Basmati Export: भारत के बासमती चावल के निर्यात को बड़ा झटका लगा है. ऑस्ट्रेलिया की बायोसिक्योरिटी एजेंसी की कार्रवाई के बाद भारतीय बासमती चावल से भरे सैकड़ों कंटेनरों का प्रवेश रोक दिया गया है. इससे करीब 200 करोड़ रुपये का प्रीमियम बासमती चावल बंदरगाहों पर फंस गया है, जिससे खासकर पंजाब और हरियाणा के निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है.
हरियाणा के निर्यातकों का कहना है कि करीब तीन महीने पहले ऑस्ट्रेलियाई एजेंसियों ने चावल के फ्यूमिगेशन (कीट नियंत्रण) और संरक्षण व्यवस्था की जांच शुरू की थी. जांच में कुछ कमियां मिलने के बाद अब भारत से भेजे जा रहे कई चावल के कंटेनरों का प्रवेश रोक दिया गया है. निर्यातक के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के कृषि, मत्स्य और वानिकी विभाग के तहत काम करने वाली नियामक एजेंसी ने भारत की 44 फ्यूमिगेशन सेवा प्रदाता कंपनियों का लाइसेंस निलंबित कर दिया है. ये कंपनियां ऑस्ट्रेलिया भेजे जाने वाले भारतीय निर्यात की बड़ी हिस्सेदारी को प्रमाणित करती थीं. इस कार्रवाई से भारत के प्रीमियम बासमती चावल के निर्यात पर गंभीर असर पड़ा है.
पंजाब-हरियाणा के निर्यातकों पर सबसे ज्यादा असर
ऑस्ट्रेलिया को भेजा जाने वाला ज्यादातर बासमती चावल पंजाब और हरियाणा के निर्यातक भेजते हैं. भारत हर साल ऑस्ट्रेलिया को करीब 1 लाख टन प्रीमियम बासमती चावल निर्यात करता है, जिसकी कीमत लगभग 1,100 करोड़ रुपये है. हालांकि यह कारोबार अमेरिका, यूरोप और मध्य-पूर्व के मुकाबले छोटा है, लेकिन मौजूदा समय में इसकी अहमियत बढ़ गई है. इसकी वजह यह है कि मध्य-पूर्व में जारी तनाव और व्यापारिक बाधाओं के कारण वहां निर्यात प्रभावित हुआ है. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया का बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए और भी महत्वपूर्ण बन गया है.
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पूरी सप्लाई चेन की भी गहन जांच
पंजाब के बासमती निर्यातक और बासमती राइस मिलर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रंजीत सिंह जोसन ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ से कहा कि भारतीय बासमती चावल की गुणवत्ता में ऐसी कोई कमी नहीं है कि उसे खारिज किया जाए. यह कार्रवाई ऑस्ट्रेलिया के बायोसिक्योरिटी एक्ट, 2015 के तहत किए गए ऑडिट के बाद की गई है, जिसके आयात नियम दुनिया के सबसे सख्त नियमों में गिने जाते हैं. उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी सिर्फ चावल की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि फ्यूमिगेशन प्रक्रिया, प्रमाणपत्र, पैकेजिंग, ट्रेसबिलिटी और पूरी सप्लाई चेन की भी गहन जांच करते हैं. सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही कृषि उत्पादों को ऑस्ट्रेलिया में प्रवेश की अनुमति दी जाती है.
सरकार से मंजूर फ्यूमिगेशन एजेंसियों की सेवाएं लेते हैं
बासमती निर्यातकों का कहना है कि वे ऑस्ट्रेलिया भेजे जाने वाले चावल के लिए सरकार से मंजूर फ्यूमिगेशन एजेंसियों की सेवाएं लेते हैं और सभी तय नियमों का पालन भी करते हैं. इसके बावजूद फ्यूमिगेशन एजेंसियों की कमियों का खामियाजा अब निर्यातकों को भुगतना पड़ रहा है. नियमों में गड़बड़ी के कारण निर्यातकों को हर कंटेनर पर 700 से 1,200 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब 39,000 से 67,000 रुपये) तक का अतिरिक्त री-फ्यूमिगेशन खर्च उठाना पड़ रहा है. यह खर्च ऑस्ट्रेलिया के नियमों के अनुसार तय होता है.
निर्यात पर किसी देश ने रोक लगाई
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय बासमती चावल के निर्यात पर किसी देश ने रोक लगाई हो. इससे पहले यूरोपीय देशों ने चावल में ट्राइसाइक्लाजोल फफूंदनाशी की तय सीमा से अधिक मात्रा मिलने पर कई खेपों को रोक दिया था. इसके बाद यूरोपीय देशों ने आयात नियम और सख्त कर दिए. भारत में जांच के लिए प्रयोगशाला स्थापित की गई और निर्यातकों ने किसानों को फफूंदनाशकों और कीटनाशकों के संतुलित इस्तेमाल के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया.