Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश सरकार ने गोदावरी डेल्टा की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने डॉवलेश्वरम के ऐतिहासिक सर आर्थर कॉटन बैराज के 117 पुराने गेट बदलने की 152.95 करोड़ रुपये की परियोजना की शुरुआत की. सरकार का लक्ष्य इस काम को जून 2027 में होने वाले गोदावरी पुष्करालु से पहले पूरा करना है. सरकार को उम्मीद है कि गेट बदलने जाने के बाद खेतों को सिंचाई के लिए समय पर पानी मिलेगा.
दरअसल, मुख्यमंत्री ने डॉवलेश्वरम स्थित ऐतिहासिक सर आर्थर कॉटन बैराज के 117 गेट बदलने की परियोजना की शुरुआत की और उसका निरीक्षण किया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी नए गेट नौ महीने के भीतर लगा दिए जाएं. अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल 27,000 क्यूसेक पानी समुद्र में जा रहा है, जबकि 14,700 क्यूसेक पानी नहरों के जरिए सिंचाई के लिए छोड़ा जा रहा है.
खेतों में पर्याप्त पानी पहुंचेगा
नायडू ने कहा कि सिंचाई के पानी की लगातार निगरानी जरूरी है, ताकि नहरों के अंतिम छोर (टेल-एंड) तक किसानों के खेतों में पर्याप्त पानी पहुंच सके. इसके बाद उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर कोनसीमा जिले के पिचुकालंका गांव में किसानों से मुलाकात की और कहा कि सर आर्थर कॉटन के प्रयासों से ही गोदावरी डेल्टा को ‘भारत का धान का कटोरा (राइस बाउल ऑफ इंडिया)’ कहा जाता है.
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10.13 लाख एकड़ क्षेत्र में सिंचाई होती है
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि सर आर्थर कॉटन बैराज के जरिए पूर्वी, मध्य और पश्चिमी गोदावरी डेल्टा के करीब 10.13 लाख एकड़ क्षेत्र में सिंचाई होती है. उन्होंने कहा कि बैराज के गेट और मोटर काफी पुराने हो चुके हैं, इसलिए उनका आधुनिकीकरण जरूरी हो गया था. नायडू ने पिछली सरकार पर बैराज के नियमित रखरखाव की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सिंचाई परियोजनाओं को प्राथमिकता दे रही है और पिछले दो वर्षों में 24,000 करोड़ रुपये सिंचाई क्षेत्र पर खर्च किए हैं.
सिंचाई परियोजना का 89 फीसदी काम पूरा
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि पोलावरम सिंचाई परियोजना का 89 फीसदी काम पूरा हो चुका है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि परियोजना से प्रभावित सभी परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि गोदावरी पुष्करालु 2027 से पहले इस परियोजना को देश को समर्पित कर दिया जाएगा. नायडू ने कहा कि 2014 से 2019 के बीच पोलावरम परियोजना का 72 फीसदी काम पूरा हुआ था, जबकि इसके बाद के पांच वर्षों में केवल 2 फीसदी ही प्रगति हुई. उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार बनने के बाद परियोजना का काम फिर तेज हो गया है. इसके तहत 990 करोड़ रुपये की लागत से डायफ्राम वॉल का दोबारा निर्माण भी किया जा रहा है.
1,200 करोड़ की लागत से विकसित होगा बुनियादी ढांचा
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राजमहेंद्रवरम और गोदावरी पुष्कर घाटों के आसपास श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 1,200 करोड़ रुपये की लागत से बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा, ताकि लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें. मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पिचुकालंका और बोब्बरलंका के विकास की भी घोषणा की. इसके अलावा कोनसीमा तक नई रेलवे लाइन बिछाने और कोव्वूर में ‘कोकोआ सिटी’ विकसित करने की योजना का भी ऐलान किया. उन्होंने किसानों से बदलते मौसम और अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए वैज्ञानिक तरीके से फसल की योजना बनाने की अपील की. नायडू ने कहा कि मौसम के अनुसार फसलों का चयन और आधुनिक खेती अपनाने से किसानों को नुकसान कम होगा और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी.