Vegetable Farming: खेती अब सिर्फ मौसम और किस्मत पर निर्भर रहने वाला काम नहीं रहा. बदलते समय के साथ किसान भी नई सोच और नई तकनीकों को अपना रहे हैं. पारंपरिक फसलों की जगह अब कई किसान ऐसी सब्जियों की खेती कर रहे हैं, जो कम समय में तैयार होकर लंबे समय तक कमाई देती हैं. यही कारण है कि सब्जी उत्पादन आज किसानों के लिए एक मजबूत आय का साधन बनता जा रहा है. ऐसी ही आधुनिक खेती की वजह से कई किसान कम लागत में अच्छी आमदनी हासिल कर रहे हैं. खास बात यह है कि इन फसलों से एक बार नहीं, बल्कि कई महीनों तक लगातार पैसा मिलता रहता है.
पारंपरिक खेती से अलग नई राह
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कई किसान अब धान, गेहूं और सरसों जैसी पारंपरिक फसलों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहते. इन फसलों में लागत ज्यादा और मुनाफा सीमित होता है. इसलिए किसान अब बाजार की मांग को समझकर सब्जियों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं. हरी सब्जियों की खेती में मेहनत तो लगती है, लेकिन इसका फायदा यह है कि फसल जल्दी तैयार हो जाती है और बाजार में हमेशा मांग बनी रहती है. इससे किसानों को साल भर आय का मौका मिलता है.
कम लागत में ज्यादा फायदा
सब्जियों की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें बहुत ज्यादा पूंजी की जरूरत नहीं होती. एक बीघे में सब्जियों की खेती करने पर करीब 20-22 हजार रुपये तक की लागत आती है. जब फसल तैयार होकर बाजार में बिकती है, तो एक बीघे से एक से डेढ़ लाख रुपये तक की कमाई संभव हो जाती है. यह कमाई पारंपरिक फसलों के मुकाबले काफी ज्यादा होती है. इसी वजह से छोटे और मध्यम किसान भी अब इस खेती में रुचि दिखा रहे हैं. सबसे खास बात यह है कि पौधे लगाने के बाद तीन से चार महीने तक लगातार उत्पादन मिलता रहता है, जिससे किसानों को नियमित आमदनी होती रहती है.
हर मौसम में बनी रहती है मांग
कुछ सब्जियां ऐसी होती हैं जिनकी जरूरत पूरे साल रहती है. होटल, बाजार और घरों में इनका इस्तेमाल रोजाना होता है. यही कारण है कि इनकी कीमतें भी अक्सर अच्छी मिलती हैं. त्योहारों और शादी के मौसम में तो इन सब्जियों के दाम और बढ़ जाते हैं. इससे किसानों को अतिरिक्त लाभ मिलता है. पारंपरिक फसलों में जहां साल में एक बार ही पैसा मिलता है, वहीं सब्जियों की खेती में रोजाना कमाई का मौका मिलता है.
खेती की आसान तकनीक
सब्जियों की खेती शुरू करने के लिए सबसे पहले नर्सरी तैयार की जाती है. जब पौधे तैयार हो जाते हैं, तब खेत की गहरी जुताई कर उसे रोपाई के लिए तैयार किया जाता है. खेत में गोबर की खाद और जरूरी पोषक तत्व मिलाने से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है. इसके बाद पौधों को सही दूरी पर लगाया जाता है और तुरंत सिंचाई की जाती है. रोपाई के लगभग 60 से 70 दिनों के भीतर फसल तैयार होने लगती है. इसके बाद नियमित रूप से तुड़ाई कर बाजार में बेचने से लगातार आय होती रहती है. आज के समय में सब्जियों की खेती किसानों के लिए कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाला विकल्प बनकर सामने आ रही है. सही योजना, मेहनत और बाजार की समझ के साथ किसान इस खेती से अपनी आय बढ़ाकर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं.