कर्नाटक के तटीय इलाकों में समुद्री मछली पकड़ने पर लगे वार्षिक प्रतिबंध का असर अब बाजार में दिखने लगा है. मछली की सप्लाई कम होने से ग्राहकों को अब ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. मछली कारोबारियों के अनुसार, मंगलुरु, उडुपी और कारवार से आने वाली समुद्री मछली की आवक में काफी गिरावट आई है. इसके चलते सामान्य सीजन में जो सार्डिन और मैकेरल मछली 200 से 300 रुपये प्रति किलो बिकती थी, अब इसकी कीमत बढ़कर 480 से 580 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. यानी कीमत में 60 से लेकर 190 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. राज्य में यह मौसमी प्रतिबंध 31 जुलाई तक लागू रहेगा.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मछली विक्रेताओं का कहना है कि उनका कारोबार आमतौर पर अगस्त से मई तक अच्छा चलता है, लेकिन जून और जुलाई में प्रतिबंध के कारण कारोबार में हर साल करीब 40 से 50 फीसदी तक गिरावट आ जाती है. मछली कारोबारियों के मुताबिक, सप्लाई कम होने से खुदरा बाजार में कीमतें बढ़ गई हैं. समुद्री मछली की सप्लाई कम होने से इसकी कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. सबसे ज्यादा असर सीयर फिश और व्हाइट पॉम्फ्रेट जैसी महंगी किस्मों पर पड़ा है.
580 रुपये प्रति किलो हो गई मछली
वहीं, रोजाना खाई जाने वाली मछलियां जैसे सार्डिन और मैकेरल भी अब पहले से महंगी हो गई हैं. मछली विक्रेताओं का कहना है कि बढ़ी कीमतों के कारण कई ग्राहक अब कम मात्रा में मछली खरीद रहे हैं या फिर सस्ती ताजे पानी की मछलियों की ओर रुख कर रहे हैं. मछली कारोबारी जमीयर के अनुसार, सामान्य सीजन में सार्डिन और मैकेरल मछली 200 से 300 रुपये प्रति किलो बिकती थी, लेकिन अब इसकी कीमत बढ़कर 480 से 580 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है.
लागत बढ़ने से उनका मुनाफा कम हो गया
मछली महंगी होने का असर समुद्री भोजन परोसने वाले रेस्टोरेंट पर भी पड़ा है. कारोबारियों का कहना है कि मछली खरीदने की लागत बढ़ने से उनका मुनाफा कम हो गया है. कुछ रेस्टोरेंट ने बढ़ी लागत को खुद वहन किया है, जबकि कुछ ने खाने की कीमतें बढ़ा दी हैं. वहीं, कुछ जगहों पर समुद्री मछली से जुड़े व्यंजनों की उपलब्धता भी अस्थायी रूप से कम कर दी गई है.
लोगों ने मछली की खरदी की कम
समुद्री मछली की बढ़ती कीमतों से रेस्टोरेंट संचालक भी परेशान हैं. बेंगलुरु के कोस्टल कॉर्नर रेस्टोरेंट के मालिक सचिन एम ने कहा कि अगर मछली के दाम इसी तरह बढ़े रहे तो उन्हें मेन्यू की कीमतों में बदलाव करना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि अभी ग्राहक मछली के व्यंजन ऑर्डर कर रहे हैं, लेकिन कीमतें बढ़ने के बाद मांग पर असर पड़ सकता है. रेस्टोरेंट रोजाना की जरूरत के हिसाब से ही ताजी मछली खरीद रहे हैं, ताकि नुकसान कम हो. मछली कारोबारियों का अनुमान है कि समुद्री मछली पर लगा प्रतिबंध हटने तक यानी अगस्त तक कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं.