Palm Cultivation Bihar: बिहार में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए अब खेती के नए विकल्पों पर भी ध्यान दिया जा रहा है. इसी कड़ी में राज्य सरकार ताड़ की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है. इसके लिए बिहार सरकार तेलंगाना के खेती मॉडल से सीखने और वहां अपनाई जा रही तकनीकों को समझने की कोशिश कर रही है. दोनों राज्यों के कृषि मंत्रियों के बीच हुई बैठक में खेती से जुड़ी जानकारी और अनुभव साझा करने पर सहमति बनी है.
ताड़ की खेती में बिहार की बढ़ी दिलचस्पी
बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा और तेलंगाना के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव के बीच हुई बैठक में ताड़ की खेती पर खास तौर पर चर्चा हुई. बिहार सरकार यह समझना चाहती है कि तेलंगाना में किसानों को ताड़ की खेती के लिए किस तरह प्रोत्साहित किया जा रहा है. बैठक में नर्सरी तैयार करने, प्रोसेसिंग मिल लगाने और सूक्ष्म सिंचाई जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली गई. सरकार का मानना है कि अगर खेती से लेकर प्रोसेसिंग तक बेहतर व्यवस्था तैयार की जाए, तो किसानों को अपनी उपज का ज्यादा फायदा मिल सकता है.
पहले खोजे जाएंगे खेती के लिए अनुकूल इलाके
बिहार में ताड़ की खेती को बड़े स्तर पर बढ़ाने से पहले ऐसे इलाकों की पहचान की जाएगी, जहां इसकी खेती के लिए मौसम और मिट्टी अनुकूल हो. इसके बाद किसानों को खेती से जुड़ी जरूरी तकनीक और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर काम किया जा सकता है. कृषि मंत्री ने तेलंगाना के मॉडल को समझने में रुचि दिखाई है. वहीं तेलंगाना सरकार ने बिहार को ताड़ की खेती से जुड़ी तकनीकी जानकारी और जरूरी सहयोग देने का भरोसा दिया है.
इससे बिहार के किसानों को एक ऐसी फसल का विकल्प मिल सकता है, जिसे सही तरीके से विकसित करने पर खेती के साथ-साथ प्रोसेसिंग और दूसरे कारोबार के मौके भी बन सकते हैं.
बिहार के मखाने में तेलंगाना की दिलचस्पी
बैठक में सिर्फ ताड़ की खेती पर ही चर्चा नहीं हुई. तेलंगाना ने बिहार के मखाने में भी काफी रुचि दिखाई है. तेलंगाना की टीम मखाने की खेती, उसकी प्रोसेसिंग और बाजार तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था को समझना चाहती है. इसके लिए तेलंगाना के प्रतिनिधि जल्द बिहार का दौरा कर सकते हैं. इस दौरान वे मखाने की पूरी वैल्यू चेन को समझेंगे. इसमें खेती से लेकर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और बाजार में बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया शामिल होगी. इससे बिहार के मखाने को दूसरे राज्यों में और बड़ा बाजार मिलने की संभावना बन सकती है.
किसानों की योजनाओं पर भी हुआ अनुभव साझा
बैठक में दोनों राज्यों की किसान कल्याण योजनाओं पर भी जानकारी साझा की गई. तेलंगाना की ओर से किसानों के लिए चलाई जा रही रयथु भरोसा योजना, फसल कर्ज माफी, फसल बीमा और अच्छी किस्म के धान पर 500 रुपये के बोनस जैसी योजनाओं के बारे में बिहार की टीम को जानकारी दी गई. बिहार सरकार के लिए दूसरे राज्यों की ऐसी योजनाओं को समझना इसलिए अहम है, क्योंकि इससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने के नए तरीके तलाशने में मदद मिल सकती है.
दोनों राज्यों को एक-दूसरे से फायदा
इस पूरी पहल में खास बात यह है कि बिहार और तेलंगाना एक-दूसरे के अनुभव से सीखने की कोशिश कर रहे हैं. बिहार जहां ताड़ की खेती और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को समझना चाहता है, वहीं तेलंगाना बिहार के मखाने की खेती और कारोबार के मॉडल को जानना चाहता है. अगर यह सहयोग जमीन पर सही तरीके से लागू होता है, तो इससे दोनों राज्यों के किसानों को नई फसलों, बेहतर तकनीक, प्रोसेसिंग और बाजार से जुड़ने के नए अवसर मिल सकते हैं.