Rice Price Hike: तमिलनाडु में पिछले कुछ हफ्तों के दौरान चावल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. राज्य में चावल के दाम 5 से 15 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह अच्छी गुणवत्ता वाले धान की कमी बताई जा रही है. व्यापारियों के मुताबिक, बापटला पोन्नी और कर्नाटक पोन्नी जैसी अच्छी किस्मों के धान की आपूर्ति आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक से कम हो गई है. इससे बाजार में चावल की उपलब्धता घटी और कीमतें बढ़ गईं.
व्यापारियों का कहना है कि कम खेती, सिंचाई की कमी, निर्यात की मांग बढ़ने और बाजार में कम आवक के कारण चावल महंगा हुआ है. वहीं, किसानों ने सरकार से मांग की है कि तमिलनाडु में उच्च गुणवत्ता वाली धान की किस्मों की खेती को बढ़ावा दिया जाए, ताकि राज्य की जरूरत स्थानीय स्तर पर पूरी हो सके. दरअसल, तमिलनाडु के डेल्टा जिलों से खरीदा गया अधिकांश धान तमिलनाडु सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन (TNCSC) के जरिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन) के लिए दिया जाता है. जबकि खुले बाजार में बिक्री के लिए व्यापारी मुख्य रूप से पड़ोसी राज्यों से आने वाले धान और चावल पर निर्भर रहते हैं.
अब इसकी कीमत बढ़कर करीब 1,500 रुपये हो गई
तिरुवोत्तियूर में चावल की दुकान चलाने वाले राजेश आर ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पिछले एक महीने में कम गुणवत्ता वाले कई चावलों के दाम 10 से 15 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं. उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा बढ़ोतरी उबले चावल की किस्मों, जैसे डीलक्स राइस और RNR राइस, में हुई है. पहले इनकी 25 किलो की बोरी 1,100 से 1,250 रुपये में मिलती थी, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर करीब 1,500 रुपये हो गई है. यानी इसमें करीब 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
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चावल की खुदरा कीमत 60 रुपये प्रति किलो से शुरू
राजेश ने कहा कि पहले उबले चावल की खुदरा कीमत 50 रुपये प्रति किलो से शुरू होती थी, लेकिन अब यह 60 रुपये प्रति किलो से शुरू हो रही है. हालांकि, HMT, कोल्लम और अम्मन सोना जैसी प्रीमियम किस्मों के दाम में अभी ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि वे आमतौर पर रेड हिल्स के थोक बाजार से चावल खरीदते हैं, जहां आंध्र प्रदेश और कर्नाटक से चावल की सप्लाई आती है. लेकिन इन राज्यों में फसल का उत्पादन कम होने से बाजार में चावल की आवक घटी है, जिससे कीमतें बढ़ गई हैं.
तमिलनाडु में चावल की सप्लाई कम होने से व्यापारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. व्यापारियों का कहना है कि अरनी जैसे पारंपरिक धान उत्पादक क्षेत्र के व्यापारी भी अब रेड हिल्स आकर नकद भुगतान कर चावल खरीद रहे हैं. इससे दूसरे व्यापारियों को पर्याप्त स्टॉक नहीं मिल पा रहा है. एक अन्य चावल व्यापारी ने बताया कि इडली चावल की कीमत भी बढ़ गई है. तिरुचिरापल्ली के खुदरा चावल विक्रेता एस. धंडायुथापानी ने कहा कि जून तक ईंधन महंगा होने के बावजूद चावल के दाम नहीं बढ़े थे, लेकिन जुलाई में दो बार कीमतें बढ़ाई गईं.
आंध्र पोन्नी धान की भारी कमी हो गई
उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता और सामान्य किस्मों सहित लगभग सभी चावलों की 26 किलो की बोरी 150 से 200 रुपये तक महंगी हो गई है. वहीं, तिरुचिरापल्ली के राइस मिल संचालक पी. रघुरमन ने कहा कि आंध्र प्रदेश में खेती का रकबा घटने से आंध्र पोन्नी धान की भारी कमी हो गई है. उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश जाकर भी उन्हें जरूरत के मुताबिक धान नहीं मिल सका, क्योंकि बाजार में इसकी सप्लाई काफी कम है.
क्या कहते हैं चावल व्यापारी
वहीं, तंजावुर धान और चावल व्यापारी संघ के अध्यक्ष बी. पालराज ने कहा कि 2025 में कर्नाटक सरकार ने तुंगभद्रा जलाशय के रखरखाव कार्य के कारण एक क्षेत्र के किसानों को एक सीजन में धान की बुवाई नहीं करने के लिए कहा था. इससे धान का उत्पादन कम हुआ और बाजार में इसकी उपलब्धता घट गई. इसी वजह से अब चावल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है.