कृषि के लिए नई नीतियों की जरूरत, वैज्ञानिक तरीके से खेती करने पर बढ़ेगी किसानों की कमाई

नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने कहा कि भारतीय कृषि को अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर पोषण, रोजगार और पर्यावरण संतुलन पर केंद्रित करना होगा. बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों में अधिक आमदनी के मौके हैं.

Kisan India
नोएडा | Published: 1 Jul, 2025 | 04:36 PM

देश में खेती करने का तरीका तेजी से बदल रहा है. मार्केट में रोज नई-नई कृषि तकनीक आ रही है. ऐसे में किसानों को सिर्फ पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैज्ञानिक पद्धित को भी अपनाना चाहिए. साथ ही सरकार को भी किसानों के लिए नई पहल शुरू करने की जरूरत है. पशुपालन, बागवानी और मछली पालन जैसे अन्य क्षेत्रों में बढ़ावा देने के लिए नई नीतियों पर जोड़ देना चाहिए. इससे किसानों को काफी फायदा होगा.

दरअसल, ये बातें नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने कही. उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि को अब पैदावार बढ़ाने की सोच से आगे निकलकर उपभोग के बदलते स्वरूप, पोषण सुरक्षा, रोजगार सृजन और पर्यावरणीय संतुलन को केंद्र में रखते हुए एक नवीन दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है. उन्होंने ‘21वीं सदी में भारतीय कृषि की पुनर्कल्पना’ व्याख्यान में कहा कि अब समय आ गया है कि भारत की कृषि नीति को पारंपरिक फसल उत्पादन के दायरे से बाहर निकालकर, उसे समावेशी और बहुआयामी स्वरूप दिया जाए. प्रो. रमेश चंद ने इस परिवर्तन के लिए उन्होंने कृषि नीति में व्यापक बदलावों का सुझाव दिया.

इन क्षेत्रों में बन रहे मौके

उन्होंने कहा कि खेती केवल उत्पादन तक सीमित न रहे. अब जरूरत है कि खेत में ही मूल्यवर्धन की अपार संभावनाओं को पहचाना जाए, जो अब तक केवल विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में केंद्रित रहा है. प्रो. चंद ने कहा कि भारत में जैविक अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और बायोमेडिसिन, जैव-कीटनाशक और जैव-उर्वरक जैसे क्षेत्रों में नए मौके बन रहे हैं. ऐसे में ये आने वाले समय में विकास को आगे बढ़ाएंगे.

इन फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी

प्रो. रमेश चंद ने हाल के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2014 से 2023 के बीच जहां अनाज और दालों की औसत बढ़ोतरी सिर्फ 1.6 फीसदी रही, वहीं बागवानी 3.9 फीसदी, पशुधन 5.8 फीसदी और मछली पालन 9.1 फीसदी की दर से तेजी से आगे बढ़े हैं. उन्होंने कहा कि ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि जिन किसानों ने ऊंची कीमत देने वाली खेती जैसे पशुपालन, मछली पालन और बागवानी को अपनाया है, वे आज बाजार में आगे हैं. वहीं पारंपरिक खेती करने वाले किसान धीरे-धीरे आर्थिक रूप से पीछे होते जा रहे हैं. इसलिए प्रो. चंद ने सुझाव दिया कि किसानों को खेती के इन लाभकारी क्षेत्रों की ओर मोड़ने के लिए ठोस नीतियों की जरूरत है, ताकि वे भी बेहतर आमदनी कमा सकें

खेती में महिलाओं की बढ़ती भूमिका

उन्होंने विशेष रूप से कृषि में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इसे ‘परिवर्तनकारी शक्ति’ कहा. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग ही आने वाले समय की टिकाऊ कृषि नीति की नींव बनेगा. व्याख्यान का संचालन समुन्नति के निदेशक और पूर्व आईएएस अधिकारी प्रवेश शर्मा ने किया. अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI) की वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. सुधा नारायणन ने विषय पर अपनी विशेषज्ञ टिप्पणी रखी.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

तोरई की अच्छी पैदावार के लिए क्या जरूरी है?

लेटेस्ट न्यूज़

Haryana Budget Haryana Government Increased Incentive Amount Sugarcane Cotton Cultivation Bonus Increased

सरकार ने बढ़ाई प्रोत्साहन राशि, गन्ना-कपास की खेती करने पर अब मिलेंगे 2000 रुपये तक ज्यादा बोनस

Gulf Crisis Drives Up Pistachio Fig Raisin Prices In India Iran Port Closures Impact Dry Fruit Imports 2026

ईरानी शिपमेंट रुकी तो बढ़े पिस्ता के दाम, अंजीर-किशमिश भी महंगी, उपभोक्ताओं की जेब पर बढ़ेगा बोझ

Us Iran Conflict Halts Indian Onion Exports 150 Containers Stranded At Jnpt Mumbai Gulf Trade Disruption 2026

खाड़ी संकट से व्यापार पर बड़ा असर, मुंबई पोर्ट पर अटका 4,500 टन से ज्यादा प्याज… किसानों और निर्यातकों की बढ़ी चिंता

Us Iran War Disrupts Indian Basmati Exports 70000 Tonnes Stranded At Sea Gulf Market Shipping Crisis 2026

जंग की आग में झुलसा बासमती व्यापार, अमेरिका–ईरान टकराव के बीच 70 हजार टन चावल रास्ते में अटका

India Castor Production To Rise 11 Percent In Fy2025 26 Gujarat Rajasthan Lead Growth Higher Yield Better Monsoon

भारत में अरंडी उत्पादन में बड़ी छलांग, 2025-26 में 11 प्रतिशत बढ़ोतरी… गुजरात-राजस्थान सबसे आगे

West Asia Conflict Impact On Indian Tea Exports Shipping Disruptions Payment Delays Gulf Market Risk Hormuz Route Crisis

पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध से भारतीय चाय उद्योग पर गहराया संकट, खाड़ी देशों में 50 फीसदी तक निर्यात प्रभावित