India retail inflation: देश में महंगाई ने मार्च महीने में हल्का सा जोर पकड़ा है. खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.4 फीसदी पर पहुंच गई, जो पिछले 13 महीनों में सबसे ज्यादा है. फरवरी में यह 3.2 फीसदी थी. यानी महंगाई में बढ़ोतरी तो हुई है, लेकिन अभी यह बहुत ज्यादा चिंता की बात नहीं मानी जा रही. इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण घरेलू गैस (LPG) और कुछ सब्जियों के दाम बढ़ना है.
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, महंगाई में यह बढ़त ऐसे समय पर आई है जब वैश्विक हालात, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव, ऊर्जा की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं. इसका असर अब धीरे-धीरे भारत में भी दिखने लगा है.
खाने-पीने की चीजों में क्या हुआ बदलाव
अगर खाने-पीने की चीजों की बात करें, तो मार्च में खाद्य महंगाई बढ़कर 3.87 फीसदी हो गई, जो फरवरी में 3.47 फीसदी थी. यानी खाने की चीजें थोड़ी महंगी जरूर हुई हैं, लेकिन हालात पूरी तरह खराब नहीं हैं.
कुछ चीजों के दाम बढ़े हैं, जैसे टमाटर, फूलगोभी और नारियल (खोपरा). वहीं सोना-चांदी के गहनों की कीमतें भी बढ़ी हैं. लेकिन राहत की बात यह है कि कई जरूरी चीजें सस्ती भी हुई हैं. प्याज, आलू, लहसुन, अरहर दाल और चना जैसी चीजों के दाम में गिरावट आई है, जिससे आम लोगों को थोड़ी राहत मिली है. यानी कुल मिलाकर बाजार में एक तरह का संतुलन बना हुआ है, कुछ चीजें महंगी हैं तो कुछ सस्ती भी हो रही हैं.

खाने-पीने की चीजें और LPG हुई महंगी, मार्च में महंगाई 3.4 प्रतिशत पर पहुंची.
गैस और ईंधन का असर दिखने लगा
महंगाई बढ़ने की एक और बड़ी वजह ऊर्जा से जुड़ी चीजें हैं. बिजली, गैस और अन्य ईंधन से जुड़े खर्च में भी हल्की बढ़ोतरी देखी गई है. मार्च में यह 1.65 फीसदी रहा, जो फरवरी में 1.52 फीसदी था.
असल में, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो रहा है, जिसका असर भारत जैसे देश पर पड़ता है, जो ऊर्जा के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है.
हर राज्य में एक जैसी नहीं है महंगाई
देश के अलग-अलग राज्यों में महंगाई की तस्वीर भी अलग-अलग है. तेलंगाना में महंगाई सबसे ज्यादा 5.83 फीसदी रही, जबकि मिजोरम में यह सिर्फ 0.66 फीसदी दर्ज की गई. इसका मतलब यह है कि हर राज्य में स्थानीय कारणों के चलते कीमतों में फर्क देखने को मिल रहा है.
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं
बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि अभी स्थिति काबू में है, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत है. डीबीएस बैंक की अर्थशास्त्री राधिका राव के मुताबिक, मार्च के आंकड़े बताते हैं कि महंगाई पर दबाव बनना शुरू हो गया है, खासकर ऊर्जा की कीमतों की वजह से. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि खाने-पीने की चीजों के दाम अभी ज्यादा नहीं बढ़े हैं.
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के विक्रांत चतुर्वेदी का कहना है कि ईंधन और ऊर्जा की कीमतें आगे महंगाई को और बढ़ा सकती हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति संतुलित है.
मानसून का रहेगा बड़ा रोल
आने वाले समय में महंगाई किस दिशा में जाएगी, यह काफी हद तक मानसून पर निर्भर करेगा. अगर इस साल अच्छी बारिश होती है, तो फसलों का उत्पादन बढ़ेगा और खाने-पीने की चीजों के दाम नियंत्रित रह सकते हैं. लेकिन अगर मानसून कमजोर रहता है, तो महंगाई बढ़ सकती है.
इंडिया रेटिंग्स के अनुसार, अप्रैल में महंगाई करीब 3.8 फीसदी तक पहुंच सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि अप्रैल से जून के बीच महंगाई RBI के 4 फीसदी के अनुमान से ऊपर जा सकती है.
RBI क्या करेगा आगे
जहां तक रिजर्व बैंक की बात है, तो फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद कम है. कोटक महिंद्रा बैंक की अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज के अनुसार, RBI अभी इंतजार करने की रणनीति अपनाएगा. वह यह देखेगा कि महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन कैसे बनता है.
सीधी भाषा में कहें तो मार्च में महंगाई थोड़ी बढ़ी जरूर है, लेकिन हालात अभी नियंत्रण में हैं. आने वाले महीनों में ऊर्जा की कीमतें और मानसून की स्थिति तय करेगी कि महंगाई आगे क्या रुख लेती है. फिलहाल आम लोगों के लिए राहत की बात यही है कि जरूरी चीजों की कीमतों में बहुत ज्यादा उछाल नहीं आया है.