केंद्र सरकार ने गन्ना मूल्य में 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी करते हुए 365 रुपये निर्धारित किया है. चीनी इंडस्ट्री के शीर्ष निकाय इस्मा ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए किसानों के लिए लाभकारी बताया है. इस्मा ने इथेनॉल खरीद और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन की मांग की है. कहा है कि गन्ना भाव बढ़ने से चीनी मिलों पर वित्तीय दबाव बढ़ेगा, इसे दूर करने के लिए इथेनॉल खरीद दाम और चीनी के एमएसपी को बढ़ाना चाहिए. इसके साथ ही E-85, फ्लेक्स फ्यूल वाहन और जीएसटी को तर्कसंगत बनाने के लिए सकारात्मक उम्मीद जताई है.
गन्ने के FRP बढ़ोतरी के फैसले का स्वागत
ISMA के बयान में कहा गया कि सरकार के 2026-27 शुगर सीजन के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) 10 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 365 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने का स्वागत करता है. यह प्रगतिशील और किसान हितैषी कदम, किसानों के कल्याण को मजबूत करने और ग्रामीण समृद्धि को बढ़ाने के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
गन्ने का भुगतान 1.3 लाख करोड़ रुपये पहुंचने का अनुमान
संशोधित FRP से किसानों की आय में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जिससे देश भर के लगभग 5.5 करोड़ गन्ना किसानों को फायदा होगा. अनुमान है कि इस बढ़ोतरी से 15,000 करोड़ रुपये से 20,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी, जिससे आने वाले सीजन में गन्ने का कुल भुगतान लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा. इससे ग्रामीण मांग को जोरदार बढ़ावा मिलेगा और कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां गन्ने की खेती आजीविका का मुख्य साधन हैं.
मिलों पर वित्तीय दबाव हटाने के लिए चीनी के एमएसपी में संशोधन जरूरी
ISMA इस बात पर जोर देता है कि चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) और इथेनॉल खरीद मूल्यों को गन्ने के संशोधित FRP के साथ तालमेल बिठाना कितना जरूरी है. यह तालमेल पूरी मूल्य श्रृंखला किसानों से लेकर चीनी मिलों तक में वित्तीय स्थिरता पक्की करने के लिए जरूरी है. हालांकि FRP में बढ़ोतरी किसानों को सही मायनों में सहारा देती है, लेकिन इससे मिलों के लिए कच्चे माल की लागत भी बढ़ जाती है. चीनी के MSP और इथेनॉल खरीद मूल्यों में आनुपातिक संशोधन से मिलें बिना किसी वित्तीय दबाव के इन बढ़ी हुई लागतों को वहन कर पाएंगी, जिससे परिचालन स्थिरता बना रहेगा और किसानों को गन्ने का समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा.
इथेनॉल कीमतों में इजाफे के साथ आवंटन पर ध्यान दे सरकार
इथेनॉल का कम आवंटन मिलने से स्थापित आसवन क्षमता (distillation capacity) और घरेलू खपत के बीच असंतुलन भी पैदा हुआ है. इसके चलते क्षमताओं का कम इस्तेमाल हो रहा है, जिससे उद्योग के भीतर वित्तीय तनाव बढ़ रहा है और रेवेन्यू सोर्स कमजोर पड़ रहे हैं. फीडस्टॉक संतुलन बहाल करने, क्षमता उपयोग में सुधार करने और निवेशकों और हितधारकों को लंबे समय तक नीतिगत मदद देने के लिए, चीनी और इथेनॉल की कीमतों में समय पर संशोधन के साथ-साथ इथेनॉल का न्यायसंगत आवंटन भी जरूरी है.
इथेनॉल ब्लेंडिंग और फ्लेक्स फ्यूल वाहनों पर प्रक्रिया तेज हो
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्यों के चलते इथेनॉल मिश्रण (blending) को तेज करने का महत्व और भी अधिक स्पष्ट हो गया है. लगभग 2,000 करोड़ लीटर (अनाज-आधारित इथेनॉल सहित) की अनुमानित उत्पादन क्षमता को देखते हुए E20 से आगे बढ़कर E22, E25, E27 और E85/E100 जैसे उच्च मिश्रणों की ओर दूरदर्शी रोडमैप को आगे बढ़ाने का एक मजबूत आधार है. इसके साथ ही फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (FFVs) को तेजी से पेश किया जाना चाहिए और GST को भी तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए, ताकि इसका व्यापक रूप से उपयोग हो सके और इसकी मांग बढ़ सके.
सरकार की ओर से संशोधन किए जाने की उम्मीद
इस तरह का नीतिगत तालमेल चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करेगा, उनकी नकदी (liquidity) में सुधार लाएगा, और यह सुनिश्चित करेगा कि किसानों को उनका बकाया समय पर और कुशलता से मिल सके. ISMA ने विश्वास जताया है कि सरकार इन महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी उसी दूरदर्शिता और संतुलित दृष्टिकोण के साथ विचार करेगी, जैसा कि उसने FRP में संशोधन करते समय दिखाया था.