NOAA El Nino Forecast: दुनियाभर में मौसम को प्रभावित करने वाली अल नीनो (El Niño) प्रणाली एक बार फिर मजबूत होती नजर आ रही है. अमेरिका की नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर (CPC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो धीरे-धीरे ताकतवर हो रहा है और साल 2026 के अंत तक यह काफी मजबूत रूप ले सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि, अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच बहुत मजबूत अल नीनो बनने की 81 प्रतिशत संभावना है. अगर ऐसा होता है तो यह 1950 के बाद के सबसे बड़े अल नीनो में शामिल हो सकता है.
साल के अंत तक और मजबूत होगा अल नीनो
रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो अभी सक्रिय है और आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की उम्मीद है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि, यह असर सिर्फ 2026 तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 2027 की शुरुआती वसंत ऋतु तक इसके बने रहने की 97 प्रतिशत संभावना है. इसका मतलब है कि, दुनिया के कई हिस्सों में मौसम सामान्य से अलग रह सकता है. कहीं ज्यादा बारिश हो सकती है तो कहीं सूखे जैसी स्थिति बन सकती है.
समुद्र का बढ़ता तापमान बना वजह
वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रशांत महासागर के बीच और पूर्वी हिस्से का समुद्र पहले से ज्यादा गर्म हो रहा है. समुद्र के अंदर भी गर्म पानी की मात्रा लगातार बढ़ रही है, जिससे अल नीनो और मजबूत होता जा रहा है. रिपोर्ट में बताया गया है कि, समुद्र के अंदर गर्म पानी की एक लहर (केल्विन वेव) पूर्व की ओर बढ़ रही है. यह गर्म पानी अल नीनो को और ज्यादा ताकत देने में अहम भूमिका निभा रहा है.
हवाओं में बदलाव भी दे रहे संकेत
रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ समुद्र ही नहीं बल्कि हवाओं के चलने के तरीके में भी बदलाव देखने को मिल रहा है. प्रशांत महासागर के ऊपर चलने वाली सामान्य हवाएं कमजोर पड़ रही हैं और कई इलाकों में मौसम का मिजाज बदल गया है. इंडोनेशिया जैसे क्षेत्रों में बादल और बारिश कम हो रही है, जबकि प्रशांत महासागर के बीच और पूर्वी हिस्सों में बादल ज्यादा बन रहे हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये सभी संकेत बताते हैं कि अल नीनो लगातार मजबूत हो रहा है.
खेती और मौसम पर पड़ सकता है असर
अल नीनो का सबसे ज्यादा असर कृषि और मौसम पर पड़ता है. इसके कारण कई देशों में बारिश का पैटर्न बदल जाता है. कहीं सामान्य से कम बारिश होती है तो कहीं अत्यधिक बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है. भारत सहित कई कृषि प्रधान देशों में अल नीनो का असर फसल उत्पादन, जल उपलब्धता और किसानों की आय पर पड़ सकता है. अगर मॉनसून कमजोर होता है तो खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है. वहीं दूसरी ओर कुछ देशों में अधिक बारिश से भी फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है.
वैज्ञानिकों ने जताया भरोसा
अमेरिका के वैज्ञानिक मॉडल बताते हैं कि समुद्र और वातावरण के बीच बनने वाली मौजूदा परिस्थितियां अल नीनो को लगातार मजबूती दे रही हैं. इसी वजह से वैज्ञानिकों को पूरा भरोसा है कि, यह मौसम प्रणाली 2026 के अंत तक और मजबूत होगी तथा 2027 की शुरुआत तक सक्रिय रह सकती है. मौसम विशेषज्ञ लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं, क्योंकि इसका असर दुनिया भर के मौसम, कृषि, खाद्य उत्पादन और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. आने वाले महीनों में अल नीनो की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी.