Animal Care Tips: गलघोंटू, लंगड़ी बुखार और खुरपका-मुंहपका से रहें सतर्क, पशु चिकित्सक ने दी जरूरी सलाह

बरसात में गलघोंटू, लंगड़ी बुखार और खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. समय पर टीकाकरण, स्वच्छ वातावरण और संतुलित आहार से पशुओं का स्वास्थ्य और दूध उत्पादन सुरक्षित रखा जा सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 17 Jul, 2026 | 02:03 PM

Animal Care Tips: बरसात का मौसम शुरू होते ही पशुओं में कई संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इस मौसम में नमी, गंदगी और जलभराव के कारण संक्रमण तेजी से फैलता है, जिससे पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK Noida) के अनुसार, बरसात के दौरान पशुपालकों को विशेष सतर्क रहने की जरूरत होती है. समय पर टीकाकरण और बेहतर देखभाल से अधिकांश संक्रामक बीमारियों से बचाव किया जा सकता है.

बीमारियों से बचाव जरूरी

पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, बरसात के मौसम में गलघोंटू (HS), लंगड़ी बुखार (BQ) और खुरपका-मुंहपका (FMD) जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं. ये बीमारियां गाय, भैंस और अन्य दुधारू पशुओं के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं. संक्रमित पशुओं में तेज बुखार, मुंह और खुरों में घाव, लंगड़ापन, कमजोरी और दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. यदि समय रहते उपचार और टीकाकरण नहीं कराया जाए तो पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसलिए मौसम बदलने से पहले या बरसात की शुरुआत में पशुओं का टीकाकरण कराना सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है.

टीकाकरण को लेकर भ्रम से बचें

कई पशुपालकों के मन में यह गलत धारणा होती है कि टीका लगवाने से दूध उत्पादन कम हो जाता है या गर्भवती पशुओं को नुकसान पहुंच सकता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम स्पष्ट करते हैं कि यह केवल भ्रम है. टीकाकरण से दूध उत्पादन पर कोई स्थायी प्रभाव नहीं पड़ता. यदि किसी पशु में थोड़े समय के लिए दूध की मात्रा कम होती भी है, तो वह कुछ दिनों में सामान्य हो जाती है. वहीं, विशेषज्ञों के अनुसार गर्भवती पशुओं के लिए भी निर्धारित टीके पूरी तरह सुरक्षित हैं. इससे गर्भ या पशु के स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता. इसलिए सभी पात्र पशुओं का समय पर टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए.

संतुलित आहार पर भी दें विशेष ध्यान

बरसात के मौसम में केवल टीकाकरण ही पर्याप्त नहीं है. पशुओं के रहने की जगह को सूखा और साफ रखना भी बेहद जरूरी है. नमी और गंदगी के कारण बैक्टीरिया और वायरस तेजी से पनपते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम सलाह देते हैं कि पशुओं को हमेशा स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जाए, पौष्टिक एवं संतुलित आहार दिया जाए और गोशाला में जलभराव न होने दिया जाए. यदि किसी पशु में बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. समय पर टीकाकरण, नियमित देखभाल और स्वच्छ वातावरण अपनाकर पशुपालक अपने पशुओं को बरसात के मौसम में सुरक्षित रख सकते हैं और दूध उत्पादन के साथ अपनी आय को भी सुरक्षित बना सकते हैं.

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