Stubble Management: पंजाब के फाजिल्का जिले में एक कृषि आधारित कंपनी ने धान की पराली से फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM) बनाने का पेटेंट हासिल किया है, इससे रासायनिक खाद के इस्तेमाल में कमी लाई जा सकती है. कंपनी संपुर्ण एग्री वेंचर्स के अनुसार यह खाद पारंपरिक कम्पोस्ट से ज्यादा असरदार है, क्योंकि 1 किलो FOM लगभग 5 किलो सामान्य खाद के बराबर होती है. इसमें सूक्ष्म जीव (माइक्रोब्स) मिलाने से पोषक तत्वों की उपयोग क्षमता बढ़ती है और रासायनिक खाद, कीटनाशक व फफूंदनाशक पर निर्भरता कम होती है.
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के निदेशक संजीव नागपाल ने कहा कि कम्पोस्टिंग का एक बड़ा फायदा बायोगैस का उत्पादन भी है. एक टन धान की पराली से करीब 250 घन मीटर बायोगैस मिलती है, जिससे 450 यूनिट बिजली या 110 किलो सीएनजी तैयार की जा सकती है. पंजाब के कृषि निदेशक जसवंत सिंह ने कहा कि FOM और इसका तरल रूप फसलों के लिए लाभकारी है और NPK जैसी रासायनिक खाद की जरूरत कम करता है. कुछ किसानों ने इसका इस्तेमाल कर बेहतर पैदावार भी हासिल की है. कृषि विभाग ने गोबरधन योजना के तहत इस खाद की बिक्री को लेकर रसायन और उर्वरक मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा है. केंद्र सरकार जैविक खाद को बढ़ावा देने के लिए बाजार विकास सहायता भी देती है.
कृषि अपशिष्ट का सही तरीके से उपयोग जरूरी है
कंपनी के निदेशक के अनुसार खाद की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सभी तरह के सड़ने-गलने योग्य कृषि अपशिष्ट का सही तरीके से उपयोग जरूरी है. उन्होंने कहा कि पारंपरिक कम्पोस्टिंग से बनने वाली खाद में मीथेन गैस निकलती है, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है और खेती की लागत भी बढ़ाती है. मीथेन पौधों के लिए भी नुकसानदेह मानी जाती है. उन्होंने कहा कि मिट्टी और हवा में पोषक तत्व भरपूर होते हैं, लेकिन पौधे तभी इन्हें ग्रहण कर पाते हैं जब बैक्टीरिया के जरिए ये खनिज रूप में बदलें. फर्मेंटेशन प्रक्रिया में सभी तत्व खनिज रूप में बदल जाते हैं, जिससे पौधों को आसानी से पोषण मिलता है. मिट्टी में सूक्ष्म जीवों की संख्या घटने के कारण FOM पारंपरिक खाद की तुलना में ज्यादा असरदार साबित होती है.
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हर साल 1,500 मिलियन टन कृषि अवशेष पैदा होता है
एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर साल करीब 1,500 मिलियन टन कृषि अवशेष पैदा होता है, जो ज्यादातर बेकार चला जाता है और प्रदूषण फैलाता है. अगर इसका सही उपयोग किया जाए तो इससे लगभग 57.5 मिलियन टन सीएनजी बनाई जा सकती है. फसल अवशेष, खासकर धान की पराली से छुटकारा पाने के लिए किसान इसे जलाते हैं, जिससे पर्यावरण, स्वास्थ्य और मिट्टी के जीवों को गंभीर नुकसान होता है.
मिट्टी की जैविक सेहत खराब हो रही है
नागपाल ने कहा कि रासायनिक खादों पर बढ़ती निर्भरता से मिट्टी की जैविक सेहत खराब हो रही है और पौधों में पोषक तत्वों का असंतुलन बढ़ रहा है, जिससे भोजन की पोषण गुणवत्ता भी घट रही है. ज्यादा यूरिया के इस्तेमाल से कीट और फफूंद बढ़ते हैं, जिससे कीटनाशकों और फफूंदनाशकों का जरूरत से ज्यादा उपयोग होता है. उन्होंने कहा कि FOM मिट्टी और फसलों की सेहत बनाए रखने में मदद करती है.