Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में इस बार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से 15 फीसदी तक नुकसान के बावजूद फल की बंपर पैदावार की उम्मीद जताई गई है. प्रमुख उत्पादक जिला कांगड़ा में फसल सीजन 2026-27 के लिए 55,184 मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान लगाया गया है. हालांकि, यह सामान्य उत्पादन 61,248 मीट्रिक टन से कम है, लेकिन पिछले दो सालों की तुलना में ज्यादा है. जबकि बेमौसम बारिश और आंधी का बागवानी फसलों पर असर पड़ा है. इसके बावजूद 55,184 मीट्रिक टन उत्पादन की उम्मीद किसानों के लिए राहतभरी खबर है. खास बात यह है कि सबसे अधिक आम का उत्पादन होगा.
पिछले आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में 52,655 मीट्रिक टन और 2024-25 में 52,581 मीट्रिक टन फल उत्पादन हुआ था. जिले में करीब 42,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी की जाती है, जिसमें आम सबसे प्रमुख फसल है और यह लगभग 22,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है. इसके अलावा लीची का रकबा 3,444 हेक्टेयर, संतरा/किन्नू का रकबा 5,787 हेक्टेयर, बीड लाइम का रकबा3,573 हेक्टेयर, माल्टा/मोसंबी का रकबा 1,009 हेक्टेयर और गलगल का रकबा 679 हेक्टेयर है.
कांगड़ा जिले में आम का कुल रकबा
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कांगड़ा के निचले इलाकों में आम की खेती सबसे ज्यादा होती है. इंदौरा करीब 6,840 हेक्टेयर के साथ सबसे आगे है. इसके बाद नूरपुर में 3,854 हेक्टेयर में आम का बाग है. प्रागपुर, देहरा और नगरोटा सूरियां में भी अनुकूल मौसम और मिट्टी की वजह से आम की अच्छी खेती होती है. कांगड़ा के उप निदेशक (बागवानी) अलक्ष पठानिया के अनुसार, आम इस साल भी सबसे ज्यादा उत्पादन देने वाली फसल रहेगी. 2026-27 में आम का उत्पादन करीब 24,799 मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो अनुकूल मौसम रहने पर पिछले साल से लगभग 1,000 मीट्रिक टन ज्यादा हो सकता है.
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आम की कितनी होगी पैदावार
कांगड़ा जिले में आम का उत्पादन 2024-25 में 22,350 मीट्रिक टन और 2025-26 में 23,720 मीट्रिक टन रहा. हालांकि, इस साल फूल आने और फल बनने के समय खराब मौसम के कारण आम की फसल को करीब 15 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका है. खट्टे फलों (साइट्रस) की बात करें तो इस बार मिले-जुले नतीजे मिलने की उम्मीद है. किन्नू का उत्पादन लगभग 7,623 मीट्रिक टन और संतरे का 4,425 मीट्रिक टन रहने का अनुमान है.
लीची का उत्पादन 4,321 टन रहने का अनुमान
वहीं लीची का उत्पादन करीब 4,321 मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो इसकी सामान्य क्षमता (करीब 4,995 मीट्रिक टन) से थोड़ा कम है. पिछले कुछ वर्षों में लीची का उत्पादन लगभग स्थिर रहा है. 2024-25 में 4,375 मीट्रिक टन और 2025-26 में करीब 4,298 मीट्रिक टन दर्ज किया गया था. अधिकारियों के अनुसार, इस बार मौसम में अनियमित बदलाव और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण परागण और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है, इसलिए अलग-अलग फसलों में 5 से 15 प्रतिशत तक नुकसान को ध्यान में रखकर उत्पादन का अनुमान लगाया गया है.
उत्पादन अनुमान से भी ज्यादा हो सकता है
इन चुनौतियों के बावजूद, पिछले दो वर्षों की तुलना में उत्पादन में बढ़ोतरी का अनुमान कांगड़ा के बागवानी क्षेत्र की मजबूती को दिखाता है. बड़े पैमाने पर खेती और बेहतर बाग प्रबंधन तकनीकों ने इसमें अहम भूमिका निभाई है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले महीनों में मौसम अनुकूल रहा, तो उत्पादन अनुमान से भी ज्यादा हो सकता है.