Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और निषाद समाज पार्टी के प्रमुख संजय निषाद के एक बयान ने राजनीतिक और धार्मिक बहस को हवा दे दी है. मंत्री ने कहा कि अगर मछली बिना लहसुन और प्याज के बनाई जाए तो वह शाकाहारी मानी जा सकती है. सावन के महीने में आए इस बयान ने चर्चा और बढ़ा दी है. संजय निषाद ने अपने तर्क के साथ यह भी कहा कि इस बात पर किसी धर्मगुरु ने उस समय आपत्ति नहीं जताई थी.
बिना लहसुन-प्याज की मछली को बताया शाकाहारी
एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम के दौरान संजय निषाद से मछली खाने और शाकाहार को लेकर सवाल किया गया. जवाब में उन्होंने कहा कि बिना लहसुन-प्याज के मछली खाने पर उसे शाकाहारी माना जा सकता है. उन्होंने अपने पुराने बयान का जिक्र करते हुए कहा कि जब उन्होंने यह बात कही थी, तब किसी ‘महाराज’ ने इसका विरोध या काउंटर नहीं किया था. संजय निषाद ने इसी को अपने तर्क का आधार बनाते हुए कहा कि किसी की ओर से जवाब न आना भी इस बात की ओर संकेत करता है कि उनकी बात सही है. बयान के दौरान वह मुस्कुराते हुए भी नजर आए.
सावन में बयान ने बढ़ाई चर्चा
संजय निषाद का यह बयान ऐसे समय आया है जब सावन के महीने में बड़ी संख्या में लोग खान-पान को लेकर विशेष सावधानी बरतते हैं. कई लोग इस दौरान मांसाहार के साथ-साथ लहसुन और प्याज का भी सेवन नहीं करते. ऐसे में मछली को शाकाहारी बताए जाने वाली टिप्पणी पर बहस होना तय माना जा रहा है. हालांकि, मछली जैविक और खाद्य वर्गीकरण के लिहाज से मांसाहारी भोजन ही मानी जाती है. ऐसे में मंत्री का बयान धार्मिक मान्यताओं और खान-पान को लेकर अलग-अलग धारणाओं के बीच चर्चा का विषय बन गया है.
निषाद समाज और मछली के प्रतीक पर जोर
अपने बयान के दौरान संजय निषाद ने मछली को निषाद समाज से जोड़ते हुए कहा कि यह उनके समाज का प्रतीक है. उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और भारत के संविधान से जुड़े प्रतीकों का भी जिक्र किया और कहा कि मछली, तीर और धनुष निषाद समाज से जुड़े चिन्ह हैं, जिन पर उन्हें गर्व है. संजय निषाद लंबे समय से निषाद समाज के राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं. ऐसे में उनके इस बयान को समाज की पहचान और परंपरा से जोड़कर भी देखा जा रहा है.
NDA को लेकर भी साफ किया रुख
बयान के बीच संजय निषाद ने राजनीतिक गठबंधन को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि वह NDA का हिस्सा बने रहेंगे. साथ ही उन्होंने निषाद समाज के सम्मान और राजनीतिक भागीदारी को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि जो निषाद समाज का स्वागत नहीं करता, वह ‘कसाई’ है. उनके इस बयान के बाद अब राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक प्रतिक्रिया आने की संभावना है. फिलहाल मछली को शाकाहारी बताए जाने वाली टिप्पणी सबसे ज्यादा चर्चा में है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी तेज हो सकती है.