Animal Husbandry: उत्तर प्रदेश सरकार अब बेसहारा गायों की देखभाल को लेकर सख्त हो गई है. सरकार ने साफ कहा है कि सभी गोआश्रय स्थलों पर गायों के लिए भरपूर भूसा और हरा चारा होना चाहिए, ताकि उन्हें खाने-पीने में कोई परेशानी न हो. इसी को सुनिश्चित करने के लिए 1 मई से 15 मई 2026 तक एक खास जांच अभियान चलाया जाएगा. इस दौरान अधिकारी अलग-अलग गोशालाओं का दौरा करेंगे और व्यवस्था की जांच करेंगे. सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि अगर कहीं लापरवाही मिली, तो उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है.
हर गौशाला में अनिवार्य होगा ‘भूसा बैंक’
उत्तर प्रदेश के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने साफ निर्देश दिए हैं कि हर गौशाला में कम से कम 10 कुन्तल भूसा स्टॉक में रखना जरूरी होगा. इसका मकसद ये है कि किसी भी हालात में गायों को खाने की कमी न हो और उनका सही से पालन हो सके. सरकार ने ये भी कहा है कि भूसा बाहर से महंगे में खरीदने के बजाय स्थानीय किसानों से ही लिया जाए. अभी गेहूं की कटाई का समय चल रहा है, इसलिए इस दौरान किसानों से सस्ते दामों पर भूसा आसानी से मिल सकता है. इससे गौशालाओं को भी फायदा होगा और किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी.
कोई अधिकारी नहीं ले सकेगा छुट्टी
इस अभियान को पूरी सख्ती से लागू करने के लिए सरकार ने साफ निर्देश दिए हैं कि 1 से 15 मई के बीच किसी भी अधिकारी की छुट्टी नहीं मिलेगी. इस दौरान बड़े से लेकर छोटे स्तर तक के अधिकारी खुद गौशालाओं में जाकर हालात देखेंगे और व्यवस्था का जायजा लेंगे, ताकि कहीं भी लापरवाही न हो. साथ ही, पूरे प्रदेश के 18 मंडलों में अलग-अलग नोडल अधिकारी भी तैनात किए गए हैं, जो लगातार निगरानी रखेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि सभी जगह नियमों का सही तरीके से पालन हो रहा है.
गर्मी से बचाव और जरूरी सुविधाओं पर फोकस
भीषण गर्मी को देखते हुए विशेष निर्देश दिए गए हैं कि गोवंश को धूप और लू से बचाने के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं. हर गौशाला में साफ पानी, हरा चारा, चोकर, दवाएं और बिजली जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. सबसे अहम बात किसी भी हाल में कोई भी गोवंश भूखा या प्यासा नहीं रहना चाहिए.
आत्मनिर्भर बनेंगी गौशालाएं
सरकार अब गौशालाओं को सिर्फ गायों के रहने की जगह नहीं, बल्कि कमाई का जरिया बनाने पर भी ध्यान दे रही है. इसके लिए प्लान है कि गौशालाओं में बायोगैस प्लांट लगाए जाएं, गोबर से वर्मी कम्पोस्ट (खाद) बनाई जाए और अन्य गौ-उत्पाद तैयार किए जाएं. इससे आसपास के लोगों को काम मिलेगा और अतिरिक्त आय भी हो सकेगी. यानी अब गौशालाएं सिर्फ खर्च का बोझ नहीं रहेंगी, बल्कि खुद कमाकर चलने वाली (आत्मनिर्भर) इकाइयों में बदलने की कोशिश की जा रही है, जिससे गांवों में रोजगार भी बढ़ेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
सरकार ने साफ चेतावनी दी है कि भूसा जमा करने के अभियान में अगर किसी अधिकारी ने लापरवाही की, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी.खासतौर पर सोनभद्र, इटावा, कन्नौज, लखनऊ और कासगंज जैसे जिलों को काम में तेजी लाने के लिए खास तौर पर कहा गया है. सरकार का साफ कहना है कि इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
लक्ष्य और प्रगति का आंकड़ा
प्रदेश में भूसा जमा करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है कुल 60.99 लाख कुन्तल. इसमें से अब तक करीब 20.32 लाख कुन्तल भूसा इकट्ठा भी किया जा चुका है, यानी काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. इस अभियान में हरदोई, महराजगंज, सहारनपुर, मऊ, देवरिया, गोरखपुर, हमीरपुर, वाराणसी, बदायूं और बांदा जैसे जिले सबसे आगे चल रहे हैं. सरकार का जोर सिर्फ चारा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि गोवंश के जरिए प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा देने पर है. साथ ही, यह भी जरूरी किया गया है कि पशुओं को अच्छी क्वालिटी की दवाइयां और वैक्सीन मिलें, ताकि वे स्वस्थ रहें.
सरकार का मानना है कि अगर पशुओं को सही पोषण मिलेगा, तो दूध उत्पादन बढ़ेगा, नस्ल में सुधार होगा और कृत्रिम गर्भाधान जैसे कार्यक्रम भी बेहतर तरीके से सफल हो पाएंगे.