नेट हाउस फार्मिंग से हर सीजन 4 लाख मुनाफा ले रहे शिवेंद्र, ऑफ सीजन फसलों ने बनाया करोड़पति

Young Farmer Success Story: शिवेंद्र सिंह सेंगर ने नौकरी की बजाय खेती में नवाचार करने की ठानी है और उनकी मेहनत रंग लाई है. शिवेंद्र बताते हैं कि वर्ष 2023 में उन्होंने 6 एकड़ जमीन खरीदी और उस पर ऑफ सीजन सब्जियों की खेती से मोटा मुनाफा कमा रहे हैं.

रिजवान नूर खान
नई दिल्ली | Updated On: 4 Jun, 2026 | 06:58 PM

कभी आईटी कंपनी में ऊंचे पद कार्यरत रहे और सालाना मोटे पैकेज पर नौकरी करने वाले शिवेंद्र सिंह सेंगर ने खेती में उतरकर नई पहचान बना ली है. वह आधुनिक खेती के क्षेत्र में नई पहचान बना रहे हैं. कोविड-19 के दौर में पुणे से जबलपुर लौटे शिवेंद्र ने कॉर्पोरेट दुनिया को अलविदा कहकर खेती में भविष्य तलाशने का निर्णय लिया. आज वे सिहोरा क्षेत्र के ग्राम आश्रम में नेट हाउस फार्मिंग के माध्यम से न केवल अच्छी आय कर रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं. वह नेट हाउस में ऑफ सीजन फसलें लगाकर अधिक कीमत हासिल कर पा रहे हैं.

मध्य प्रदेश के कृषि विभाग के अनुसार शिवेंद्र सिंह सेंगर ने नौकरी की बजाय खेती में नवाचार करने की ठानी है और उनकी मेहनत रंग लाई है. प्रगतिशील सफल किसान शिवेंद्र बताते हैं कि वर्ष 2023 में उन्होंने सिहोरा के पास ग्राम आश्रम में लगभग 6 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से 6 एकड़ भूमि खरीदी. शुरुआत में उन्होंने डेयरी फार्मिंग और पारंपरिक खेती में हाथ आजमाया, लेकिन जल्द ही आधुनिक तकनीक आधारित खेती की ओर रूख कर लिया.

ऑफ सीजन फसलों से हर सीजन 4 लाख का मुनाफा

वर्तमान में वे एक एकड़ क्षेत्र में स्थापित नेट हाउस से सालभर में तीन ऑफ सीजन फसलें ले रहे हैं, जिससे प्रत्येक सीजन में उन्हें 3 से 4 लाख रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है. यानी साल में 12 लाख मुनाफा हो रहा है. इस तरह वह करोड़पति किसान बन चुके हैं. उन्होंने बताया कि बाकी पांच एकड़ जमीन में वे मौसमी सब्जियों की खेती करते हैं. शिवेंद्र बताते हैं कि पुणे में नौकरी के दौरान उन्होंने देखा कि पुणे के किसान नेट हाउस तकनीक का उपयोग कर मौसम के विपरीत भी फसलें उगा रहे हैं. इसी अनुभव ने उन्हें आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया.

उद्यान विभाग से मिली 14 लाख की सब्सिडी

जबलपुर आने के बाद शिवेंद्र ने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया और नेट हाउस फार्मिंग की तकनीकी जानकारी के साथ-साथ उपलब्ध शासकीय योजनाओं की जानकारी प्राप्त की. शिवेंद्र ने एक एकड़ क्षेत्र में लगभग 28 लाख 50 हजार रुपये की लागत से नेट हाउस लगाया. इस परियोजना में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की ओर से एमआईडीएच (मिशन फॉर इंटिग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हार्टिकल्चर) योजना के अंतर्गत उन्हें 14 लाख 25 हजार रुपये की सब्सिडी मिली. इसके अतिरिक्त पहले वर्ष बीज एवं अन्य कृषि कार्यों के लिए 3 लाख रुपये की सहायता भी मिली.

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शिमला मिर्च, गेंदा और खीरे की हाईब्रिड किस्में उगाईं

प्रगतिशील किसान शिवेंद्र बताते हैं कि ऑफ सीजनेबल फसलों के लिए उपयोग होने वाले हाइब्रिड बीज सामान्य बीजों की तुलना में लगभग तीन गुना महंगे होते हैं. जहां सामान्य फसल का बीज सस्ता होता है, वहीं हाइब्रिड बीज की कीमत 2 से 6 रुपये या उससे अधिक होती है. हालांकि इन बीजों से उत्पादन और गुणवत्ता बेहतर मिलने के कारण किसानों को अच्छा लाभ होता है.  नेट हाउस में उन्होंने सबसे पहले कैप्सिकम (शिमला मिर्च) की खेती की. इसके बाद गेंदा फूल और खीरे की फसल ली. वर्तमान में उनके नेट हाउस में खीरे की उन्नत हाइब्रिड किस्म की खेती की जा रही है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग है.

क्षेत्र के किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

शिवेंद्र सिंह का कहना है कि जब उन्होंने नेट हाउस फार्मिंग शुरू की थी, तब जिले में इस तकनीक को अपनाने वाले किसान नहीं थे. उनकी सफलता को देखकर अब जिले में तीन से चार अन्य किसानों ने भी नेट हाउस फार्मिंग शुरू की है और उन्हें भी बेहतर आय प्राप्त हो रही है.  आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं का लाभ और नवाचार की सोच के साथ शिवेंद्र सिंह सेंगर ने यह साबित कर दिया है कि यदि खेती को वैज्ञानिक तरीके से किया जाए तो यह किसी भी उच्च वेतन वाली नौकरी से कम लाभकारी नहीं है। उनकी सफलता की कहानी आज युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है.

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Published: 4 Jun, 2026 | 06:55 PM

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