Tip Of The Day: आम के पेड़ों पर ‘स्केल इंसेक्ट’ का हमला! समय रहते नहीं संभले तो घट सकती है पूरी पैदावार

Mango Farming: मार्च के महीने में आम के पेड़ों पर बौर आते ही स्केल इंसेक्ट जैसे खतरनाक कीट सक्रिय हो जाते हैं. यह कीट पत्तियों से रस चूसकर पेड़ की ग्रोथ और फल की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, जिससे पैदावार घट सकती है. समय रहते लक्षण पहचानकर संक्रमित पत्तियों को हटाना, सही दवाओं का छिड़काव करना और नियमित निगरानी रखना बेहद जरूरी है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 2 Mar, 2026 | 11:21 AM

Aam Ki Bagwani Ki Tips: उत्तर भारत के कई जिले अपनी ‘मैंगो बेल्ट’ के लिए जाना जाता है, जहां आम की सैकड़ों किस्में उगाई जाती हैं. मार्च का महीना शुरू होते ही आम के पेड़ों पर बौर आना शुरू हो जाता है और बागों में नई उम्मीदें दिखाई देने लगती हैं. NHRDF के डॉ. रजनीश मिश्रा (संयुक्त निदेशक, बागवानी) बतातें हैं कि, इसी समय कुछ हानिकारक कीट भी सक्रिय हो जाते हैं, जो फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. इन कीटों में सबसे खतरनाक माना जाता है स्केल इंसेक्ट, जो धीरे-धीरे पूरे पेड़ को कमजोर कर देता है और उत्पादन पर सीधा असर डालता है.

क्या है स्केल इंसेक्ट और कैसे पहुंचाता है नुकसान

डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार स्केल इंसेक्ट एक छोटा लेकिन बेहद नुकसानदेह कीट है. यह आम की पत्तियों पर छोटे-छोटे दानों या फुंसियों की तरह दिखाई देता है. पहली नजर में इसे सामान्य दाग समझ लिया जाता है, लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकती है.

यह कीट पत्तियों से रस चूसता है, जिससे पेड़ की फोटोसिंथेसिस प्रक्रिया प्रभावित होती है. जब पत्तियां ठीक से भोजन नहीं बना पातीं, तो उसका असर सीधे फल पर पड़ता है. फल का आकार छोटा रह जाता है, उनकी चमक और गुणवत्ता भी घट जाती है. यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए, तो यह कीट पत्तियों से निकलकर फलों पर भी हमला कर देता है, जिससे पूरी फसल प्रभावित हो सकती है.

शुरुआती लक्षण पहचानें और तुरंत कदम उठाएं

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन दानों को दबाया जाए तो अंदर से बारीक कीट निकलते दिखाई देते हैं. यही स्केल इंसेक्ट का स्पष्ट संकेत है. यदि पेड़ पर कुछ ही पत्तियां प्रभावित हों, तो सबसे पहले उन पत्तियों को तोड़कर जला दें या जमीन में गहरा गड्ढा खोदकर दबा दें. गिरी हुई पत्तियों को खुला न छोड़ें, क्योंकि उनसे दोबारा कीट निकलकर पेड़ों पर चढ़ सकते हैं. शुरुआती अवस्था में ही यह कदम उठाने से बड़े नुकसान से बचा जा सकता है.

दवाओं का सही उपयोग और स्टिकर की भूमिका

यदि बाग में कीटों का प्रकोप अधिक हो जाए, तो रासायनिक दवाओं का प्रयोग करना जरूरी हो जाता है. विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान डायमेथोएट, इमामेक्टिन, इमिडा या थियामेथोक्सम जैसी दवाओं में से किसी एक का छिड़काव करें. छिड़काव एक सप्ताह के अंतराल पर दवा बदल-बदल कर करना ज्यादा प्रभावी माना जाता है. साथ ही घोल में ‘स्टिकर’ मिलाना बेहद जरूरी है.

आम की पत्तियां चिकनी होती हैं और उन पर वैक्स की परत होती है, जिससे बिना स्टिकर के दवा टिक नहीं पाती. स्टिकर दवा को पत्तियों पर चिपकाए रखता है, जिससे कीटों पर बेहतर असर होता है.

मार्च में सतर्कता क्यों है जरूरी

मार्च का महीना आम की फसल के लिए संवेदनशील समय होता है, क्योंकि इसी दौरान बौर आते हैं और फल बनने की प्रक्रिया शुरू होती है. यदि इस समय कीटों पर नियंत्रण पा लिया जाए, तो आगे चलकर फलों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर मिलते हैं. बागवानों को नियमित रूप से अपने पेड़ों की निगरानी करनी चाहिए. किसी भी तरह के संदेह या भ्रम की स्थिति में कृषि विभाग या विशेषज्ञों से सलाह लेकर ही दवाओं का प्रयोग करें. स्केल इंसेक्ट छोटा कीट जरूर है, लेकिन समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो यह पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकता है.

शुरुआती लक्षण पहचानकर, संक्रमित पत्तियों को हटाकर और सही दवा का उपयोग करके बागवान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं. जागरूकता और समय पर कार्रवाई ही बेहतर उत्पादन की कुंजी है.

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