भीषण गर्मी में पशु हो रहे बीमार! दूध उत्पादन गिरने का खतरा, पशुपालन विभाग से जानें बचाव के उपाय

Dairy Farming Tips: भीषण गर्मी में पशुपालन करना किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है क्योंकि इससे पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन प्रभावित होता है. इससे बचाव के लिए पशुओं के लिए हवादार और साफ-सुथरा आवास जरूरी है. गौशाला की नियमित सफाई, पानी का जमाव रोकना और कीटों से बचाव बेहद अहम है. गर्मी से राहत के लिए पंखे, कूलर और पेड़-पौधों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 27 Apr, 2026 | 07:50 PM

Dairy Summer Care Tips: गर्मी का मौसम हर साल और ज्यादा खतरनाक होता जा रहा है. पिछले साल कई शहरों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था और इस बार भी मौसम विभाग ने इसी तरह की तेज गर्मी का अनुमान जताया है. पशुपालन विभाग के अनुसार, ऐसी भीषण गर्मी में सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षी भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं. खासकर जो किसान पशुपालन करते हैं, उनके लिए यह समय मुश्किल होता है क्योंकि गर्मी से पशुओं की तबीयत खराब हो सकती है और उनका दूध भी कम हो जाता है.

पशुओं के लिए सही आवास है जरूरी

पशुपालन विभाग के अनुसार, गर्मियों में पशुओं के रहने की व्यवस्था सबसे अहम होती है. चाहे आप उन्हें घर में रखें या टीन शेड में, यह जरूरी है कि वहां सही वेंटिलेशन हो. यानी हवा का आना-जाना आसानी से हो सके. अगर एक तरफ से हवा आ रही है, तो दूसरी तरफ से निकलने का रास्ता भी होना चाहिए. साथ ही, पर्याप्त रोशनी भी जरूरी है ताकि वातावरण साफ और स्वस्थ बना रहे.

साफ-सफाई से दूर रहें बीमारियां

गौशाला या पशुओं के रहने की जगह को रोज साफ रखना बहुत जरूरी है. जहां पशु रहते हैं वहां पानी जमा नहीं होना चाहिए, क्योंकि गंदगी और नमी से कीड़े-मकोड़े और परजीवी पैदा हो जाते हैं. ये परजीवी पशुओं को बीमार और कमजोर कर सकते हैं. इसलिए गोबर और गोमूत्र को सही तरीके से हटाना चाहिए और उसे पशुओं से दूर रखना चाहिए, ताकि संक्रमण और बीमारी फैलने का खतरा कम हो सके.

ठंडा वातावरण बनाना है जरूरी

गर्मी से बचाव के लिए सिर्फ छाया ही नहीं, बल्कि ठंडक का इंतजाम भी जरूरी है. पशुओं को सीधी गर्म हवाओं से बचाएं. इसके लिए गौशाला में पंखे या कूलर का उपयोग किया जा सकता है. साथ ही, गौशाला के आसपास पेड़-पौधे लगाना भी एक अच्छा उपाय है, जिससे वातावरण ठंडा बना रहता है और प्राकृतिक छाया मिलती है.

पानी और हरे चारे का रखें खास ध्यान

गर्मियों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का खतरा काफी बढ़ जाता है. ऐसे में पशुओं को दिन में कई बार साफ और ठंडा पानी पिलाना जरूरी है. इसके साथ ही हरे चारे की पर्याप्त व्यवस्था भी होनी चाहिए. हरा चारा पोषण से भरपूर होता है और पशुओं को गर्मी से लड़ने की ताकत देता है. इससे उनकी ऊर्जा बनी रहती है और दूध उत्पादन पर भी नकारात्मक असर नहीं पड़ता.

छोटी सावधानियां, बड़ा फायदा

पशुपालन में गर्मियों के दौरान बहुत बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं होती, बल्कि छोटी-छोटी सावधानियां ही बड़े नुकसान से बचा सकती हैं. सही आवास, नियमित सफाई, ठंडक का इंतजाम और संतुलित आहार ये सभी मिलकर पशुओं को स्वस्थ रखते हैं. भीषण गर्मी के इस दौर में अगर किसान अपने मवेशियों की सही देखभाल करें, तो न केवल उन्हें बीमारियों से बचाया जा सकता है, बल्कि दूध उत्पादन भी स्थिर रखा जा सकता है. थोड़ी सी जागरूकता और सही उपाय अपनाकर पशुपालन को नुकसान से बचाया जा सकता है और मुनाफा भी बरकरार रखा जा सकता है.

 

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