Sugarcane Cultivation: तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित भारतीय गन्ना प्रजनन संस्थान (आईआईएसबी) में 90 करोड़ रुपये की लागत से एक नया वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र बनाया जाएगा. इस केंद्र में गन्ने की नई और बेहतर किस्में विकसित की जाएंगी, जो जलवायु परिवर्तन और कीटों का बेहतर सामना कर सकेंगी. इससे किसानों को अधिक उत्पादन और बेहतर फसल मिलने में मदद मिलेगी.
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल ने अंग्रेजी अखबार द हिन्दू से कहा है कि इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार 45 करोड़ रुपये देगी, जबकि बाकी राशि चीनी उद्योग की ओर से जुटाई जाएगी. यह निवेश अगले चार वर्षों में किया जाएगा. उन्होंने कहा कि पहले देश की चीनी मिलें साल में करीब 200 दिन चलती थीं, लेकिन अब गन्ने का उत्पादन घटने से उनका संचालन करीब 100 दिन ही हो पा रहा है.
गन्ने की खेती प्रभावित हो रही है
पाटिल ने कहा कि कीटों का प्रकोप, मौसम में बदलाव, बढ़ता तापमान और जलभराव जैसी समस्याओं से गन्ने की खेती प्रभावित हो रही है. उन्होंने कहा कि अभी नई गन्ना किस्म विकसित करने में लगभग 14 साल लगते हैं, लेकिन इस नए सेंटर की मदद से यह समय घटाकर 8 साल किया जा सकेगा. गन्ने के इस वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र को खोलने के लिए केंद्र सरकार, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA), नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) और भारतीय गन्ना प्रजनन संस्थान जल्द ही एक समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे.
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नई गन्ना किस्में विकसित की जाएंगी
इस केंद्र में ऐसी नई गन्ना किस्में विकसित की जाएंगी, जिनमें ज्यादा पैदावार और बेहतर चीनी रिकवरी हो. साथ ही ये किस्में सूखा, बाढ़, खारेपन और अधिक तापमान जैसी परिस्थितियों को बेहतर तरीके से सहन कर सकेंगी. इनमें प्रमुख बीमारियों और कीटों के प्रति अधिक प्रतिरोध, अच्छी रैटून (दोबारा उगने) की क्षमता और चीनी, इथेनॉल, बायोएनर्जी व टिकाऊ खेती के लिए उपयुक्त गुण भी होंगे.
महाराष्ट्र में दो लाख गन्ना किसान कर रहे AI का इस्तेमाल
हर्षवर्धन पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र में करीब दो लाख गन्ना किसान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का इस्तेमाल कर खेती से लाभ उठा रहे हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि तमिलनाडु सरकार भी गन्ना किसानों को एआई आधारित तकनीक अपनाने में सहयोग दे, ताकि उनकी उत्पादकता और आय बढ़ाई जा सके. तमिलनाडु के चीनी निदेशालय के अतिरिक्त निदेशक एस. अरुणराज ने कहा कि इस साल राज्य में चीनी उत्पादन पिछले साल के लगभग बराबर रहने की उम्मीद है. फिलहाल राज्य में करीब 1.31 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती हो रही है, लेकिन इसका रकबा लगातार घट रहा है.
तमिलनाडु देश का छठा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु देश का छठा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है, जबकि गन्ने की उत्पादकता सबसे अधिक है. हालांकि, गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी के कारण चीनी रिकवरी केवल 8 प्रतिशत के आसपास रह गई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि कोयंबटूर में बनने वाला नया सेंटर ऐसी गन्ना किस्में विकसित करेगा, जिनसे चीनी रिकवरी बढ़ेगी.अरुणराज ने बताया कि तमिलनाडु का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही महाराष्ट्र का दौरा करेगा, जहां गन्ने की खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग का अध्ययन किया जाएगा. इसके बाद अगले कुछ महीनों में राज्य में भी इस तकनीक को लागू करने की योजना है.