जन्म के आधे घंटे के भीतर जरूर पिलाएं खीस, वरना नवजात बछड़ा हो सकता है कमजोर और बीमार

विभाग का कहना है कि स्वस्थ नवजात बछड़ा ही आगे चलकर अच्छा दूध देने वाला पशु बनता है. अगर शुरुआत से ही उसकी सही देखभाल की जाए, तो भविष्य में किसानों को बेहतर उत्पादन और ज्यादा मुनाफा मिल सकता है. कमजोर पशु न केवल जल्दी बीमार पड़ते हैं, बल्कि उनका विकास भी प्रभावित होता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 6 May, 2026 | 12:54 PM

Newborn calf care tips: भारत में खेती के साथ पशुपालन भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार माना जाता है. खासकर बिहार जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में किसान दूध उत्पादन और पशुपालन पर निर्भर हैं. ऐसे में अगर पशुओं की सही देखभाल की जाए, तो किसानों की आय बढ़ सकती है और पशुधन भी स्वस्थ रहता है.

पशुपालन में सबसे महत्वपूर्ण समय नवजात बछड़े के जन्म के बाद का होता है. अगर शुरुआती दिनों में सही देखभाल नहीं हो, तो बछड़े कमजोर हो सकते हैं और कई बार गंभीर बीमारियों की चपेट में भी आ जाते हैं. यही वजह है कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने किसानों को नवजात बछड़ों की देखभाल के लिए कुछ जरूरी सलाह दी है. इन आसान उपायों को अपनाकर किसान अपने पशुओं को स्वस्थ, मजबूत और भविष्य में बेहतर दूध देने वाला बना सकते हैं.

जन्म के तुरंत बाद खीस पिलाना क्यों जरूरी?

जब किसी बछड़े का जन्म होता है, तो उसके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है. ऐसे में जन्म के तुरंत बाद मां का पहला दूध यानी “खीस” (कोलोस्ट्रम) उसके लिए बेहद जरूरी माना जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक बछड़े को जन्म के आधे घंटे के भीतर खीस जरूर पिलानी चाहिए. खीस में कई जरूरी पोषक तत्व और रोगों से लड़ने वाली शक्ति होती है. इससे बछड़े की इम्यूनिटी मजबूत होती है और संक्रमण का खतरा कम हो जाता है.

अगर समय पर खीस नहीं मिले, तो नवजात पशु कमजोर हो सकता है और बीमारियां जल्दी पकड़ सकती हैं. इसलिए किसानों को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए.

दो महीने तक नियमित दूध देना जरूरी

नवजात बछड़े के विकास में दूध की सबसे बड़ी भूमिका होती है. जन्म के बाद कम से कम दो महीने तक बछड़े को नियमित और साफ दूध पिलाना चाहिए. दूध से उसे शरीर के विकास के लिए जरूरी पोषण मिलता है. इससे उसकी हड्डियां मजबूत होती हैं और शरीर तेजी से बढ़ता है. विशेषज्ञों का कहना है कि दो महीने के बाद धीरे-धीरे ठोस चारा देना शुरू किया जा सकता है, लेकिन शुरुआत में दूध सबसे जरूरी आहार होता है.

साफ-सफाई और सुरक्षित वातावरण बेहद जरूरी

नवजात बछड़े को हमेशा साफ और सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए. जहां गंदगी, कीचड़ या ज्यादा नमी हो, वहां बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है. पशु शेड की नियमित सफाई बहुत जरूरी है. साथ ही गर्मी, ठंड और बारिश से भी बछड़े को बचाना चाहिए. अगर वातावरण साफ और आरामदायक रहेगा, तो बछड़ा जल्दी स्वस्थ होगा और उसका विकास बेहतर तरीके से होगा.

तीसरे सप्ताह में कृमिनाशक देना जरूरी

कई बार पेट के कीड़े नवजात बछड़ों के विकास को प्रभावित करते हैं. इससे पशु कमजोर होने लगते हैं और उनका वजन भी सही तरीके से नहीं बढ़ता. इसीलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि जन्म के तीसरे सप्ताह में बछड़े को कृमिनाशक दवा जरूर दी जाए. इससे पेट के कीड़े खत्म होते हैं और बछड़े का शरीर स्वस्थ रहता है. हालांकि दवा देने से पहले पशु चिकित्सक की सलाह लेना बेहतर माना जाता है.

समय पर टीकाकरण से मिलेगा बीमारियों से बचाव

पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए टीकाकरण बेहद जरूरी होता है. तीन महीने की उम्र पूरी होने पर बछड़े को जरूरी टीके लगवाने चाहिए. टीकाकरण से कई खतरनाक और जानलेवा बीमारियों से बचाव होता है. अगर समय पर टीके न लगें, तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. अक्सर सरकार का पशुपालन विभाग समय-समय पर टीकाकरण अभियान भी चलाता है. किसान अपने नजदीकी पशु अस्पताल या मोबाइल वेटरिनरी सेवा के जरिए यह सुविधा ले सकते हैं.

मजबूत बछड़ा बनेगा किसानों की भविष्य की कमाई

विभाग का कहना है कि स्वस्थ नवजात बछड़ा ही आगे चलकर अच्छा दूध देने वाला पशु बनता है. अगर शुरुआत से ही उसकी सही देखभाल की जाए, तो भविष्य में किसानों को बेहतर उत्पादन और ज्यादा मुनाफा मिल सकता है. कमजोर पशु न केवल जल्दी बीमार पड़ते हैं, बल्कि उनका विकास भी प्रभावित होता है. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

पशुपालकों को जागरूक होना जरूरी

आज के समय में पशुपालन केवल पारंपरिक काम नहीं रह गया है. अब इसमें वैज्ञानिक तरीके अपनाने की जरूरत है. किसानों को समय-समय पर पशु चिकित्सकों से सलाह लेते रहना चाहिए और नई जानकारी हासिल करनी चाहिए. इससे पशुओं की मौत कम होगी और डेयरी व्यवसाय ज्यादा लाभदायक बन सकेगा.

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