Clean Milk Production: पशुपालन निदेशालय बिहार और डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग बिहार ने स्वच्छ दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों और पशुपालकों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं. विभाग का कहना है कि साफ-सुथरे तरीके से दूध उत्पादन करने से न केवल दूध की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि इससे पशुपालकों की आय में भी बढ़ोतरी हो सकती है.
स्वच्छ वातावरण से शुरू होता है बेहतर दूध उत्पादन
विभाग के अनुसार, दूध निकालने का स्थान साफ, शांत और हवादार होना बेहद जरूरी है. यदि वातावरण गंदा या धूलभरा होगा तो दूध में बैक्टीरिया के मिलने की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे दूध निकालने की जगह को रोज साफ रखें. इसके अलावा, दूध निकालने से 15 से 20 मिनट पहले गोबर को हटा देना चाहिए ताकि अमोनिया जैसी बदबू दूध में न मिले. यह छोटी-सी सावधानी दूध की गुणवत्ता को काफी हद तक सुधार सकती है.
बर्तनों की सफाई पर विशेष ध्यान जरूरी
स्वच्छ दूध उत्पादन में बर्तनों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण होती है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि हमेशा स्टेनलेस स्टील के बर्तनों का ही उपयोग करना चाहिए. छोटे मुंह वाले बर्तन ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि इनमें बाहरी गंदगी कम प्रवेश करती है. मिट्टी और प्लास्टिक के बर्तनों में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे दूध जल्दी खराब हो सकता है. इसलिए इनका उपयोग करने से बचना चाहिए.

बिहार सरकार ने बताए स्वच्छ दूध उत्पादन के जरूरी उपाय.
सही तरीके से बर्तन धोना और सुखाना
पशुपालन विभाग ने बर्तन साफ करने के लिए भी सही तरीका बताया है. सबसे पहले बर्तनों को सामान्य पानी से धोएं, फिर डिटर्जेंट या वॉशिंग पाउडर से अच्छी तरह साफ करें. इसके बाद गर्म पानी से धोना जरूरी है, जिससे कीटाणु पूरी तरह खत्म हो जाएं. धोने के बाद बर्तनों को धूप में सुखाना चाहिए, क्योंकि सूर्य की किरणें प्राकृतिक रूप से बैक्टीरिया को खत्म करती हैं. यह तरीका सस्ता और बेहद प्रभावी है.
स्वच्छता से बढ़ेगी आय और भरोसा
डेयरी विभाग का मानना है कि स्वच्छ दूध उत्पादन अपनाने से किसानों को सीधा फायदा मिलता है. साफ और गुणवत्तापूर्ण दूध की बाजार में ज्यादा मांग रहती है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलती है. इससे उपभोक्ताओं का भरोसा भी मजबूत होता है और डेयरी उत्पादों की बिक्री बढ़ती है. आज के समय में डेयरी व्यवसाय तेजी से आगे बढ़ रहा है. यदि किसान साफ-सफाई, सही दुहन और भंडारण के आसान नियम अपनाते हैं, तो वे कम लागत में उत्पादन बढ़ा सकते हैं. इससे उनकी आय में वृद्धि होती है और वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकते हैं.