देश में किसानों की उपज को सुरक्षित रखने के लिए सहकारिता क्षेत्र में विकेन्द्रीकृत अन्न भंडारण योजना लागू की जा रही है. उत्तर प्रदेश में इस योजना के तहत 12 जिलों की 12 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को चुना गया है. इन समितियों में आधुनिक वैज्ञानिक गोदाम बनाए जाएंगे, जिससे किसानों को अपनी फसल सुरक्षित रखने और बेहतर कीमत मिलने में मदद मिलेगी. यह जानकारी केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में लिखित जवाब में दी.
12 जिलों में 13 गोदाम परियोजनाएं तैयार
उत्तर प्रदेश में इस योजना के तहत कुल 13 गोदाम परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है. इनकी कुल भंडारण क्षमता 0.52 लाख मीट्रिक टन होगी. हालांकि, इन परियोजनाओं का निर्माण कार्य अभी शुरू होना बाकी है. वहीं मिर्जापुर जिले के कोटवा पांडेय पैक्स में 1,500 मीट्रिक टन क्षमता का आधुनिक गोदाम पहले ही बन चुका है. सरकार का कहना है कि यह योजना मांग आधारित है. यानी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्रस्ताव मिलने के बाद ही चरणबद्ध तरीके से परियोजनाओं को मंजूरी दी जाती है. किसी भी राज्य के लिए अलग से लक्ष्य तय नहीं किया गया है.
गोदाम बनाने पर 33.33 फीसदी तक सब्सिडी
सरकार ने पैक्स और सहकारी समितियों के लिए आर्थिक सहायता भी बढ़ाई है. कृषि विपणन अवसंरचना (AMI) योजना के तहत अब गोदाम निर्माण पर पूंजीगत सब्सिडी 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 33.33 प्रतिशत कर दी गई है. इसके अलावा पहले जहां 20 प्रतिशत मार्जिन मनी की जरूरत होती थी, अब इसे घटाकर केवल 10 प्रतिशत कर दिया गया है. इससे छोटी सहकारी समितियों के लिए गोदाम बनाना पहले से आसान हो जाएगा.
पैक्स को मिलेगा लगभग 1 फीसदी ब्याज पर ऋण
सरकार ने ऋण नियमों में भी बड़ा बदलाव किया है. कृषि अवसंरचना कोष (AIF) के तहत अब ऋण चुकाने की अवधि 7 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी गई है. इसमें 2 साल की मोहलत और 8 साल का पुनर्भुगतान शामिल है.इसके साथ ही 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान, नाबार्ड की विशेष पुनर्वित्त योजना और क्रेडिट गारंटी जैसी सुविधाओं के कारण पैक्स के लिए प्रभावी ब्याज दर लगभग 1 प्रतिशत रह जाती है. इससे सहकारी समितियों पर वित्तीय बोझ काफी कम होगा.
जमीन, समय और निर्माण के नियम
योजना के तहत पैक्स अपनी स्वामित्व वाली या लीज पर ली गई जमीन पर वैज्ञानिक गोदाम बना सकते हैं. जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार भूमि उपलब्ध कराने में भी मदद करेगी. गोदाम निर्माण का काम 18 महीने के भीतर पूरा करना होगा. यदि किसी उचित कारण से देरी होती है, तो अधिकतम 6 महीने का अतिरिक्त समय दिया जा सकता है. ध्यान रहे कि इस योजना में केवल नए वैज्ञानिक गोदामों को ही सहायता मिलेगी. पुराने या जर्जर भवनों का नवीनीकरण इस योजना के दायरे में शामिल नहीं है.