गर्मियों में हरे चारे की कमी से बचें पशुपालक, अभी बोएं ये फसलें और बढ़ाएं दूध उत्पादन

गर्मियों में हरे चारे की कमी से पशुओं के दूध उत्पादन पर असर पड़ता है. ऐसे में कुछ हरी चारे वाली फसलों की खेती करके पशुपालक इस समस्या से बच सकते हैं. सही योजना और समय पर बुवाई से पशुओं को पूरा पोषण मिलेगा और दूध उत्पादन बना रहेगा.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 7 Feb, 2026 | 01:58 PM

Fodder Farming: गर्मी का मौसम शुरू होते ही पशुपालकों की सबसे बड़ी चिंता हरे चारे की हो जाती है. जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, खेतों में हरियाली कम होने लगती है और इसका सीधा असर गाय-भैंस के दूध उत्पादन पर पड़ता है. अगर समय रहते चारे की व्यवस्था कर ली जाए, तो न केवल पशु स्वस्थ रहते हैं बल्कि दूध की मात्रा भी कम नहीं होती. पशुपालन से जुड़े जानकार बताते हैं कि कुछ खास हरी फसलों की खेती करके गर्मियों में चारे की कमी को आसानी से दूर किया जा सकता है.

गर्मियों में क्यों घट जाता है दूध उत्पादन

गर्मियों में हरे चारे की कमी होना आम बात है. इस मौसम में सूखा चारा ज्यादा इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे पशुओं को पूरा पोषण  नहीं मिल पाता. इसका असर उनकी सेहत और दूध उत्पादन दोनों पर पड़ता है. जब पशु को पर्याप्त हरा चारा नहीं मिलता, तो वह कमजोर होने लगता है और दूध की मात्रा धीरे-धीरे घटने लगती है. यही वजह है कि पशुपालकों को गर्मी शुरू होने से पहले ही चारे की योजना बना लेनी चाहिए.

हरे चारे की फसलें बन सकती हैं सहारा

विशेषज्ञों के अनुसार गर्मियों के मौसम में कुछ हरी फसलें पशुओं के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं. इनमें लोबिया, मक्का, बरसीम, नेपियर घास और ज्वार जैसी फसलें शामिल हैं. ये फसलें कम समय में तेजी से बढ़ती हैं और पशुओं को भरपूर पोषण देती हैं. इनकी खेती करने से पशुपालकों को लगातार हरा चारा मिलता रहता है और पशुओं की सेहत  भी अच्छी बनी रहती है.

कम मेहनत में ज्यादा चारा

इन हरे चारे वाली फसलों की खास बात यह है कि इन्हें उगाना ज्यादा मुश्किल नहीं होता. थोड़ी सी योजना और सही समय पर बुवाई करने से खेत में लगातार चारा तैयार होता रहता है. नेपियर घास जैसी फसलें एक बार लगाने के बाद लंबे समय तक चारा देती रहती हैं. वहीं मक्का और ज्वार जैसी फसलें जल्दी तैयार हो जाती हैं, जिससे चारे की कमी नहीं होती. इससे पशुपालकों का खर्च  भी कम होता है और काम भी आसान हो जाता है.

पशुपालकों के लिए बढ़ेगी आय

जब पशुओं को संतुलित और हरा चारा मिलता है, तो उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है और दूध उत्पादन भी बढ़ता है. इससे पशुपालकों की आय पर सकारात्मक असर पड़ता है. हरे चारे की सही व्यवस्था करने से गर्मियों में भी दूध उत्पादन  सामान्य बना रहता है. इससे बाजार में दूध की आपूर्ति बनी रहती है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ता. कुल मिलाकर, गर्मियों में पशुपालन को सफल बनाए रखने के लिए हरे चारे की खेती बहुत जरूरी है. सही समय पर लोबिया, मक्का, ज्वार, बरसीम और नेपियर घास जैसी फसलों की खेती  करके पशुपालक चारे की कमी से बच सकते हैं. यह छोटा सा कदम पशुओं को स्वस्थ रखने के साथ-साथ दूध उत्पादन और आय दोनों को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है.

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Published: 7 Feb, 2026 | 01:58 PM

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