बढ़ती लागत से परेशान किसान अपनाएं जौ की खेती, कम खर्च में होगी बेहतर पैदावार और कमाई

गेहूं की खेती में बढ़ती लागत और कम मुनाफे से परेशान किसानों के लिए जौ एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है. जौ की खेती कम पानी, कम लागत और कम मेहनत में अच्छी पैदावार देती है. बढ़ती मांग के कारण इससे किसानों की आमदनी बढ़ने की पूरी संभावना है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 6 Feb, 2026 | 10:58 AM

Barley Farming : बढ़ती लागत, पानी की कमी और घटते मुनाफे से जूझ रहे किसानों के लिए अब गेहूं का एक मजबूत विकल्प सामने आ रहा है. जौ की खेती कम खर्च, कम मेहनत और कम पानी में अच्छी कमाई का मौका दे रही है. यही वजह है कि अब कई किसान गेहूं छोड़कर जौ की ओर रुख कर रहे हैं. जौ की मांग सिर्फ अनाज के रूप में ही नहीं, बल्कि आटा, प्रोसेस्ड फूड और इंडस्ट्री में भी तेजी से बढ़ रही है.

सही समय पर बुवाई से मिलेगी तगड़ी पैदावार

जौ की खेती  के लिए नवंबर से दिसंबर के मध्य का समय सबसे अच्छा माना जाता है. इस दौरान की गई बुवाई से दाने मोटे आते हैं और पैदावार भी बेहतर होती है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, समय पर बुवाई करने वाले किसानों को कम सिंचाई में भी अच्छा उत्पादन मिल रहा है. जौ की फसल ज्यादा नखरे वाली नहीं होती और मौसम के हल्के उतार-चढ़ाव को भी सहन कर लेती है.

कम पानी, कम लागत और हल्की मिट्टी में भी आसान खेती

जौ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ज्यादा पानी और खाद  की जरूरत नहीं पड़ती. अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट या हल्की मिट्टी में इसकी खेती आराम से की जा सकती है. खेत की तैयारी के लिए तीन से चार जुताई काफी होती है. बीज की मात्रा भी ज्यादा नहीं लगती, लगभग 35 से 40 किलो प्रति एकड़ बीज पर्याप्त होता है. यही कारण है कि इसकी खेती की लागत गेहूं के मुकाबले काफी कम रहती है.

खरपतवार नियंत्रण और सही वैरायटी है सफलता की कुंजी

जौ की खेती में 30 से 40 दिन बाद खरपतवार नियंत्रण  बेहद जरूरी हो जाता है. इस समय खेत में अगर घास-फूस बढ़ गई, तो पैदावार पर सीधा असर पड़ सकता है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवस्था को सबसे ज्यादा अहम माना जाता है. इसके साथ ही सही वैरायटी का चुनाव भी जरूरी है. अब ऐसी किस्में भी उपलब्ध हैं, जो बिना छिलके वाली होती हैं और जिनकी मांग प्रोसेसिंग और उद्योगों में काफी ज्यादा है.

बढ़ती मांग से किसानों को मिल सकता है डबल मुनाफा

इन दिनों जौ का आटा  सेहत के लिहाज से पसंद किया जा रहा है. इसके अलावा इंडस्ट्री में भी इसकी खपत तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि किसान अगर जौ की खेती कर इसके उत्पाद बनाकर बेचते हैं, तो उन्हें और ज्यादा मुनाफा मिल सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कम लागत और बढ़ती मांग की वजह से जौ की खेती आने वाले समय में किसानों की आमदनी बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है.

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