Tobacco Price Fall: आंध्र प्रदेश के नेल्लोर क्षेत्र में इस सीजन तंबाकू किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. खेती की लागत बढ़ गई है, लेकिन बाजार में दाम स्थिर हैं, जिससे किसानों को अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, तंबाकू एक प्रमुख नकदी फसल है, जिसकी खेती अंतरराष्ट्रीय मांग के आधार पर तय होती है और उसी हिसाब से खरीद की जाती है. पिछले तीन सालों में अच्छे दाम मिलने से किसानों को फायदा हुआ था, इसलिए तंबाकू बोर्ड द्वारा उत्पादन बढ़ाने की अनुमति मिलने के बाद किसानों ने इसकी खेती ज्यादा कर दी, जिससे उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी हुई.
अधिकारियों के अनुसार तंबाकू उत्पादों पर बढ़े जीएसटी और पश्चिम एशिया के हालात का असर कीमतों पर पड़ा है. उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद बाजार में दाम लगभग स्थिर बने हुए हैं. अधिकारियों ने ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा कि 2025-26 सीजन के लिए करीब 1,400 किसानों ने कलिगिरी टोबैको ऑक्शन प्लेटफॉर्म पर लगभग 1,200 बार्न (भट्ठियां) रजिस्टर कराए हैं. तंबाकू बोर्ड ने 1400 लाख किलो उत्पादन की अनुमति दी थी, लेकिन असल उत्पादन करीब 2400 लाख किलो तक पहुंच गया है. इतनी ज्यादा पैदावार के बावजूद नीलामी शुरू होने से अब तक कीमतें लगभग 250 रुपये प्रति किलो के आसपास ही बनी हुई हैं.
348 रुपये प्रति किलो है तंबाकू का रेट
अधिकारियों ने कहा कि पिछले सीजन में तंबाकू के दाम ज्यादा थे. 2024-25 में शुरुआत में कीमत करीब 280 रुपये प्रति किलो थी और खरीद के अंत तक A-ग्रेड तंबाकू 348 रुपये प्रति किलो तक बिक गया था. लेकिन इस बार दाम कम रहने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, खासकर जब उनकी लागत बढ़ रही है. किसानों का कहना है कि जमीन का किराया, बार्न (भट्ठी) का किराया, ईंधन लकड़ी और पत्तों की प्रोसेसिंग में लगने वाली मजदूरी जैसी लागत काफी बढ़ गई है. कुल मिलाकर प्रति बार्न खर्च लगभग 20 फीसदी तक बढ़ गया है, जिससे उनका मुनाफा कम हो रहा है.
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किसानों को बाजार पर नजर रखने की सलाह
किसानों ने तंबाकू बोर्ड से मांग की है कि वह इस मुद्दे को सरकार के सामने उठाए और बेहतर दाम दिलाने की कोशिश करे. अधिकारियों के अनुसार, वैश्विक मांग कमजोर होने के कारण कंपनियां भी खरीदारी में सावधानी बरत रही हैं. कालीगिरी के ऑक्शन सुपरिंटेंडेंट जी. राजशेखर ने कहा कि मांग कमजोर होने के कारण कंपनियां सावधानी से खरीदारी कर रही हैं. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे बाजार की स्थिति पर नजर रखें और उसी हिसाब से अपने तंबाकू के बंडल (गांठें) नीलामी में लाएं, ताकि उन्हें बेहतर दाम मिल सकें. अधिकारियों का कहना है कि बढ़ती लागत, कम मांग और अनिश्चितता के कारण किसान इस समय तनाव में हैं.