब आप मिट्टी हटाकर हल्दी निकाल सकते हैं. ताजी हल्दी को धोकर सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है या सुखाकर पाउडर भी बनाया जा सकता है.

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