MSP Procurement: केंद्र सरकार ने कहा है कि किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम दिलाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है. सरकार का दावा है कि पिछले कुछ सालों में MSP पर फसलों की खरीद और किसानों को किए गए भुगतान दोनों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. इसके साथ ही खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने, भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजने और दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं.
लोकसभा में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लिखित जवाब में यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि, MSP तय करने से लेकर खरीद और भुगतान तक पूरी प्रक्रिया को किसानों के हित में मजबूत बनाया जा रहा है.
कैसे तय होता है MSP?
सरकार हर साल 22 अधिसूचित कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है. MSP तय करने से पहले कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशें, राज्यों की राय और संबंधित मंत्रालयों के सुझावों पर विचार किया जाता है. सरकार का कहना है कि 2018-19 के बजट में किए गए वादे के अनुसार खरीफ, रबी और अन्य वाणिज्यिक फसलों का MSP उनकी उत्पादन लागत से कम से कम 50 प्रतिशत अधिक रखा जा रहा है. इसका उद्देश्य किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर दाम दिलाना है.
MSP पर रिकॉर्ड खरीद का दावा
सरकार के आंकड़ों के अनुसार,
- 2004-2014 के बीच 22 MSP फसलों की कुल खरीद 6,987 लाख मीट्रिक टन रही थी.
- वहीं 2014 से जून 2026 तक यह बढ़कर 12,819 लाख मीट्रिक टन पहुंच गई है.
यानी पिछले कुछ सालों की तुलना में MSP पर फसलों की खरीद में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
किसानों को भुगतान में भी बड़ा इजाफा
सरकार ने बताया कि, MSP के तहत किसानों को मिलने वाली राशि में भी कई गुना बढ़ोतरी हुई है.
- 2004-14 के दौरान किसानों को कुल 7.41 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था.
- वहीं 2014 से जून 2026 तक यह राशि बढ़कर 27.80 लाख करोड़ रुपये हो गई.
सिर्फ 2021-22 से 2025-26 (जून 2026 तक) के बीच सरकार ने 5,781 लाख मीट्रिक टन फसलों की खरीद की और किसानों के खातों में 14.58 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया.
किन फसलों की होती है MSP पर खरीद?
सरकार ने बताया कि, अलग-अलग फसलों की खरीद अलग-अलग सरकारी एजेंसियां करती हैं.
- गेहूं, धान और मोटे अनाज की खरीद भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य एजेंसियां करती हैं.
- दलहन, तिलहन और कोपरा की खरीद PM-AASHA योजना के तहत NAFED और NCCF के जरिए होती है.
- कपास की खरीद कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) करती है.
- जूट की खरीद जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (JCI) के माध्यम से की जाती है.
अब सीधे खाते में पहुंचता है MSP का पैसा
सरकार ने खरीद प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया है. अब किसानों को MSP का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में भेजा जा रहा है. इसके अलावा आधार और भूमि रिकॉर्ड को खरीद पोर्टलों से जोड़ा जा रहा है, ताकि केवल पात्र किसानों को ही योजना का लाभ मिले और भुगतान में किसी तरह की गड़बड़ी न हो.
दलहन उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का फोकस
सरकार ने 2030-31 तक देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा है. इसके तहत अरहर, उड़द और मसूर जैसी दालों की खरीद PM-AASHA योजना के माध्यम से पूर्व-पंजीकृत किसानों से NAFED और NCCF द्वारा की जा रही है.
फल और सब्जी उत्पादकों को भी मिलेगा लाभ
सरकार केवल अनाज ही नहीं, बल्कि फल और सब्जी उत्पादकों के लिए भी योजनाएं चला रही है. मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) के तहत खराब होने वाली कृषि और बागवानी फसलों की खरीद की जाती है, ताकि अधिक उत्पादन के समय किसानों को कम कीमत पर अपनी उपज बेचने की मजबूरी न हो. साल 2024-25 से इस योजना में प्राइस डिफरेंशियल पेमेंट (PDP) को भी शामिल किया गया है.
अगर किसान की फसल बाजार में तय न्यूनतम हस्तक्षेप मूल्य (MIP) से कम दाम पर बिकती है, तो कीमत का अंतर सीधे किसान के खाते में भेजा जाता है. इसके अलावा टमाटर, प्याज और आलू (TOP) जैसी फसलों के भंडारण और परिवहन पर होने वाले खर्च में भी सहायता दी जा रही है.
किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं
सरकार का कहना है कि, किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए कई योजनाएं एक साथ चलाई जा रही हैं. इनमें फसल बीमा, कृषि ऋण, सिंचाई, कृषि अवसंरचना, आधुनिक कृषि उपकरण, बेहतर बीज, जैविक और प्राकृतिक खेती, डिजिटल कृषि, किसान उत्पादक संगठन (FPO), कृषि विपणन और फसल विविधीकरण जैसी योजनाएं शामिल हैं. सरकार का मानना है कि MSP व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ इन योजनाओं के जरिए किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक टिकाऊ व लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है.