Telangana News: तेलंगाना में पिछले कुछ दिनों से हुई अच्छी बारिश के बाद खरीफ फसलों को लेकर किसानों की उम्मीदें फिर बढ़ गई हैं. 29 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में धान की बुवाई पिछले साल की तुलना में घटी है. इस बार करीब 8.28 लाख हेक्टेयर में धान बोया गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 8.90 लाख हेक्टेयर था. मक्का की बुवाई भी घटकर 1.90 लाख हेक्टेयर रह गई, जो पिछले साल 2.19 लाख हेक्टेयर थी. हालांकि, अरहर (तूर) की बुवाई मामूली बढ़कर 1.79 लाख हेक्टेयर हो गई, जो पिछले साल 1.75 लाख हेक्टेयर थी. दूसरी ओर, कपास की खेती बढ़ी है. इस साल 18.62 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई, जबकि पिछले साल इसी समय यह 17.40 लाख हेक्टेयर थी.
वहीं, राज्य सरकार ने किसानों को नुकसान से बचाने के लिए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की है. कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने कुछ दिन पहले कहा था कि अगस्त तक अल नीनो का असर बने रहने की संभावना है. इसलिए किसानों को धान की खेती करने से बचने और उसकी जगह दालों व मोटे अनाज (मिलेट्स) की खेती अपनाने की सलाह दी गई थी. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि किसानों के लिए वैकल्पिक फसलों के पर्याप्त बीज उपलब्ध कराए जाएं. वहीं, इस बार राज्य में करीब 8.28 लाख हेक्टेयर में धान बोया गया है.
अल नीनो का असर रबी सीजन तक भी जारी रह सकता है
कृषि मंत्री ने यह भी कहा था कि मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो का असर रबी सीजन तक भी जारी रह सकता है. ऐसे में किसानों को मौसम को ध्यान में रखते हुए फसल का चयन करना चाहिए. तेलंगाना में पिछले कुछ दिनों से हुई अच्छी बारिश के बाद किसानों की खरीफ फसलों को लेकर उम्मीदें फिर बढ़ गई हैं. महबूबाबाद जिले के किसान जयपाल ने कहा कि पिछले सप्ताह की तुलना में अब हालात बेहतर हैं और कई जिलों के किसान अब सुरक्षित स्थिति में हैं.
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फसल बुवाई में आ सकती है गिरावट
हालांकि, राज्य सरकार अभी भी धान की खेती को लेकर सतर्क है. सरकार का मानना है कि मौजूदा मौसम को देखते हुए धान की खेती जोखिम भरी हो सकती है. सरकार का अनुमान है कि इस खरीफ सीजन में धान सहित कुल बुवाई का रकबा पिछले खरीफ सीजन के मुकाबले 20 से 25 फीसदी तक कम रह सकता है. इसलिए किसानों को मौसम के अनुसार फसल का चुनाव करने की सलाह दी जा रही है.
बारिश से किसानों को राहत मिली है
तेलंगाना में मौसम की अनिश्चितता का असर किसानों पर साफ दिखाई दे रहा है. राज्य सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि कई किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ी, जिससे स्थिति की गंभीरता का पता चलता है. उन्होंने कहा कि जिन किसानों के पास बोरवेल की सुविधा है, उन्हें भी इस सीजन में धान की खेती से बचने की सलाह दी जा रही है. वहीं, निजामाबाद के किसान प्रभाकर वुप्पाला का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश से किसानों को राहत मिली है, खासकर धान की खेती करने वालों को इसका फायदा होगा.