आंध्र प्रदेश में तोतापुरी आम संकट गहराया, केंद्र ने दी भावांतर भुगतान की मंजूरी, एक्सपर्ट कमेटी गठित

Totapuri Mango: आंध्र प्रदेश के तोतापुरी आम किसानों को इस साल भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. प्रोसेसिंग कंपनियों की कम खरीद, मैंगो पल्प का स्टॉक और निर्यात में आई रुकावट के कारण आम के दाम 1 से 4 रुपये प्रति किलो तक गिर गए हैं. किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने 2.16 लाख टन आम पर भावांतर भुगतान को मंजूरी दी है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 5 Jul, 2026 | 09:31 AM

Totapuri Mango Crisis: आंध्र प्रदेश के तोतापुरी आम उत्पादक किसान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं. इस साल अच्छी पैदावार होने के बावजूद किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा है. कई जगह हालात ऐसे हैं कि किसान अपनी उपज 1 से 4 रुपये प्रति किलो तक बेचने को मजबूर हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह प्रोसेसिंग कंपनियों की कम खरीद, मैंगो पल्प का भारी स्टॉक और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण निर्यात प्रभावित होना है.

किसानों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए केंद्र सरकार ने राहत के लिए कई कदम उठाए हैं. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से मुलाकात के बाद विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके.

आखिर क्यों आई तोतापुरी आम पर संकट?

आंध्र प्रदेश में बड़े पैमाने पर तोतापुरी आम की खेती की जाती है. इस किस्म का आम सीधे खाने से ज्यादा मैंगो पल्प, जूस और प्रोसेस्ड फूड बनाने में इस्तेमाल होता है. इसलिए इसकी कीमत काफी हद तक प्रोसेसिंग उद्योग और निर्यात पर निर्भर करती है.

इस साल प्रोसेसिंग कंपनियों ने पहले की तुलना में कम खरीद की. दूसरी ओर, पिछले साल का काफी मैंगो पल्प पहले से ही गोदामों में पड़ा है. ऐसे में नई फसल की मांग कमजोर पड़ गई और किसानों को अपनी उपज सस्ते दामों पर बेचनी पड़ रही है.

किसानों की परेशानी सुनने पहुंचे शिवराज सिंह चौहान

हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश का दौरा किया और तोतापुरी आम उत्पादक किसानों से बातचीत की. किसानों ने उन्हें कम कीमत, घटती मांग और बढ़ते नुकसान की जानकारी दी. इसके बाद कृषि मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) को विशेषज्ञ समिति बनाने के निर्देश दिए. यह समिति अगले 10 दिनों में प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्रों का दौरा करेगी और खेती से लेकर बाजार तक पूरी व्यवस्था का अध्ययन कर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. सरकार का कहना है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर ऐसे कदम उठाए जाएंगे, जिससे किसानों को लंबे समय तक राहत मिल सके.

विशेषज्ञों की टीम करेगी पूरी जांच

इस समिति की अध्यक्षता आईसीएआर-सीआईएसएच (CISH), लखनऊ के निदेशक डॉ. टी. दमोदरन करेंगे. समिति में बागवानी, फल अनुसंधान और कृषि क्षेत्र के कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों के साथ आंध्र प्रदेश के बागवानी विभाग के अधिकारी भी शामिल किए गए हैं. विशेषज्ञ यह पता लगाएंगे कि आखिर किसानों को सही कीमत क्यों नहीं मिल रही और भविष्य में ऐसी स्थिति से कैसे बचा जा सकता है.

केंद्र सरकार ने दी राहत

किसानों को तत्काल राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) के तहत 2.16 लाख टन तोतापुरी आम के लिए भावांतर भुगतान को मंजूरी दी है. सरकार ने 1,747 रुपये प्रति क्विंटल बाजार हस्तक्षेप मूल्य (MIP) तय किया है. अगर किसानों को इससे कम कीमत मिलती है, तो तय नियमों के अनुसार उन्हें मूल्य अंतर का भुगतान किया जाएगा.

यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के जरिए भेजी जाएगी. योजना का खर्च केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगी. इसके अलावा आंध्र प्रदेश सरकार ने भी किसानों को 4 रुपये प्रति किलो अतिरिक्त सहायता देने का फैसला किया है.

किन जिलों के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित?

इस संकट का सबसे ज्यादा असर चित्तूर, तिरुपति, अन्नामय्या और कडप्पा जिलों में देखने को मिला है. इन्हीं इलाकों में सबसे ज्यादा तोतापुरी आम की खेती होती है. आंध्र प्रदेश में करीब 3.99 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती होती है और सालाना उत्पादन लगभग 52.65 लाख टन है. इनमें से केवल रायलसीमा क्षेत्र के चार जिलों में करीब 91 हजार हेक्टेयर में तोतापुरी आम लगाया जाता है, जहां हर साल लगभग 8.65 लाख टन उत्पादन होता है.

निर्यात में आई रुकावट बनी बड़ी वजह

इस बार संकट केवल अधिक उत्पादन की वजह से नहीं आया है. आंध्र प्रदेश का चित्तूर देश का बड़ा मैंगो पल्प प्रोसेसिंग केंद्र है. यहां तैयार होने वाले पल्प का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया, यूरोप, अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में निर्यात किया जाता है. लेकिन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और समुद्री परिवहन में आई दिक्कतों के कारण निर्यात प्रभावित हुआ है. कई कंटेनर बंदरगाहों और गोदामों में फंसे हुए हैं.

वहीं कुछ शिपिंग कंपनियों ने अतिरिक्त शुल्क भी बढ़ा दिया है, जिससे निर्यात महंगा हो गया है. इसी वजह से प्रोसेसिंग कंपनियां नई फसल खरीदने में सावधानी बरत रही हैं और इसका सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ा है.

लगातार दूसरे साल मुश्किल में किसान

यह पहली बार नहीं है जब तोतापुरी आम के किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. पिछले साल भी कीमतों में भारी गिरावट आई थी, जिसके बाद सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा था. हालांकि इस बार स्थिति और ज्यादा गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि स्थानीय बाजार में मांग कमजोर है और अंतरराष्ट्रीय बाजार भी प्रभावित है.

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