सोलर सिंचाई से किसान ने सीजन में बचाए 1 लाख रुपये, डीजल खर्च जीरो.. आमदनी 50 फीसदी बढ़ी

Solar Trolly Irrigation System : किसान ट्रॉली पर लगे सोलर सिंचाई सिस्टम का लाभ ले रहे हैं. इससे सिंचाई के लिए डीजल खर्च शून्य हो गया है. जबकि, फसलों का उत्पादन बढ़ा है, जिससे कमाई 50 फीसदी तक बढ़ गई है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 13 Aug, 2026 | 07:53 PM

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर के किसानों ने सोलर सिंचाई पंप की मदद से डीजल खर्च खत्म करने में कामयाबी मिली है. इससे उनकी आमदनी में 50 फीसदी की बढ़त हुई है. जबकि, सिंचाई संकट दूर होने से मुख्य फसलों के साथ ही सब्जी फसलों को भी उगाने में मदद मिली है. खेती की लागत घटाने में सफलता हासिल करने वाले किसान सुखाई ने बताया कि वह एक सीजन में 1 लाख रुपये की बचत कर पा रहे हैं. जबकि, पहले उनका पैसा खेती लागत में ही खर्च हो जाता था. वह गन्ना के साथ सब्जी फसलों की खेती कर रहे हैं.

सोलर ट्रॉली सिंचाई सिस्टम से सालों का पानी संकट दूर हुआ

सिद्धार्थनगर जिले के धौरहरा गांव के प्रगतिशील किसान सुखाई ने किसान इंडिया को बताया किया कृषि विकास पर काम करने वाले संगठन आरोह फाउंडेशन की मदद से उन्हें सोलर आधारित सिंचाई के लिए ट्रॉली मिली है, जिसमें सोलर पैनल और मशीन लगी हुई है. जिसकी मदद से बिना बिजली या डीजल के फसलों को सिंचाई सुविधा मिल रही है. उन्होंने बताया कि इस सोलर सिंचाई सिस्टम से गांव के कई किसानों की फसलों की सिंचाई होती है.

उन्होंने बताया कि पहले गांव में किसान कई सालों से पानी की कमी से जूझ रहे थे. डीजल पंप महंगे थे और बिजली की सप्लाई भी अनियमित थी. समय पर सिंचाई न हो पाने के कारण फसल का उत्पादन लगातार घट रहा था. खेती की लागत बढ़ रही थी, जबकि किसानों की आमदनी कम हो रही थी. ऐसे मुश्किल समय में HDFC बैंक की आर्थिक मदद से AROH फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे ‘प्रोजेक्ट परिवर्तन’ के तहत सिद्धार्थनगर जिले के डोमरियागंज ब्लॉक के धौरहरा गांव में बदलाव लाया जा रहा है.

पहले 100 क्विटंल गन्ना उत्पादन और अब 150 लाख क्विंटल

किसान सुखाई ने बताया कि सोलर सिंचाई किसान समूह बनाया गया है, जिसमें कई किसानों को जोड़ा गया है और वह सोलर सिंचाई मशीन से लाभ ले रहे हैं. उन्होंने बताया कि ट्रॉली पर सोलर सिस्टम लगा होने इसे कहीं भी ले जाने में मुश्किल नहीं होती है. इसके इस्तेमाल से फसल की उत्पादकता में सुधार हुआ है. पिछले सीजन में गन्ना का उत्पादन 100 लाख क्विंटल हुआ था, लेकिन इस बार समय पर सिंचाई सुविधा मिलने की वजह से फसल अच्छी दिख रही है और उत्पादन 150 क्विंटल पहुंचने का अनुमान है.

एक सीजन में डीजल खर्च 60 हजार रुपये बचा

उन्होंने बताया कि वह खेती करते हैं और उन्हें डीजल से सिंचाई करने पर एक सीजन 60 हजार रुपये तक का खर्च आता था. सोलर ट्रॉली सिंचाई सिस्टम आने से वह खर्च जीरो हो गया है. इसके अलावा सिंचाई सुविधा बढ़ने से पहले खेत खाली छोड़ दिए जाते थे पर अब उनमें सब्जी की फसलें उगाई जा रही हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने एक सीजन में 1 लाख रुपये की बचत की है. जबकि, कमाई में लगभग 50 फीसदी तक की बढ़त हुई है.

Farmer Sukhai from siddharthnagar UP using solar trolly irrigation system

सोलर ट्रॉली सिंचाई सिस्टम के साथ किसान सुखाई अपने खेत में.

तकनीक युक्त कृषि विकास यात्रा में कोई किसान नहीं छूटेगा

AROH फाउंडेशन की संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. नीलम गुप्ता ने कहा कि टिकाऊ खेती का मतलब सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं है. इसका मतलब है किसानों को ऐसे समाधानों से सशक्त बनाना जो आर्थिक रूप से फायदेमंद, पर्यावरण के लिहाज से जिम्मेदार और सामाजिक रूप से सबको साथ लेकर चलने वाले हों. उन्होंने कहा कि किसान सुखाई जैसी हर कामयाबी की कहानी हमारे इस भरोसे को और मज़बूत करती है कि जब इनोवेशन सबसे दूर-दराज के लोगों तक पहुंचता है, तो यह पूरे समुदाय में बदलाव की लहर पैदा करता है. हमारी कोशिश की कृषि विकास की इस यात्रा में कोई किसान पीछे न छूटे.

किसानों की आमदनी 50 फीसदी बढ़ी

किसान सुखाई ने बताया कि सोलर सिंचाई किसान समूह से गांव के दर्जन भर से ज्यादा किसान जुड़े हैं और इन किसानों की सालाना आमदनी में 40-50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. अब गांव में 20 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर नियमित सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है. सोलर समूह ने यह साबित कर दिया है कि सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन से छोटे किसान भी बड़ी सफलता हासिल कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि हमारे गांव ने ने टिकाऊ खेती का एक मॉडल पेश किया है जो दूसरों के लिए प्रेरणा बन रहा है.

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Published: 13 Aug, 2026 | 07:38 PM

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