सेवानिवृत्ति के बाद नई राह: 75 वर्षीय किसान ने की पारंपरिक तरीके से खेती, लिखी सफलता की कहानी

75 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक आज कई लोगों के लिए मिसाल बन गए हैं. 40 वर्ष तक विद्यार्थियों को पढ़ने के बाद उन्होंने खेती को अपनी आजीविका का साधन बना लिया है. उनकी उम्र भले ही ढल गई है, लेकिन उनमें जोश अब भी युवाओं जैसा ही है.

किसान इंडिया डेस्क
नोएडा | Updated On: 29 Mar, 2026 | 07:30 PM

Retired Teacher’s Inspirational Story: रिटायरमेंट के बाद ज्यादातर लोग आराम की जिंदगी जीना पसंद करते हैं लेकिन वही एक 75 वैसी है रिटायर्ड टीचर है. जिन्होंने आराम की जिंदगी को ठुकराकर निरंतर कार्यरत रहने की ठान ली है. अंग्रेजी में एक कहावत है “एज जस्ट ए नंबर”( Age Just a Number) इसी कहावत को उन्होंने सरकार किया है. उनकी उम्र ढल रही है, लेकिन जोश अब भी युवाओं जैसा ही है.

उन्होंने कहा कि वे शुरुआत में थोड़ी जमीन पर लहसुन की खेती करते थे लेकिन मेहनत और लगन से आज इसकी खेती बड़े पैमाने पर कर रहे हैं. उनकी खेती की खास बात यह है कि वे पारंपरिक खेती के तरीके अपना रहे हैं और रासायनिक खादों से पूरी तरह दूरी बनाए हुए हैं. वे बताते हैं कि पैदावार अच्छी होने पर उपज का कुछ हिस्सा अपनी दुकान पर बेचते हैं और बाकी घरेलू उपयोग के लिए रखते हैं.

स्थानीय बीजों का चुनाव

वे आगे बताते हैं कि उन्होंने खेती में लोकल लहसुन की किस्म और वही पुरानी ‘रोपच’ विधि को अपनाया है. इस तकनीक से उगाए गए लहसुन का स्वाद और गुणवत्ता दोनों ही उत्कृष्ट मानी जाती हैं. शुरुआत में उन्होंने थोड़ी जमीन पर खेती की, लेकिन अब अनुभव के बाद बड़े पैमाने पर कर रहे हैं.

गोबर की खाद

मीडिया  रिपोर्ट्स के अनुसार किसान बताते हैं कि वे केवल गोबर की खाद का इस्तेमाल करते हैं. उनका मानना है कि रासायनिक खाद से फसल जल्दी तो तैयार हो जाती है, लेकिन टिकाऊ नहीं होती. वही प्राकृतिक तरीके से भले ही पैदावार थोड़ी देर से होती है, लेकिन गुणवत्ता बेहतर और ज्यादा दिनों तक टिकने वाली होती है.

खुद की दुकान पर बेचते है

वे बताते हैं कि जब फसल की पैदावार अच्छी होती है, तो उसका कुछ हिस्सा अपनी दुकान पर बेचते हैं और बाकी घरेलू उपयोग के लिए रखते हैं. उनकी अपनी खुद की दुकान होने के कारण उपज को सीधे तौर पर बाज़ार में बेचकर लाभ प्राप्त करते हैं.

नई तकनीक सीखने के लिए तत्पर

उन्होंने बताया कि वे पेशे से शिक्षक थे और 40 साल 16 दिन विद्यार्थियों को पढ़ने के बाद, अब खुद को कृषि के लिए समर्पित कर दिए हैं. वे आगे बताते हैं कि अगर भविष्य में कोई नई तकनीक या तरीका सीखने को मिलेगा तो उसे अपनाने से पीछे नहीं हटेंगे.

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Published: 29 Mar, 2026 | 02:22 PM
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