सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य को पूरा करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. खाद्य मंत्रालय ने अगले इथेनॉल सीजन के लिए सरकारी भंडार से 72 लाख टन चावल डिस्टिलरी को देने का फैसला किया है. यह पिछले 2025-26 सीजन में दिए गए 52 लाख टन से 20 लाख टन ज्यादा है. इसके अलावा सरकार ने 100 फीसदी टूटे हुए (ब्रोकन) चावल के 55 लाख टन अतिरिक्त स्टॉक को ई-ऑक्शन के जरिए बेचने की मंजूरी भी दी है. इथेनॉल बनाने वाली कंपनियां इस चावल को खरीद सकेंगी.
सरकार का मानना है कि इससे इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और कंपनियों के लिए जैव ईंधन (बायोफ्यूल) बनाना पहले के मुकाबले अधिक लाभदायक हो सकता है. केंद्र सरकार ने अगले इथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY 2026-27) के लिए सरकारी भंडार से 72 लाख टन चावल इथेनॉल बनाने वाली डिस्टिलरी को बेचने की मंजूरी दे दी है. कहा जा रहा है कि खाद्य मंत्रालय ने 16 जुलाई को भारतीय खाद्य निगम (FCI) को भेजे पत्र में यह जानकारी दी. यह चावल 2,390 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा. एथेनॉल सप्लाई ईयर नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक रहेगा.
55 लाख टन ब्रोकन राइस की नीलामी
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके अलावा, सरकार ने राइस मिलिंग ट्रांसफॉर्मेशन (RMT) योजना के तहत तैयार हुए 55 लाख टन टूटे (ब्रोकन) चावल को भी खुले बाजार में ई-ऑक्शन के जरिए बेचने का फैसला किया है. इथेनॉल निर्माता इस चावल को खरीद सकेंगे. सरकार ने 2 जुलाई को RMT चावल का आरक्षित (बेस) मूल्य 2,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था. हालांकि, सरकार ने यह भी कहा है कि डायनेमिक रिजर्व प्राइस (DRP) हर तीन महीने में एक समिति तय करेगी. यानी बाजार की स्थिति के हिसाब से कीमत में बदलाव किया जा सकेगा.
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इथेनॉल उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
सरकार के इस फैसले से इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को लागत कम करने में मदद मिल सकती है. अभी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) सरकारी भंडार (FCI) के सामान्य चावल से बने इथेनॉल को 58.50 रुपये प्रति लीटर और 100 फीसदी टूटे (ब्रोकन) चावल से बने इथेनॉल को 64 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदती हैं. उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ई-ऑक्शन के जरिए बेचे जाने वाले 100 फीसदी टूटे चावल के इस्तेमाल पर कोई खास रोक नहीं है. ऐसे में डिस्टिलरी इन्हें इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल कर सकती हैं, जिससे उनका मुनाफा बढ़ने की संभावना है.
1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल की जरूरत
सरकार भविष्य में पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग को मौजूदा 20 फीसदी से आगे बढ़ाने पर भी विचार कर रही है. इसके लिए परीक्षण और ट्रायल जारी हैं. अगर कमजोर मॉनसून की वजह से गन्ने या मक्के का उत्पादन घटता है, तो सरकारी भंडार का चावल इथेनॉल उत्पादन के लिए लगातार कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद करेगा. देश में हर साल करीब 2,000 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन होता है. वहीं, पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य पूरा करने के लिए तेल कंपनियों को हर साल 1,050 से 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल की जरूरत पड़ती है.
‘भारत’ ब्रांड का चावल
केंद्र सरकार ने फिलहाल नेफेड (NAFED), एनसीसीएफ (NCCF) और केंद्रीय भंडार जैसी राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं को ‘भारत’ ब्रांड के तहत चावल बेचने के लिए आवंटन रोक दिया है. खाद्य मंत्रालय ने कहा है कि इन संस्थाओं को कितना चावल दिया जाएगा, इसकी जानकारी बाद में दी जाएगी. इससे पहले ये संस्थाएं सरकार द्वारा तय कीमत पर ‘भारत’ ब्रांड का चावल बेचती थीं.
ई-ऑक्शन के जरिए चावल बेचने का फैसला
वहीं, सरकार ने 25 लाख टन चावल निजी कंपनियों और सहकारी संस्थाओं को ई-ऑक्शन के जरिए बेचने का फैसला किया है. इसके लिए जुलाई से अक्टूबर के दौरान आरक्षित कीमत 2,660 से 2,890 रुपये प्रति क्विंटल और नवंबर 2026 से जून 2027 के लिए 2,740 से 2,970 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है. इस कोटे में छोटे निजी व्यापारी, उद्यमी और व्यक्तिगत खरीदार भी शामिल होंगे. वे जुलाई-अक्टूबर के दौरान 2,890 रुपये प्रति क्विंटल और नवंबर 2026 से जून 2027 के दौरान 2,970 रुपये प्रति क्विंटल की दर से चावल खरीद सकेंगे. इसके अलावा, सरकार ने 10 फीसदी टूटे दाने वाले 20 लाख टन चावल को भी खुले बाजार में ई-ऑक्शन के जरिए बेचने का फैसला किया है. इसकी आरक्षित कीमत जुलाई-अक्टूबर के लिए 3,090 रुपये प्रति क्विंटल और नवंबर 2026 से जून 2027 के लिए 3,180 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है.