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लुधियाना बना वायरस रहित आलू बीज का केंद्र, पैदावार में बढ़ोतरी की उम्मीद.. इन राज्यों में सप्लाई बढ़ी
लुधियाना जिला अब वायरस-रहित और रोग-प्रतिरोधी आलू बीज का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है. वैज्ञानिकों और किसानों की हाई-टेक बैठक में इन-सीटू मिश्रण, मुल्चिंग और प्रिसिजन मशीनरी जैसी तकनीकों को अपनाने से उत्पादन बढ़ा और पर्यावरण पर असर कम हुआ. कोल्ड सप्लाई चेन से बीज गुजरात, कर्नाटक और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जा रहे हैं.
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गेहूं में निकल रही हैं बालियां तो इस अनुपात में करें लिक्विड फर्टिलाइजर का छिड़काव, चमकदार होंगे दाने
बाली निकलने के चरण में गेहूं की फसल को विशेष देखभाल की जरूरत है. विशेषज्ञों के अनुसार 90-100 दिन की फसल में पोटाश युक्त NPK 00:50 या 00:52:34 का छिड़काव दानों को भरपूर, चमकदार और वजनदार बनाता है. सही अनुपात में स्प्रे से उत्पादन और बाजार मूल्य बढ़ सकता है.
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क्या आपके खेत की मिट्टी हो रही है कमजोर? अब 50 दिनों में घर पर बनाएं ये खाद और बढ़ाएं पैदावार
वर्मी कंपोस्ट खेती के लिए एक आसान और सस्ता विकल्प बन रहा है. किसान घर पर ही जैविक कचरे और गोबर से पोषक खाद तैयार कर सकते हैं. यह खाद मिट्टी को मजबूत बनाती है, रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करती है और पैदावार बढ़ाने में मदद करती है.
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महंगी खाद छोड़िए… सरसों की खली से खिल उठेगा बगीचा, जानें कैसे करें इसका इस्तेमाल
सरसों की खली में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. ये तीनों तत्व पौधों की बढ़वार, जड़ों की मजबूती और फूल-फल बनने के लिए बहुत जरूरी हैं. सरसों की खली सिर्फ पौधों को ही नहीं, बल्कि मिट्टी को भी मजबूत बनाती है. इसमें भरपूर जैविक पदार्थ होता है, जो मिट्टी में रहने वाले अच्छे सूक्ष्मजीवों को बढ़ावा देता है.
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गेहूं की फसल पर चूहों का हमला, इन आसान उपायों से बचा सकते हैं पूरी पैदावार
फसलों में चूहों का हमला किसानों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है. समय पर पहचान और सही उपाय अपनाने से नुकसान कम किया जा सकता है. घरेलू तरीके, नियमित निगरानी और सिंचाई से चूहों को खेत से दूर रखा जा सकता है. इससे फसल सुरक्षित रहती और पैदावार अच्छी मिलती है.
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एक घोल से बदल जाएगी खेती की तकदीर, जानिए जीवामृत बनाने का आसान तरीका
जीवामृत एक तरल जैविक खाद है, जिसे देसी गाय के गोबर और गौमूत्र से तैयार किया जाता है. इसमें गुड़, बेसन और खेत की उपजाऊ मिट्टी मिलाई जाती है. कुछ दिनों तक इसे सड़ने और पकने के लिए छोड़ दिया जाता है. इसके बाद यह एक असरदार प्राकृतिक घोल बन जाता है.








