पशुधन किसानों-गांवों की मजबूत कड़ी, देसी नस्ल की गाय-भैंसें और छोटे मवेशी बढ़ा रहे कमाई

देसी जानवरों की नस्लों को बचाने के लिए 2019 में शुरू की गई नेशनल पहल का जिक्र करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि देसी मवेशी, भैंस, मुर्गी और छोटे जुगाली करने वाले जानवर हमारी खेती की इकॉनमी की रीढ़ हैं. उनका विकास सीधे किसानों की खुशहाली, मजबूती और इनकम सिक्योरिटी से जुड़ा है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 14 Jan, 2026 | 08:07 PM

किसानों और गांवों को मजबूत करने में पशुधन सबसे अहम कड़ी साबित हुए हैं. खासकर देसी नस्ल की गाय-भैंसें, मुर्गी और छोटे पशु किसानों की कमाई बढ़ाने में मददगार साबित हो रहे हैं. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पशुधन से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है. उन्होंने पशु नस्ल पंजीकरण प्रमाणपत्र एवं नस्ल संरक्षण पुरस्कार कार्यक्रम में किसानों और पशुपालकों से बात की और उन्हें सम्मानित किया.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) ने पशु नस्ल पंजीकरण प्रमाणपत्र एवं नस्ल संरक्षण पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि जानवरों की इकोलॉजिकल अहमियत और भारत की देसी जानवरों की नस्लों को बचाने के लिए सरकार काम कर रही है, इसे और तेज करने की जरूरत है. जानवरों के साथ भारत का रिश्ता सिर्फ आर्थिक या न्यूट्रिशन से जुड़ा नहीं है, बल्कि असल में इकोलॉजिकल है.

पशुओं को बचाकर गांवों की रोजी-रोटी बचेगी

उन्होंने कहा यह बैलेंस का रिश्ता है. इस बैलेंस में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर पर्यावरण और आखिर में, धरती की भलाई पर पड़ता है. उन्होंने देसी नस्लों को बचाने के लिए देश भर में काम कर रहे साइंटिस्ट, इंस्टीट्यूशन और किसान समुदायों की बहुत तारीफ की. उन्होंने कहा कि उनकी कोशिशें जानवरों को बचाने से कहीं आगे हैं. वे बायोडायवर्सिटी की रक्षा कर रहे हैं, गांवों की रोजी-रोटी को मजबूत कर रहे हैं और टिकाऊ खेती के भविष्य को सुरक्षित कर रहे हैं.

देसी नस्ल के पशु खेती की इकॉनमी की रीढ़

देसी जानवरों की नस्लों को बचाने के लिए 2019 में शुरू की गई नेशनल पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देसी मवेशी, भैंस, मुर्गी और छोटे जुगाली करने वाले जानवर हमारी खेती की इकॉनमी की रीढ़ हैं. उनका विकास सीधे किसानों की खुशहाली, मजबूती और इनकम सिक्योरिटी से जुड़ा है.

भैंसों की तुलना में मवेशियों की घटती आबादी पर चिंता

ICAR के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट ने कहा कि विकसित भारत पशु धन का विजन लंबे समय तक संरक्षण के साथ-साथ जिम्मेदारी से रिसोर्स का इस्तेमाल करने पर केन्द्रित है. उन्होंने कहा कि 2008 से 242 जानवरों की नस्लें रजिस्टर की गई हैं. 2047 तक विकसित भारत को पाने के लिए भाकृअनुप का लक्ष्य सभी देसी जानवरों की नस्लों का 100 परसेंट रजिस्ट्रेशन करना है. आर्थिक कारणों से भैंसों की तुलना में मवेशियों की घटती आबादी पर चिंता जताई और सुधार पर ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया.

4 किसानों को मिला नस्ल संरक्षण पुरस्कार

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) ने स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण में उनके उत्कृष्ट योगदान को पहचानते हुए वर्ष 2025 के लिए व्यक्तियों और संस्थानों को नस्ल संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया. व्यक्तिगत श्रेणी में जीतुल बुरागोहेन को लुइट भैंस के संरक्षण में उनके अनुकरणीय प्रयासों के लिए प्रथम पुरस्कार दिया गया, जबकि कुडाला राम दास को पुंगनूर मवेशियों के संरक्षण के लिए द्वितीय पुरस्कार मिला. नस्ल संरक्षण में सराहनीय कार्य के लिए तिरुपति तथा रामचंद्रन काहनार को सांत्वना पुरस्कार दिए गए.

संस्थागत श्रेणी में बिनझारपुरी मवेशी प्रमोटर्स एंड प्रोड्यूसर्स सोसाइटी को बिनझारपुरी मवेशियों के संरक्षण के लिए प्रथम पुरस्कार मिला. पुलिक्कुलम मवेशियों के संरक्षण के लिए तमिलनाडु पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय को द्वितीय पुरस्कार मिला. मेचेरी भेड़ के संरक्षण में योगदान के लिए तमिलनाडु पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय को भी सांत्वना पुरस्कार दिया गया.

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Published: 14 Jan, 2026 | 08:05 PM

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