Silk and Milk Project: महाराष्ट्र के परभणी जिले के किसानों के लिए जल्द ही एक नई और खास योजना शुरू होने जा रही है. रेशम और दूध (Silk & Milk) नाम की इस पायलट परियोजना का मकसद किसानों की कमाई बढ़ाना और खेती को ज्यादा मजबूत बनाना है. इस मॉडल में किसानों को रेशम उत्पादन और डेयरी व्यवसाय एक साथ करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि उनकी आय सिर्फ एक फसल पर निर्भर न रहे. खासकर मराठवाड़ा जैसे सूखे से प्रभावित इलाकों में यह योजना किसानों के लिए नई उम्मीद बन सकती है.
परभणी ग्रोथ हब के तहत होगा 1,500 करोड़ रुपये का निवेश
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, परभणी ग्रोथ हब के तहत करीब 1,500 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है. इसी योजना के अंतर्गत रेशम और दूध पायलट परियोजना शुरू की जाएगी. उन्होंने यह जानकारी उद्यम-विकसित मराठवाड़ा मिशन के तहत आयोजित उद्योग-अकादमिक संवाद कार्यक्रम में दी. इस कार्यक्रम का आयोजन वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ (VNMKV), चैंबर फॉर एडवांसमेंट ऑफ स्मॉल एंड मीडियम बिजनेस (CASMB) और सेवा भारती, देवगिरी ने मिलकर किया.
रेशम और डेयरी से मिलेगी दोहरी आय
इस परियोजना के तहत किसानों को रेशम उत्पादन (Sericulture) और दुग्ध उत्पादन (Dairy Farming) को साथ में अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा. इससे किसानों के पास कमाई के दो अलग-अलग साधन होंगे. अगर किसी कारण खेती में नुकसान होता है, तो डेयरी और रेशम उत्पादन से आय बनी रह सकती है. इससे मौसम की अनिश्चितता और सूखे का असर किसानों की कमाई पर कम पड़ेगा. इस मॉडल का उद्देश्य किसानों की आय को ज्यादा सुरक्षित और स्थिर बनाना है.
कृषि आधारित उद्योग और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विधायक मेघना सकोरे-बोर्दिकर ने बताया कि खेती को अधिक लाभदायक बनाने के लिए उसे फूड प्रोसेसिंग, डेयरी और अन्य कृषि आधारित उद्योगों से जोड़ना जरूरी है. उन्होंने एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) को समय की जरूरत बताया. उनका कहना है कि इससे गांवों में नए उद्योग लगेंगे, रोजगार बढ़ेगा और मराठवाड़ा से होने वाला पलायन भी कम होगा. सरकार किसानों और उद्यमियों को जरूरी बुनियादी ढांचा, तकनीकी सहायता और हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है.
युवाओं और किसानों के लिए नई उम्मीद
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, CASMB के महासचिव डॉ. उमेश कांबले ने कहा कि उद्यम-विकसित मराठवाड़ा मिशन का उद्देश्य उद्योग, शिक्षा संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाना है, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर मिल सकें. इसके साथ ही धाराशिव जिले में डेयरी गतिविधियों के बढ़ने से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है.
इसके साथ ही, गन्ने से इथेनॉल उत्पादन बढ़ने के कारण किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं. उनका मानना है कि आज किसान सिर्फ अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता की भूमिका भी निभा रहे हैं. ऐसे में रेशम और दूध परियोजना भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है.