नकली कीटनाशकों पर सरकार ने कसा शिकंजा, किसानों के लिए कृषि विभाग की एडवाइजरी

Pesticide Safety: बिहार कृषि विभाग ने नकली और नॉन रजिस्टर्ड कीटनाशकों की बिक्री पर सख्ती बढ़ा दी है. विभाग ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और विक्रेताओं को केवल रजिस्टर्ड उत्पाद बेचने के निर्देश दिए हैं. किसानों से भी अपील की गई है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही कीटनाशक खरीदें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना तुरंत विभाग को दें.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 30 May, 2026 | 02:46 PM

Fake Pesticides: कृषि क्षेत्र में बढ़ती तकनीक और ऑनलाइन खरीदारी के दौर में किसानों के सामने एक नई चुनौती उभरकर सामने आई है, ‘नकली और नॉन रजिस्टर्ड कीटनाशकों’ की बिक्री. ऐसे उत्पाद न केवल किसानों की मेहनत और फसल को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बन सकते हैं. इसी खतरे को देखते हुए बिहार कृषि विभाग ने नकली और अपंजीकृत कीटनाशकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है और किसानों से केवल पंजीकृत उत्पाद ही खरीदने की अपील की है.

क्यों खतरनाक हैं अपंजीकृत कीटनाशक?

बिहार कृषि विभाग के अनुसार, बाजार में बिकने वाले अपंजीकृत या संदिग्ध कीटनाशकों का उपयोग कई तरह की समस्याओं को जन्म दे सकता है. इनका सीधा असर फसलों की क्वालिटी और उत्पादन पर पड़ता है. कई बार किसान बेहतर पैदावार की उम्मीद में ऐसे उत्पाद खरीद लेते हैं, लेकिन परिणाम उल्टा होता है और फसल को नुकसान उठाना पड़ता है. इसके अलावा, इन उत्पादों के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो सकती है, जिससे भविष्य की खेती पर भी असर पड़ता है.

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी सख्त निगरानी

ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन को देखते हुए कृषि विभाग ने ई-कॉमर्स कंपनियों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया चैनलों और वीडियो प्लेटफॉर्म्स को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे केवल रजिस्टर्ड कीटनाशकों के प्रचार और बिक्री की अनुमति दें. सरकार का मानना है कि इंटरनेट के माध्यम से नकली उत्पादों की बिक्री को रोकना आवश्यक है, ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण और प्रमाणित कृषि उत्पाद उपलब्ध हो सकें. इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निगरानी भी बढ़ाई जा रही है.

किसानों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे कीटनाशक खरीदते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखें.

  • आजकल ऑनलाइन और बाजार में नकली व बिना मंजूरी वाले कीटनाशक भी बेचे जा रहे हैं.
  • ऐसे कीटनाशक फसल को फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान पहुंचा सकते हैं.
  • इनके इस्तेमाल से किसानों की मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद हो सकते हैं.
  • नकली उत्पाद लोगों की सेहत और पर्यावरण के लिए भी खतरा बन सकते हैं.
  • इसी वजह से बिहार कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है.
  • विभाग ने कहा है कि किसान सिर्फ पंजीकृत (रजिस्टर्ड) और असली कीटनाशक ही खरीदें.
  • खरीदारी करते समय उत्पाद का लेबल, पंजीकरण नंबर और बिल जरूर जांचें और संभालकर रखें.

शिकायत मिलने पर होगी कानूनी कार्रवाई

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगल किसी कंपनी, वितरक या विक्रेता द्वारा डिजिटल माध्यमों से नॉन रजिस्टर्ड कीटनाशकों की बिक्री या आपूर्ति किए जाने की जानकारी मिलती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थाओं पर कीटनाशक अधिनियम, 1968 और उससे जुड़े नियमों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. सरकार का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और किसानों के हितों की रक्षा करना है.

सुरक्षित खेती के लिए जागरूकता जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि नकली कृषि उत्पादों पर रोक लगाने के लिए सिर्फ सरकारी कार्रवाई ही काफी नहीं है, बल्कि किसानों का जागरूक होना भी बेहद जरूरी है. किसानों को हमेशा प्रमाणित दुकानों से ही कृषि उत्पाद खरीदने चाहिए और खरीदारी से पहले उनकी गुणवत्ता व पंजीकरण की जांच करनी चाहिए. यदि कोई उत्पाद संदिग्ध लगे, तो इसकी जानकारी संबंधित विभाग को देनी चाहिए.

कृषि विभाग ने किसानों से आग्रह किया है कि वे केवल रजिस्टर्ड कीटनाशकों का उपयोग करें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद की सूचना तुरंत विभाग को दें. इससे न केवल उनकी फसल सुरक्षित रहेगी, बल्कि पर्यावरण और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की भी रक्षा होगी.

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