UP MSP Wheat Purchase: उत्तर प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद की व्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है. राज्य सरकार का कहना है कि खरीद प्रक्रिया को पहले के मुकाबले ज्यादा आसान, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया गया है. अब किसानों को अपनी फसल बेचने के बाद भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ता, बल्कि पैसा सीधे उनके बैंक खाते में पहुंच जाता है. इससे किसानों को अपनी अगली फसल की तैयारी के लिए भी समय पर आर्थिक मदद मिल रही है.
9 साल में 51 लाख से ज्यादा किसानों को मिला फायदा
खाद्य एवं रसद विभाग के आंकड़ों के अनुसार, रबी मार्केटिंग सीजन 2017-18 से 2025-26 के बीच प्रदेश में 51.70 लाख से अधिक किसानों से 244.26 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया. इसके बदले किसानों के खातों में 45,935.46 करोड़ रुपये सीधे डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए भेजे गए. इससे किसानों को बिना किसी बिचौलिए के उनकी फसल का पैसा सीधे मिला.
कई सालों में लक्ष्य से ज्यादा हुई खरीद
उत्तर प्रदेश में कई बार सरकार ने तय लक्ष्य से भी ज्यादा गेहूं खरीदा. रबी मार्केटिंग सीजन 2018-19 में 50 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन सरकार ने 52.92 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद लिया. यानी लक्ष्य का 105.84 प्रतिशत हासिल किया गया. इस दौरान 11.27 लाख से ज्यादा किसानों को करीब 9,231.99 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. इसी तरह 2021-22 में भी 56.41 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया. इस साल 13.01 लाख से ज्यादा किसानों को 11,141.19 करोड़ रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे गए. समय पर भुगतान मिलने से किसानों को अगली फसल के लिए बीज, खाद और अन्य जरूरी सामान खरीदने में आसानी हुई.
गांव के पास बने हजारों खरीद केंद्र
सरकार ने पूरे प्रदेश में 5,847 गेहूं खरीद केंद्र बनाए, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए दूर न जाना पड़े. गांव और कस्बों के नजदीक खरीद केंद्र होने से किसानों का समय और खर्च दोनों बचे. साथ ही बिचौलियों पर निर्भरता भी काफी कम हुई. अब किसान ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं, उनकी जानकारी का डिजिटल सत्यापन होता है और खरीद के बाद भुगतान सीधे बैंक खाते में पहुंचता है. इससे पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में ज्यादा आसान और भरोसेमंद बन गई है.
तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता
सरकार का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद गेहूं खरीद में पारदर्शिता बढ़ी है. ऑनलाइन पंजीकरण, डिजिटल रिकॉर्ड और डीबीटी के जरिए भुगतान होने से फर्जीवाड़े और अनियमितताओं की संभावना कम हुई है. सबसे बड़ी बात यह है कि किसानों को भुगतान के लिए किसी के चक्कर नहीं लगाने पड़ते.
किसानों की आर्थिक सुरक्षा पर सरकार का जोर
सरकार के मुताबिक, एमएसपी पर खरीद केवल फसल खरीदने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने का एक मजबूत जरिया भी है. समय पर भुगतान मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और वे बिना किसी परेशानी के अगली खेती की तैयारी कर पाते हैं.
सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर पात्र किसान तक एमएसपी का लाभ पहुंचे. इसके लिए खरीद केंद्रों पर व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने, शिकायतों का जल्दी समाधान करने और पूरी प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं. आने वाले समय में भी किसानों को आसान और पारदर्शी खरीद व्यवस्था का लाभ मिलता रहे, इसी दिशा में सरकार काम करने का दावा कर रही है.