पूरे देश में खेत बचाओ अभियान शुरू हो रहा है. इसका फोकस होगा कम खाद, सही खाद, सही सलाह. देश में अमेरिका–ईरान युद्ध की वजह से खाद संकट की बातें लगातार हो रही हैं. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक कार्यक्रम में कहा कि इस समय खाद का सही उपयोग बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि सिर्फ युद्ध की वजह से नहीं, खेत बचाने के लिए यह कदम जरूरी है, जो हर किसान को उठाना चाहिए. दिल्ली में इस अभियान की तैयारी के संबंध में शिवराज सिंह ने उच्चस्तरीय बैठक लेकर अभियान का फोकस संतुलित एवं विवेकपूर्ण उर्वरक उपयोग, मौसम की चुनौती के मद्देनजर समय पर किसान सलाह, पंचायत स्तर पर सक्रिय भागीदारी और योजनाओं के लाभ को सीधे गांव तक पहुंचाने पर रखने की बात कहीय
1 जून से शुरू हो रहे महीनेभर चलने वाले खेत बचाओ अभियान को प्रभावी और परिणामकारी बनाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान का फोकस खेत को बचाने, लागत को संतुलित करने और किसान को सही समय पर सही मार्गदर्शन देने पर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह अभियान ऊपर से नीचे तक नहीं, बल्कि पंचायत से लेकर राज्य और केंद्र तक साझी भागीदारी के मॉडल पर चलेगा. उन्होंने कृषि से जुड़े हर व्यक्ति से अभियान में जुड़ने की अपील की, जिसमें राज्यों के मंत्री भी शामिल हैं.
कम बारिश की चिंता पर भी होगा फोकस
बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने सबसे महत्वपूर्ण बिंदु के रूप में इस बात पर बल दिया कि रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर असंतुलित उपयोग को कम करना अभियान का प्रमुख उद्देश्य होगा. किसानों को मृदा परीक्षण आधारित, संतुलित और सही मात्रा में खाद तथा अन्य कृषि इनपुट के उपयोग के बारे में जागरूक करने, हरी खाद, जैविक और जैव–उत्पादों के उपयोग को बढ़ाने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के प्रदर्शन आयोजित करने का लक्ष्य रखा गया है.
चौहान ने कहा कि आने वाले समय को लेकर जो मौसम संबंधी चिंता जताई जा रही है, उसके मद्देनजर किसानों को व्यावहारिक सलाह दी जाएगी कि वे क्या करें, क्या न करें, कौन–सी फसल लें, कहां फसल विविधीकरण अपनाएं और कम पानी या जोखिम की स्थिति में कौन–से विकल्प बेहतर रहेंगे. अभियान का उद्देश्य केवल संदेश देना नहीं, बल्कि खेत–स्तर पर किसान को स्थिति–विशेष के अनुरूप सलाह देना होगा.
पंचायत स्तर पर अभियान को दी जाएगी मजबूती
बैठक में यह भी कहा कि पंचायत स्तर पर इस अभियान को मजबूत आधार दिया जाएगा. पंचायत स्तर पर मैकेनाइजेशन की मशीनों का वितरण, योजनाओं का लाभ और जहां संभव हो वहां सरकारी कार्यक्रमों का प्रत्यक्ष लाभ भी इसी अभियान के अंतर्गत जोड़ने के लिए शिवराज सिंह ने निर्देशित किया.
चौहान ने यह भी कहा कि अभियान को केवल विभागीय दायरे में सीमित नहीं रखा जाएगा. राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया जाएगा और मंत्रियों, सांसदों, विधायकों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों से भी भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास होगा, ताकि यह अभियान एक प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर जनसहभागिता का मजबूत मॉडल बन सके. उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण अभियान को प्रारंभिक दिनों से ही राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय ऊर्जा देगा.
1600 से ज्यादा टीमें, ज्यादा उर्वरक इस्तेमाल करने वाले 100 जिलों के लिए 500 विशेष टीमें
बैठक में बताया गया कि अभियान के लिए KVKs को सभी सहभागी संस्थानों के लिए प्रमुख समन्वयक की भूमिका दी गई है, साढ़े 1600 से अधिक टीमें बनाई गई हैं. अधिक उर्वरक उपयोग वाले 100 जिलों के लिए 500 टीमें गठित की गई हैं, जिनमें KVK, ICAR संस्थान, AICRP केंद्रों के वैज्ञानिक और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होंगे, जबकि ICAR संस्थानों और KVKs की 1150 से अधिक बहुविषयक टीमें भी समानांतर रूप से काम करेंगी.
शिवराज सिंह ने कहा कि अभियान को केवल खाद प्रबंधन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि योजनाओं का लाभ भी खेत तक पहुंचाया जाएगा. किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम–किसान से छूटे लाभार्थियों को जोड़ना, दलहन–तिलहन मिशन, ऑयल पाम, कॉटन मिशन, संतुलित पोषण, मिट्टी स्वास्थ्य, जल–संरक्षण और क्षेत्र–विशेष कृषि सलाह जैसी गतिविधियों को समन्वित रूप में जोड़ने का दृष्टिकोण अभियान को बहुउद्देशीय और प्रभावी बनाएगा.