किसान आसानी से खरीद सकेंगे ट्रैक्टर और मशीनें, सरकार दे रही ब्याज मुक्त लोन और सब्सिडी

कस्टम हायरिंग योजना के तहत किसानों को ट्रैक्टर और दूसरे कृषि उपकरण खरीदने पर सब्सिडी और ब्याज मुक्त लोन दिया जा रहा है. योजना का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक खेती से जोड़ना है. इससे खेती की लागत कम होगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 6 May, 2026 | 11:30 AM

Custom Hiring Scheme: खेती अब सिर्फ बैल और पारंपरिक औजारों तक सीमित नहीं रही. आधुनिक मशीनों के बिना खेती करना किसानों के लिए मुश्किल होता जा रहा है. लेकिन छोटे और सीमांत किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या महंगे कृषि उपकरण खरीदने की रहती है. ट्रैक्टर, रोटावेटर, हार्वेस्टर और दूसरी मशीनों की कीमत लाखों रुपये में होती है, जिसे हर किसान खरीद नहीं पाता. इसी परेशानी को कम करने के लिए राजस्थान सरकार कस्टम हायरिंग योजना चला रही है. कृषि विभाग के अनुसार यह योजना किसानों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है. इसके जरिए किसान कम खर्च में कृषि मशीनों का उपयोग कर सकते हैं और चाहें तो सब्सिडी के साथ खुद के उपकरण भी खरीद सकते हैं. योजना का उद्देश्य खेती को आधुनिक बनाना और किसानों की आय बढ़ाना है.

किसानों को मिल रही भारी सब्सिडी

कस्टम हायरिंग योजना के तहत सरकार कृषि उपकरण खरीदने  पर अच्छी-खासी सब्सिडी दे रही है. कृषि विभाग के मुताबिक यदि जेएसएस, केवीएस और एफपीओ जैसी संस्थाएं कृषि यंत्र खरीदती हैं तो उन्हें 90 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है. वहीं व्यक्तिगत किसानों को 40 प्रतिशत तक सहायता मिलती है. इस योजना के तहत किसान ट्रैक्टर, थ्रेसर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, एमबी प्लो, लेवलर और कल्टीवेटर जैसे कई जरूरी कृषि उपकरण खरीद सकते हैं. इसके अलावा जुताई, बुवाई, निराई और गुड़ाई से जुड़े दूसरे आधुनिक यंत्र भी उपलब्ध कराए जाते हैं. सरकार का मानना है कि आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से खेती का काम तेजी से होगा, लागत कम होगी और किसानों को ज्यादा उत्पादन मिलेगा. यही वजह है कि गांव-गांव किसानों को इस योजना के बारे में जानकारी दी जा रही है.

30 लाख रुपये तक खरीद सकते हैं मशीनें

योजना की सबसे खास बात यह है कि किसान 30 लाख रुपये तक के कृषि उपकरण खरीद सकते हैं. इसके लिए किसानों को बैंक से लोन लेना जरूरी होता है. यदि किसान का लोन मंजूर  हो जाता है तो सरकार की ओर से मिलने वाली 40 प्रतिशत सब्सिडी की राशि चार साल तक कार्यालय में जमा रहती है. यदि किसान इस दौरान कस्टम हायरिंग सेंटर का सही तरीके से संचालन करता है तो बाद में यह राशि उसके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है. सरकार का उद्देश्य सिर्फ मशीनें उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गांवों में ऐसे केंद्र विकसित करना है जहां किसान किराए पर आसानी से आधुनिक उपकरण ले सकें. इससे छोटे किसान भी कम खर्च में बड़ी मशीनों का फायदा उठा पाएंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे खेती का समय बचेगा और मजदूरी का खर्च भी कम होगा.

किसानों को मिल रहा ब्याज मुक्त लोन

कृषि विभाग के अनुसार योजना के तहत किसानों को ब्याज मुक्त लोन  की सुविधा भी दी जा रही है. यानी किसान मशीन खरीदने के लिए बैंक से ऋण ले सकते हैं और उन पर अतिरिक्त ब्याज का बोझ नहीं पड़ेगा. ये सुविधा खासतौर पर उन किसानों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं लेकिन आधुनिक खेती करना चाहते हैं. सरकार किसानों को सिर्फ आर्थिक सहायता ही नहीं दे रही, बल्कि उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी भी दी जा रही है. फील्ड अधिकारी गांवों में जाकर किसानों को योजना के फायदे समझा रहे हैं. साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए किसानों को मशीनों के सही उपयोग की जानकारी दी जा रही है.

ऐसे करें योजना के लिए आवेदन

कृषि विभाग के अनुसार किसान ऑनलाइन आवेदन करके इस योजना का लाभ ले सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय के पोर्टल chc.mpdage.org पर जाना होगा. इसके बाद किसानों को Custom Hiring Centre (CHC) विकल्प चुनकर अपना पंजीकरण करना होगा. आवेदन के दौरान आधार नंबर, बैंक पासबुक, जमीन के दस्तावेज और पहचान पत्र अपलोड करना जरूरी होगा. आवेदन पूरा होने के बाद लाभार्थियों का चयन लॉटरी प्रक्रिया के जरिए किया जाता है. चयन होने पर किसानों को योजना का लाभ दिया जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि कस्टम हायरिंग योजना छोटे किसानों के लिए नई उम्मीद बन रही है. इससे खेती आधुनिक होने के साथ-साथ किसानों की लागत घटेगी और उनकी आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.

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Published: 6 May, 2026 | 11:28 AM
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