Punjab News: पंजाब सरकार ने राज्य में पोटाश की खोज को तेज करने के प्रयास बढ़ा दिए हैं, ताकि देश की कृषि में इस्तेमाल होने वाले पोटाश पर आयात की भारी निर्भरता कम की जा सके. पंजाब के खनन एवं भूविज्ञान मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) और राज्य खनन एवं भूविज्ञान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक में 2025-26 फील्ड सीजन के दौरान पूरी हुई खोज, चल रही ड्रिलिंग गतिविधियों और 2026-27 फील्ड सीजन के लिए प्रस्तावित प्रारंभिक और सर्वेक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा की गई. खासकर फाजिल्का और श्री मुक्तसर साहिब जिलों पर ध्यान केंद्रित करते हुए ये समीक्षा की गई.
GSI अधिकारियों ने कहा कि कबरवाला और शेरगढ़-दलमीरखेड़ा ब्लॉकों में G4 स्टेज की खोज पूरी हो चुकी है और राज्य सरकार को भूवैज्ञानिक रिपोर्ट सौंप दी गई है. 2026-27 के लिए फाजिल्का जिले के केरा-खेड़ा और सय्यदवाला ब्लॉकों में सर्वेक्षण और कंधवाला-रामसरा ब्लॉक में प्रारंभिक खोज के लिए 15 ड्रिलिंग साइटें प्रस्तावित की गई हैं. अधिकारियों ने यह भी कहा कि पंजाब के पूरे इवापोराइट बेसिन का भू-भौतिक (geophysical) तरीकों से सर्वेक्षण किया जा रहा है और करीब 50 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को विस्तृत खोज के लिए चिन्हित किया गया है.
करीब 99 प्रतिशत पोटाश आयात करता है
बरिंदर कुमार गोयल ने अधिकारियों को चल रही कार्यवाही को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया और कहा कि सभी ड्रिलिंग और नक्शा तैयार करने की गतिविधियां तय समय पर पूरी हों. उन्होंने मासिक समीक्षा बैठकें आयोजित करने का भी आदेश दिया ताकि प्रगति समय पर सुनिश्चित हो सके. मंत्री ने कहा कि पोटाश कृषि के लिए बेहद जरूरी है और वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का करीब 99 प्रतिशत पोटाश आयात करता है. पंजाब में पोटाश खोज में सफलता से किसानों को फायदा होगा, खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी और राज्य और देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा.
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जरूरत से ज्यादा उर्वरक इस्तेमाल पर नियंत्रण के निर्देश
कल ही खबर सामने आई थी कि केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट में देश में उर्वरकों के अधिक इस्तेमाल को लेकर पंजाब और हरियाणा के कई जिलों का नाम सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के 14 और हरियाणा के 9 जिले देश के शीर्ष 100 सबसे ज्यादा यूरिया इस्तेमाल करने वाले जिलों में शामिल हैं. पंजाब का संगरूर जिला सबसे ऊपर है, जहां पिछले साल 2.82 लाख मीट्रिक टन यूरिया इस्तेमाल हुआ. यह रिपोर्ट 9 जनवरी की है और इसे रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने जारी किया है. मंत्रालय ने संबंधित अधिकारियों को जरूरत से ज्यादा उर्वरक इस्तेमाल पर नियंत्रण के निर्देश दिए हैं.