May-June Dairy Care: मई-जून का महीना पशुपालकों के लिए बेहद अहम होता है, खासकर उन लोगों के लिए जो दुधारू पशु और बकरी पालन करते हैं. यह वह समय है जब आने वाली बरसात से पहले पशुओं की सेहत को मजबूत बनाने की तैयारी करनी चाहिए. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, बारिश के मौसम में बढ़ती नमी और गंदगी के कारण संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जिससे पशु गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं. ऐसे में समय रहते टीकाकरण और देखभाल ही सबसे बड़ा बचाव है.
क्यों जरूरी है इस समय खास देखभाल?
बरसात के मौसम में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं. गीली और गंदी जगहों पर रहने से पशुओं में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर पड़ता है. कई बार स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि पशु की जान तक जा सकती है. इसलिए विशेषज्ञ मई-जून में ही पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने की सलाह देते हैं.
पशु चिकित्सकों की क्या है राय?
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, आज लगभग हर बड़ी बीमारी के लिए प्रभावी टीके उपलब्ध हैं. ये टीके न केवल सस्ते होते हैं, बल्कि पशुओं को लंबे समय तक सुरक्षित भी रखते हैं. सही समय पर टीकाकरण कराने से बीमारी का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है.
मुंहपका-खुरपका (FMD): सबसे तेजी से फैलने वाली बीमारी
मुंहपका-खुरपका, जिसे गांवों में ‘खोरया’ भी कहा जाता है, पशुओं के लिए बेहद खतरनाक बीमारी है. यह तेजी से एक पशु से दूसरे में फैलती है. इसमें मुंह और खुर में छाले पड़ जाते हैं साथ ही बुखार आता है और पशु खाना-पीना छोड़ देता है. इससे बचाव के लिए हर 6 महीने में FMD का टीका लगवाना जरूरी है, खासकर मई-जून में.
गलघोटू (HS): अचानक जानलेवा बन सकती है
गलघोटू बीमारी पशुओं के लिए एक गंभीर और जानलेवा खतरा मानी जाती है, जिसमें पशु को तेज बुखार आना, सांस लेने में परेशानी होना, गले में सूजन और लगातार हांफने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. कई मामलों में यह बीमारी अचानक मौत का कारण भी बन जाती है, जिससे पशुपालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसलिए इस बीमारी से बचाव के लिए समय पर सावधानी बेहद जरूरी है. साल में एक बार HS (हेमरेजिक सेप्टीसीमिया) का टीका जरूर लगवाना चाहिए और इसका सबसे सही समय बरसात शुरू होने से पहले का होता है.
बकरियों के लिए खास खतरा: PPR और ET
बकरी पालन करने वालों के लिए यह समय विशेष सतर्कता बरतने का होता है, क्योंकि इस दौरान कई खतरनाक बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं. पीआर (पीपीआर) एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जिसमें बुखार, दस्त, कमजोरी, नाक और आंख से पानी आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं और यह बहुत तेजी से एक बकरी से दूसरी में फैल जाती है. अगर समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो भारी नुकसान हो सकता है. इसलिए इससे बचाव के लिए साल में एक बार टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है.
वहीं एंटरोटॉक्सिमिया (ET) भी एक खतरनाक बीमारी है, जिसमें पाचन तंत्र प्रभावित होता है और कई बार अचानक मौत का खतरा बन जाता है. इस बीमारी से बचाव के लिए भी नियमित अंतराल पर टीकाकरण कराना जरूरी है, ताकि बकरियों को स्वस्थ और सुरक्षित रखा जा सके.
पशु प्रबंधन के जरूरी टिप्स
- पशुओं को साफ और सूखी जगह पर रखें
- बाड़े की नियमित सफाई करें
- गंदे पानी और कीचड़ से बचाएं
- संतुलित आहार और साफ पानी दें
मई-जून का समय पशुओं के लिए एक तरह से सुरक्षा कवच तैयार करने का मौका है. अगर इस दौरान सही देखभाल और समय पर टीकाकरण कर लिया जाए, तो बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है.