Egg Production India: भारत का पोल्ट्री क्षेत्र लगातार तेजी से बढ़ रहा है और अंडा उत्पादन के मामले में देश ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है. हालिया आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक देश के प्रमुख अंडा उत्पादक राज्य बनकर उभरे हैं. पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार, ये पांच राज्य मिलकर भारत के कुल अंडा उत्पादन में 64.37 प्रतिशत योगदान दे रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि पोल्ट्री सेक्टर की यह मजबूत वृद्धि न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रही है, बल्कि देश की पोषण सुरक्षा को भी मजबूती दे रही है.
आंध्र प्रदेश सबसे आगे, तमिलनाडु दूसरे स्थान पर
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अनुसार, देश में अंडा उत्पादन के मामले में आंध्र प्रदेश पहले स्थान पर है. राज्य अकेले भारत के कुल अंडा उत्पादन में 18.37 प्रतिशत योगदान देता है. इसके बाद तमिलनाडु का स्थान है, जिसकी हिस्सेदारी 15.63 प्रतिशत है. इन दोनों राज्यों में बड़े स्तर पर विकसित पोल्ट्री उद्योग, आधुनिक उत्पादन तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था ने अंडा उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है.
तेलंगाना और पश्चिम बंगाल की मजबूत भागीदारी
अंडा उत्पादन में तेलंगाना भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. देश के कुल उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 12.98 प्रतिशत है. वहीं पश्चिम बंगाल 10.72 प्रतिशत योगदान के साथ चौथे स्थान पर बना हुआ है. इन राज्यों में पोल्ट्री फार्मिंग को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाएं और बढ़ती मांग इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में पोल्ट्री व्यवसाय रोजगार का एक बड़ा स्रोत बनता जा रहा है.
कर्नाटक भी निभा रहा अहम भूमिका
कर्नाटक देश के कुल अंडा उत्पादन में 6.67 प्रतिशत योगदान देता है. हालांकि इसकी हिस्सेदारी शीर्ष तीन राज्यों की तुलना में कम है, लेकिन राज्य का पोल्ट्री क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है. आधुनिक फार्मिंग तकनीकों और बेहतर प्रबंधन के कारण यहां उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि देखी जा रही है. इससे किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर भी मिल रहा है.
पोषण सुरक्षा और किसानों की आय को मिल रहा सहारा
विशेषज्ञों के अनुसार, अंडा प्रोटीन का सस्ता और सुलभ स्रोत है. ऐसे में बढ़ता अंडा उत्पादन देश की पोषण सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है. स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और विभिन्न पोषण योजनाओं में अंडों के उपयोग से बच्चों और महिलाओं को बेहतर पोषण मिल रहा है. वहीं पोल्ट्री उद्योग लाखों किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए आय का स्थायी स्रोत बन चुका है. आने वाले वर्षों में तकनीकी सुधार, बेहतर नस्लों और सरकारी समर्थन के दम पर भारत का पोल्ट्री क्षेत्र और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है.