दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल हुई है. करीब 15 साल बाद स्पेक्टेकल्ड कोबरा (Spectacled Cobra) के सफल प्रजनन में कामयाबी मिली है. कृत्रिम ऊष्मायन (Artificial Incubation) तकनीक की मदद से तीन कोबरा बच्चों (शावकों) का जन्म हुआ है. चिड़ियाघर प्रशासन के अनुसार तीनों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है. यह सफलता सरीसृपों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
कृत्रिम ऊष्मायन से हुआ तीन कोबरा बच्चों का जन्म
चिड़ियाघर प्रशासन के मुताबिक, कोबरा के अंडों को विशेष कृत्रिम ऊष्मायन कक्ष में रखा गया था. इस कक्ष में मशीनों की मदद से अंडों के लिए जरूरी तापमान और नमी को नियंत्रित किया गया. इसके बाद 29 और 30 जून को तीन कोबरा शावक अंडों से बाहर निकले. जन्म के बाद से ही सभी शावक सक्रिय हैं और उन्हें प्रजाति के अनुकूल सुरक्षित वातावरण में रखा गया है. विशेषज्ञों के अनुसार, सरीसृपों के अंडों की सुरक्षा प्राकृतिक परिस्थितियों में चुनौतीपूर्ण होती है. कई बार दूसरे जीव अंडों को नुकसान पहुंचा सकते हैं या खुद सरीसृप भी उन्हें खा सकते हैं. ऐसे में कृत्रिम ऊष्मायन तकनीक प्रजनन सफलता बढ़ाने में मददगार साबित होती है.
2010-11 के बाद मिली बड़ी सफलता
स्पेक्टेकल्ड कोबरा के सफल प्रजनन का यह प्रयास लंबे अंतराल के बाद सफल हुआ है. इससे पहले वर्ष 2010-11 में चिड़ियाघर में 11 कोबरा शावकों का जन्म हुआ था. इसके बाद कई वर्षों तक इस प्रजाति का सफल प्रजनन नहीं हो पाया था. फिलहाल चिड़ियाघर में तीन वयस्क स्पेक्टेकल्ड कोबरा मौजूद हैं, जिनमें दो नर और एक मादा शामिल हैं. नई पीढ़ी के तीन शावकों के जन्म से इस प्रजाति के संरक्षण को नई उम्मीद मिली है.
VIDEO | National Zoological Park (NZP), New Delhi, has announced the successful hatching of three Indian cobra (Naja naja) hatchlings. The hatchlings emerged on June 29-30 after a successful incubation period and are healthy, active, and being monitored in a species-appropriate… pic.twitter.com/GviIxnfz8M
— Press Trust of India (@PTI_News) July 12, 2026
तितली और ड्रैगनफ्लाई वॉक से जुड़ रहे लोग
वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ आम लोगों को जैव विविधता से जोड़ने के लिए चिड़ियाघर ने एक नई पहल भी शुरू की है. इसके तहत संडे बटरफ्लाई एंड ड्रैगनफ्लाई वॉक का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में प्रकृति प्रेमियों, विद्यार्थियों और वन्यजीव फोटोग्राफरों ने हिस्सा लिया. पहली वॉक में प्रतिभागियों ने 12 प्रजातियों की तितलियां, 7 प्रजातियों की ड्रैगनफ्लाई और 3 प्रजातियों की डैमसेलफ्लाई की पहचान की. इसके अलावा 500 से अधिक जीवों का अवलोकन किया गया.
नागरिक विज्ञान से बढ़ेगी संरक्षण में भागीदारी
चिड़ियाघर प्रशासन का उद्देश्य लोगों को वैज्ञानिक तरीके से जैव विविधता को समझने और रिकॉर्ड करने से जोड़ना है. इसी कड़ी में बर्ड वॉक जैसी गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं. रविवार को आयोजित पांचवीं संडे बर्ड वॉक में पक्षियों की 45 प्रजातियां दर्ज की गईं. विशेषज्ञों का मानना है कि वन्यजीव संरक्षण केवल सरकारी संस्थानों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम लोगों की भागीदारी से इसे और मजबूत बनाया जा सकता है. कोबरा शावकों का जन्म और नागरिकों को प्रकृति से जोड़ने वाली पहलें जैव विविधता संरक्षण के लिए सकारात्मक संकेत हैं.