Monsoon Update: एक तरफ बाढ़, दूसरी तरफ सूखे जैसे हालात! आखिर क्या है मॉनसून ब्रेक, जिससे बढ़ी चिंता?

Monsoon Update: देश के कई हिस्सों में बारिश थमने के बाद मौसम वैज्ञानिकों ने 'मॉनसून ब्रेक' को लेकर चेतावनी जारी की है. अगले कुछ दिनों तक उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई इलाकों में बारिश कमजोर रह सकती है, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई और बढ़वार प्रभावित होने की आशंका है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 13 Jul, 2026 | 02:09 PM

Monsoon 2026: देश के कई हिस्सों में कुछ दिन पहले तक लगातार हो रही बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए थे. वहीं अब अचानक कई राज्यों में बारिश थम गई है. आसमान में बादल तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन बारिश नहीं हो रही. ऐसे में मौसम वैज्ञानिकों ने ‘मॉनसून ब्रेक’ (Monsoon Break) को लेकर चेतावनी दी है. इसका असर खेती, जल स्रोतों और आम लोगों की दिनचर्या पर पड़ सकता है.

हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि, मॉनसून खत्म हो गया है. इसी कड़ी में आइए समझते हैं कि, मॉनसून ब्रेक क्या होता है, इसका खेती पर क्या असर पड़ता है और इस बार अल नीनो को लेकर चिंता क्यों बढ़ रही है.

क्या होता है मॉनसून ब्रेक?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जुलाई और अगस्त के दौरान एक-दो बार ऐसी स्थिति बनती है, जब मॉनसून की बारिश कुछ दिनों के लिए बहुत कम हो जाती है या लगभग रुक जाती है. इसे ही मॉनसून ब्रेक कहा जाता है. यह मौसम का सामान्य हिस्सा है, लेकिन अगर यह अवधि ज्यादा लंबी हो जाए तो खेती और जल संसाधनों पर इसका असर दिखने लगता है.

अगले कुछ दिन क्यों हैं अहम?

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, अगले 6 से 7 दिनों तक उत्तर-पश्चिम भारत, पश्चिम-मध्य भारत और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बारिश कमजोर रह सकती है. यानी इन इलाकों में तेज बारिश की संभावना फिलहाल कम है. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 19 से 20 जुलाई तक दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और आसपास के कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश के आसार कम हैं. इस दौरान तापमान बढ़ सकता है और उमस भी लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है.

किसानों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

इस समय देश में खरीफ फसलों की बुवाई का दौर चल रहा है. धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, दालें और दूसरी कई फसलें समय पर होने वाली बारिश पर निर्भर करती हैं.

अगर कई दिनों तक बारिश नहीं होती तो खेतों की नमी कम हो जाती है. इससे बुवाई प्रभावित हो सकती है, पौधों की बढ़वार धीमी पड़ सकती है और उत्पादन घटने का खतरा बढ़ जाता है. यही वजह है कि कई राज्यों ने किसानों को जरूरत के हिसाब से खेती की योजना बनाने और कम पानी वाली फसलों पर भी विचार करने की सलाह दी है.

क्या पूरे देश में सूखे जैसे हालात बनेंगे?

फिलहाल मॉनसून की मुख्य ट्रफ (बारिश कराने वाली पट्टी) अपनी सामान्य स्थिति से हट गई है. इस वजह से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अच्छी बारिश जारी रह सकती है, जबकि उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई इलाकों में कुछ दिन मौसम ड्राई बना रह सकता है. यानी पूरे देश में एक जैसे हालात नहीं होंगे.

अल नीनो क्यों बढ़ा रहा है चिंता?

इस बार मौसम वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता अल नीनो (El Nino) को लेकर है. यह एक प्राकृतिक मौसमीय प्रक्रिया है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है. भारत में अल नीनो का असर अक्सर मॉनसून को कमजोर करने के रूप में देखा जाता है. इससे बारिश कम हो सकती है, जिससे खेती और जल भंडारण पर असर पड़ता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार अल नीनो पहले से ज्यादा मजबूत हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो आने वाले महीनों में मौसम का मिजाज और अधिक प्रभावित हो सकता है.

कब लौट सकती है अच्छी बारिश?

स्काईमेट के अनुसार, जैसे ही बंगाल की खाड़ी में नया लो-प्रेशर सिस्टम बनेगा, मॉनसून फिर से सक्रिय हो सकता है. फिलहाल 19 से 20 जुलाई के आसपास बारिश में दोबारा तेजी आने की संभावना जताई जा रही है.

अगले कुछ दिन रहेंगे महत्वपूर्ण

फिलहाल देश में दो अलग-अलग मौसम की तस्वीर देखने को मिल रही है. एक तरफ कुछ राज्यों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं, जबकि दूसरी ओर कई इलाकों में मॉनसून ब्रेक के कारण बारिश थम गई है. ऐसे में किसानों, आम लोगों और प्रशासन के लिए अगले कुछ दिन काफी अहम होंगे. ऐसे में अगर मॉनसून जल्द सक्रिय होता है तो खेती को राहत मिल सकती है, लेकिन अगर बारिश में देरी हुई तो खरीफ फसलों पर इसका असर देखने को मिल सकता है.

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