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सिंचाई पर निर्भर है गेहूं की 40 फीसदी पैदावार, जानें कब लगाएं खेत में पहला और दूसरा पानी
गेहूं की पहली सिंचाई को सीआरआई (क्राउन रूट इनिशिएशन) अवस्था कहा जाता है. इस समय पौधों में जड़ों का विकास शुरू होता है. अगर इस दौर में नमी की कमी हो जाए तो पौधे कमजोर रह जाते हैं. वहीं, सही समय पर हल्की सिंचाई करने से कल्ले ज्यादा निकलते हैं, जिससे फसल की पैदावार बढ़ती है.
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गन्ना किसानों के लिए ICAR ने बनाया खास हार्वेस्टर, कटाई-छंटाई और ढुलाई सभी काम करेगा
इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के प्रतिनिधियों ने आईसीएआर के गन्ना शोध संस्थान का विजिट किया और नई तकनीकों और विधियों समेत गन्ना विकास के बारे में जानकारी ली. इसके साथ ही किसानों को जलवायु अनुकूल किस्मों के साथ ही किसानों की कमाई बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की.
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सरसों पर रस चूसक का हमला, तुरंत करें साबुन वाले इस घोल का छिड़काव.. वरना 60 फीसदी तक होगा नुकसान
नीम आधारित उपाय बेहद कारगर है. इसके लिए 1500 पीपीएम नीम ऑयल का छिड़काव किया जा सकता है, जिसे किसान घर पर ही तैयार कर सकते हैं. अगर फसल में कीटों का प्रकोप ज्यादा हो जाए, तो रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल करें.
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चना, सरसों और आम में घातक बीमारी का खतरा, 45 दिन पर करें इस घोल का छिड़काव नहीं लगेगा रोग
इस समय सरसों की फसल में झुलसा रोग, सफेद फफोला और मृदुरोमिल आसिता रोग का खतरा बना हुआ है. किसानों को चाहिए कि वे अपनी फसल की नियमित रूप से निगरानी करते रहें, ताकि रोग के लक्षण समय पर पहचाने जा सकें.
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पंजाब-हरियाणा में होगी पर्यावरण फ्रेंडली खेती, किसानों को मिलेगा कार्बन क्रेडिट.. बंपर कमाई का मौका
पंजाब और हरियाणा के छोटे किसानों के लिए ग्रो इंडिगो का कार्बन क्रेडिट कार्यक्रम पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा दे रहा है. डायरेक्ट सीडिंग और नो टिलेज अपनाने पर किसानों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त कार्बन क्रेडिट मिलेंगे, जिससे आय बढ़ेगी और मिट्टी व जल संरक्षण को मजबूती मिलेगी.
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स्वस्थ मिट्टी और जमीन का सटीक प्रबंधन ही खेती का भविष्य, 18 जिलों के वॉटरशेड प्रोजेक्ट के लिए 440 करोड़ मंजूर
कृषि मंत्री ने कहा कि भारत नदियों का देश है और बिहार नदियों का राज्य. हमारी सांस्कृतिक परंपरा में नदी, तालाब, कुआं, पेड़ और धरती को पूजनीय माना गया है. इनके संरक्षण के लिए हमें अपनी जिम्मेदारी पूरी करनी होगी. प्रकृति की रक्षा ही हमारी सांस्कृतिक विरासत है और इसी से खेती का भविष्य सुरक्षित रहेगा.








