Bihar Agriculture Department: बिहार में किसानों को जैविक खेती अपनाने और रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के लिए बड़ी राहत मिली है. कृषि विभाग, बिहार सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत पौध संरक्षण उपादान वितरण योजना लागू की गई है. इस योजना के तहत किसानों को फसलों में कीट नियंत्रण के लिए इस्तेमाल होने वाले फेरोमोन ट्रैप, येलो स्टिकी ट्रैप, ब्लू स्टिकी ट्रैप और फ्रूट फ्लाई ट्रैप जैसे जैव नियंत्रक उपकरणों पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा. इससे खेती की लागत कम होगी, फसल सुरक्षित रहेगी और बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ेगी.
1764 एकड़ का लक्ष्य, एक किसान को 5 एकड़ तक मिलेगा लाभ
कृषि विभाग के अनुसार खरीफ और रबी सीजन को मिलाकर जिले के लिए 1764 एकड़ का लक्ष्य तय किया गया है. एक किसान दोनों सीजन मिलाकर अधिकतम 5 एकड़ तक इस योजना का लाभ ले सकता है. चना, बैंगन, टमाटर, गेहूं, गोभी और अन्य सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को कीट नियंत्रण के लिए अलग-अलग प्रकार के जैविक ट्रैप उपलब्ध कराए जाएंगे. चना और बैंगन में फली छेदक और तना छेदक, मक्का में फॉल आर्मी वर्म, तंबाकू की सुंडी, टॉप बोरर, टमाटर के लीफ माइनर, गेहूं के तना छेदक तथा सब्जियों में लगने वाले डायमंड बैक मॉथ जैसे कीटों की रोकथाम के लिए विशेष फेरोमोन ट्रैप दिए जाएंगे. वहीं सब्जी उत्पादकों को येलो और ब्लू स्टिकी ट्रैप तथा फल उत्पादकों को फ्रूट फ्लाई ट्रैप भी अनुदान पर उपलब्ध होंगे. प्रति एकड़ 12 ट्रैप लगाने का प्रावधान रखा गया है.
ऐसे करें आवेदन, सीधे खाते में आएगी सब्सिडी
योजना का लाभ लेने के लिए किसान सबसे पहले कृषि विभाग से लाइसेंसधारी कीटनाशी विक्रेता से संबंधित जैव नियंत्रक उपकरण खरीदें. खरीद के बाद आवश्यक दस्तावेज विभाग में जमा करने होंगे. इसके बाद एसएनए स्पर्श (SNA Sparsh) मॉड्यूल के माध्यम से 75 प्रतिशत अनुदान की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में डीबीटी (DBT) के जरिए भेज दी जाएगी. आवेदन के लिए किसान अपने प्रखंड कृषि कार्यालय, जिला कृषि कार्यालय, जिला पौधा संरक्षण कार्यालय या कृषि समन्वयक/कृषि सलाहकार से संपर्क कर सकते हैं. वहां योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की पूरी जानकारी मिलेगी. किसानों से समय रहते आवेदन करने की अपील की गई है ताकि लक्ष्य पूरा होने से पहले उन्हें योजना का लाभ मिल सके.
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क्यों फायदेमंद हैं ये जैव नियंत्रक उपकरण?
कृषि विभाग का कहना है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग कम करना और पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है. फेरोमोन और स्टिकी ट्रैप की मदद से हानिकारक कीट आकर्षित होकर इनमें फंस जाते हैं, जिससे फसल को नुकसान कम होता है. इससे कीटनाशकों पर खर्च घटता है, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और फल-सब्जियों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.
जिला पौधा संरक्षण संभाग की निदेशक रीमा कुमारी ने मीडिया को बताया कि जैव नियंत्रक उपकरणों का उपयोग किसानों के लिए सुरक्षित, किफायती और प्रभावी विकल्प है. इसलिए सभी पात्र किसानों को इस योजना का लाभ उठाकर आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल खेती अपनानी चाहिए.