चावल हुआ महंगा, 500 रुपये तक बढ़ीं कीमतें.. उपभोक्ताओं ने सरकार से लगाई गुहार

फिलहाल रायथू बाजार में सोना मसूरी और सांबा मसूरी चावल करीब 48 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं, जबकि 2716 और 1071 किस्म के चावल लगभग 44 रुपये प्रति किलो उपलब्ध हैं. हालांकि, कई उपभोक्ताओं का कहना है कि इन चावलों की गुणवत्ता उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 14 Jul, 2026 | 03:04 PM

Rice Price Hike: आंध्र प्रदेश में चावल की बढ़ती कीमतों ने आम और मध्यम वर्ग के परिवारों की चिंता बढ़ा दी है. पिछले कुछ महीनों से चावल लगातार महंगा हो रहा है, जिससे घर का मासिक बजट बिगड़ने लगा है. बढ़ती कीमतों को देखते हुए लोग सरकार से दखल देकर राहत देने की मांग कर रहे हैं. पिछले कुछ महीनों में 26 किलो चावल की एक बोरी 300 से 500 रुपये तक महंगी हो गई है. इससे आम परिवारों के मासिक खर्च में काफी बढ़ोतरी हुई है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जनवरी में संक्रांति के दौरान 26 किलो चावल की एक बोरी 1,000 से 1,300 रुपये में मिल रही थी. लेकिन अब उसी बोरी की कीमत 1,500 से 1,800 रुपये तक पहुंच गई है. यानी रेट में 00 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. खास बात यह है कि किस्म और ब्रांड के अनुसार कीमतें  अलग-अलग दर से बढ़ी हैं.

राइस मिल मालिकों को हो रहा फायदा

इसी बीच, किसानों से धान खरीदने की कीमत और बाजार में बिकने वाले चावल के दाम  के बीच बढ़ते अंतर पर भी सवाल उठ रहे हैं. किसानों से 77 किलो धान की एक बोरी करीब 1,000 से 1,500 रुपये में खरीदी जाती है. आधुनिक राइस मिलों में इससे किस्म और मिलिंग रिकवरी के आधार पर लगभग 26 किलो की दो बोरियां चावल तैयार हो जाती हैं. इसके बाद यही 26 किलो चावल की एक बोरी 1,500 से 1,800 रुपये में खुदरा बाजार में बेची जा रही है. इस कीमत के अंतर को लेकर आरोप लग रहे हैं कि सबसे ज्यादा फायदा राइस मिल मालिकों को हो रहा है. इसलिए लोग चावल की कीमत तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और बाजार की सख्त निगरानी की मांग कर रहे हैं.

सरकार से हस्तक्षेप करने की उठी मांग

उपभोक्ताओं का कहना है कि एक तरफ किसानों को उनकी धान की फसल का सही दाम नहीं मिल रहा, वहीं दूसरी ओर आम लोगों को चावल के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. किसानों का भी कहना है कि महीनों की मेहनत और लागत के बावजूद उन्हें उचित कीमत नहीं मिल रही, जबकि उपभोक्ताओं पर महंगे चावल का बोझ बढ़ता जा रहा है. लोगों का आरोप है कि सिविल सप्लाई, लीगल मेट्रोलॉजी और राजस्व विभाग की पर्याप्त निगरानी नहीं होने से चावल की कीमतें मनमाने तरीके से बढ़ रही हैं. इसे लेकर सरकार से जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की जा रही है.

सांबा मसूरी चावल भी हुआ महंगा

वहीं, रायथू बाजार में सोना मसूरी और सांबा मसूरी चावल करीब 48 रुपये प्रति किलो बिक रहे हैं, जबकि 2716 और 1071 किस्म के चावल लगभग 44 रुपये प्रति किलो उपलब्ध हैं. हालांकि, कई उपभोक्ताओं का कहना है कि इन चावलों की गुणवत्ता उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं है. इसी वजह से वे रायथू बाजार के बजाय खुदरा और थोक दुकानों से ब्रांडेड चावल खरीदना ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जहां कीमतें अधिक होने के बावजूद गुणवत्ता पर उन्हें ज्यादा भरोसा है.

बाजार में चावल 60 से 65 रुपये प्रति किलो बिक रहा है

मछलीपट्टनम के रहने वाले जे. सतीश कुमार ने कहा कि बाजार में चावल 60 से 65 रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जिससे परिवारों का मासिक बजट  बिगड़ गया है. उन्होंने कहा कि हम हर महीने सिर्फ चावल पर करीब 2,000 रुपये खर्च कर रहे हैं. सरकार को तुरंत राइस मिल मालिकों से बातचीत कर कीमतें कम कराने के लिए कदम उठाने चाहिए. वहीं, किराना दुकानदार सिद्दिनेनी भास्कर राव ने कहा कि चावल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर ग्राहकों का गुस्सा दुकानदारों पर निकल रहा है. उन्होंने बताया कि ग्राहक रोज कीमत बढ़ने की शिकायत करते हैं, लेकिन खुदरा दुकानदारों के पास इसमें कुछ करने का अधिकार नहीं है. उनके मुताबिक, चावल की कीमतें राइस मिल मालिक तय करते हैं और दुकानदारों को उसी दर पर बेचना पड़ता है.

 

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Published: 14 Jul, 2026 | 03:01 PM

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