Punjab Wheat Stock: पंजाब में भंडारण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. क्योंकि प्रदेश में गोदाम पहले से ही अनाज से भरे हुए हैं और गेहूं खरीद का सीजन शुरू होने में सिर्फ छह हफ्ते बचे हैं. कहा जा रहा है कि आने वाले हफ्तों में करीब 1.25 करोड़ टन गेहूं मंडियों में पहुंचने की उम्मीद है, लेकिन लगभग 50 लाख टन गेहूं रखने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है. खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रधान सचिव राहुल तेवारी ने कहा कि अगर मंडियों के शेड को अस्थायी खुले प्लेटफॉर्म में बदला भी जाए, तो केवल 12 से 15 लाख टन अतिरिक्त जगह ही बनाई जा सकती है. इसके बाद भी बड़ी मात्रा में गेहूं के लिए उचित भंडारण नहीं मिल पाएगा.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, तेवारी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से इस मुद्दे को उठाने की मांग की है. उनका कहना है कि 15 फरवरी से 15 अप्रैल के बीच अगर अनाज का तेजी से उठान और दूसरे राज्यों में भेजने की प्रक्रिया तेज की जाए, तभी गोदामों में नई फसल के लिए जगह बन पाएगी. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पहले इस मुद्दे को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रह्लाद जोशी के सामने उठाया था. उन्हें आश्वासन दिया गया था कि पंजाब से दूसरे राज्यों में अनाज का उठान और परिवहन बढ़ाया जाएगा.
5 लाख टन चावल और गेहूं ही बाहर भेजा जा रहा है
लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अब तक ऐसा नहीं हुआ है. फिलहाल केवल करीब 5 लाख टन चावल और गेहूं ही बाहर भेजा जा रहा है, जो समस्या सुलझाने के लिए काफी नहीं है. स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि पिछले साल का लगभग 50 लाख टन गेहूं अभी भी राज्य में रखा हुआ है. पंजाब की कुल भंडारण क्षमता करीब 75 लाख टन है, जिसमें गोदाम, साइलो और खुले प्लेटफॉर्म शामिल हैं. इसके बावजूद अतिरिक्त स्टॉक बड़ी चिंता बना हुआ है.
मार्च में कम से कम 25 लाख टन गेहूं पंजाब से बाहर भेजना जरूरी है
अधिकारियों का कहना है कि फरवरी और मार्च में कम से कम 25 लाख टन गेहूं पंजाब से बाहर भेजना जरूरी है, ताकि आने वाली फसल के लिए जगह बन सके. अगर 15 अप्रैल तक स्टॉक नहीं निकाला गया, तो नई फसल का प्रबंधन मुश्किल हो जाएगा. खरीद के दौरान परिवहन पर असर पड़ेगा और मंडियों से अनाज उठाने में देरी किसानों में गुस्सा पैदा कर सकती है, क्योंकि वे समय पर भुगतान और खरीद पर निर्भर हैं. पंजाब में खरीद में देरी बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदल सकती है और किसानों को असंतुष्ट कर सकती है. यह 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सरकार के लिए जोखिम बन सकता है.